Site icon अग्नि आलोक

प्रदेश में आनंद संस्थान फिर भी रोज दो आत्महत्या ,15 हजार 386 नागरिकों ने आत्महत्या की

Share

डॉ. भूपेंद्र विकल
नागरिकों में आनंद लाने के लिए सरकार ने 2016 में राज्य आनंद विभाग बनाया था। मुख्य उद्देश्य नागरिकों की मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक दिक्कत समाप्त कर उन्हे आन्तरिक रूप से मजबूत बनाना, मुख्य रूप से तनाव कम कर प्रसन्न बनाए रखना था लेकिन आठ साल में विभाग ने ठोस काम नहीं किया। नागरिक तनावग्रस्त हैं। प्रतिदिन दो नागरिक आत्महत्या कर रहे हैं। एनसीआरबी के अनुसार गत वर्ष 15 हजार 386 नागरिकों ने आत्महत्या की। भोपाल का आंकड़ा ही 527 है। राज्य आनंद संस्थान का संचालन एक सोसायटी के जरिए किया जाता है। फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत इसे गठित किया गया। अध्यक्ष के अलावा प्रतिनियुक्ति या अनुबंध पर सचिव स्तर के अधिकारी को सीईओ बनाया जाता है। मप्र राज्य आनंद संस्थान बनाने वाला देश कि पहला राज्य है।

संस्थान का बजट…
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने 3.60 करोड़ का बजट प्रति वर्ष तय किया था। बाद में करोड़ों रुपए के अनुपूरक बजट को मंजूरी दी गई। 2022-23 में पांच करोड़ रुपए का बजट दिया गया, जो सिर्फ ट्रेनिंग और सेमिनार पर खर्च हो गया। कार्यक्रम की रूपरेखा आने पर जिले के राज्य आनंद संस्थान  के समन्वयक और मास्टर ट्रेनर को कार्यक्रमों का निर्देश कलेक्टर से मिलता है। प्रति कार्यक्रम मात्र दो हजार रुपए ही फंड दिया जाता है। मास्टर ट्रेनर ज्यादा कार्यक्रम नहीं करवाते क्योंकि जेब से लग जाता है। राज्य आनंद संस्थान ने सुझाव के लिए कमेटी बनाई थी, जिसमें ईशा फाउंडेशन के जग्गी वसुदेव, पतंजलि के बाबा रामदेव और आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री रविशंकर महाराज सहित अनेक धर्मगुरु को शामिल थे। 

गतिविधियां केवल नाम के लिए
आनंद क्लब: गतिविधि नाम मात्र  की

आनंद सभा: स्कूली बच्चों लिए आनंद सभा का गठन कर प्रत्येक सप्ताह गतिविधि प्रस्तावित। यह काम अधिकांश कागजों में

आनंद कैलेंडर: वर्षभर की गतिविधियों के लिए पर इसके अनुसार कार्य नहीं

अल्प विराम: सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रत्येक महीने अल्प विराम कार्यक्रम प्रस्तावित है। प्रति माह दो ही हो रहे।

आनंद उत्सव: प्रत्येक वर्ष 14 से 28 जनवरी तक आनंदोत्सव मनाया जाता है, इस वर्ष नहीं मना।

नेकी की दीवार का काम ठीक : आनंदम गतिविधि और नेकी की दीवार का काम ठीक चल रहा है। प्रत्येक जिले मे यह गतिविधि  प्रमुखता से चल रही है।

कमलनाथ ने बंद करने की पहल की थी : कांग्रेस सरकार के समय मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे बंद करने की पहल की थी।

आनंद क्लब,आनंद सभा, अल्प विराम कार्यक्रम नियमित  प्रति माह हो रहे है। 400 स्कूलों में आनंद सभा का आयोजन होता है। लगभग 1600 शासकीय अध्यापको को ट्रेनिंग दी जा चुकी है,एक स्कूल से दो अध्यापक लिए जाते हैं। साल में एक बार आनंदोत्सव होता है। प्रत्येक तहसील मे नेकी की दीवार संचालित है।
अखिलेश अर्गल
, सीईओ,राज्य आनंद संस्थान

Exit mobile version