*“बहुराष्ट्रीय कंपनियों भारत छोड़ो – कॉरपोरेट कृषि छोड़ो” दिवस पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए 50% टैरिफ के खिलाफ प्रदर्शन*
*किसान संगठनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपे*
*भारत छोड़ो आंदोलन की 83 वीं वर्षगांठ के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले तथा भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता ( सीटा ) की प्रतियां जलाई गईं जिसमें पूरे देश में गुस्से की लहर साफ़ देखने को मिली। दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों, अन्य मजदूर संगठनों और खेत मज़दूर संगठनों के मंचों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2017 में वादा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी की जाएगी। लेकिन वास्तव में, उनकी कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों ने उत्पादन लागत और कृषि संकट को दोगुना कर दिया। लाभकारी एमएसपी और व्यापक कर्जमाफी से इनकार, पिछले तीन केंद्रीय बजटों में खाद सब्सिडी में ₹85,000 करोड़ की कटौती और मनरेगा के आवंटन में कटौती, ने भारतीय कृषि की प्रतिस्पर्धात्मकता को तबाह कर दिया है। भारत में रोज़ाना 31 किसान आत्महत्या करते हैं। ग्रामीण परिवार मजबूर होकर पलायन कर रहे हैं, जिससे शहरों में मज़दूरी के लिए अतिरिक्त श्रमबल बढ़ रहा है और मज़दूर वर्ग की सौदा-शक्ति कमजोर हो रही है।
मेहनतकश तबके के अधिकारों की रक्षा करने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मज़बूत व प्रतिस्पर्धी बनाने ताकि वह घरेलू औद्योगिक उत्पादों को आत्मसात कर सके और विश्व बाज़ार में प्रतिस्पर्धा व प्रगति सुनिश्चित करने की बजाय मोदी सरकार देश के प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों की लूट के लिए कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों पर अड़ी है।
मोदी सरकार ने विकसित देशों, जिनमें यूके और यूरोपीय संघ शामिल हैं, के दबाव में आकर मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर करने और भारतीय अर्थव्यवस्था को खोलने का निर्णय लिया है, जिससे स्वतंत्र भारत की संप्रभु शक्ति खतरे में है। एसकेएम ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबंगई का ठोस जवाब नहीं दिया।
एसकेएम प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे किसानों को लाभकारी मूल्य, मज़दूरों को न्यूनतम जीविका मज़दूरी, मेहनतकश तबके को कर्ज़मुक्ति, चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, कृषि भूमि की कॉरपोरेट लूट को खत्म करने और गहरी बेरोज़गारी को दूर करने की लंबित मांगों को तुरंत स्वीकार करें। यदि प्रधानमंत्री कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों पर अड़े रहते हैं, तो एसकेएम चेतावनी देता है कि पूरे भारत में मज़दूर-किसान एकता की संयुक्त शक्ति से लंबे, उग्र और विशाल आंदोलन होंगे।
मध्यप्रदेश में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों और श्रमिक संगठनों ने अनेक जिलों, तहसील और ग्रामों में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और मोदी के पुतले व सीटा की प्रतियों का दहन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
बीना में किसान संघर्ष समिति और भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन द्वारा किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम और संदीप ठाकुर के नेतृत्व में सभा के बाद रैली निकालकर एस डी एम को ज्ञापन सौंपा गया। डॉ सुनीलम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब के किसानों ने 3 महीने संघर्ष कर लैंड पुलिंग पॉलिसी रद्द कराई है। कर्नाटक के देवनहल्ली के 13 गांवों ने
1200 दिन का आंदोलन चला कर भूमि अधिग्रहण रद्द कराया है । 380 दिन आंदोलन चलाकर
750 किसानों की शहादत देकर
3 किसान विरोधी कानून रद्द कराए हैं। अब संयुक्त किसान मोर्चा अंतर्राष्ट्रीय समझौतों से किसानों की
कॉरपोरेट की लूट को रोकने की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सागर जिले में एच डी एफ सी बीमा कंपनी ने 20 वर्षों में 1000 करोड़ का फसल बीमा प्रीमियम लिया लेकिन सागर जिले के 750 गांवों के 1 लाख किसानों को केवल 5 करोड़ मुआवजा दिया। यह फसल बीमा कंपनियों की लूट है।
इंदौर में किसान संघर्ष समिति , अखिल भारतीय किसान सभा, किसान सभा अजय भवन, अखिल भारतीय किसान मजदूर संगठन ,भारतीय किसान मजदूर सेना, एटक, सीटू, एसएमएस आदि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। केवल किसान संघर्ष समिति के मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री के नेतृत्व में गांधी हाल से जुलूस निकाला गया तथा संभाग कार्यालय पहुंचकर ट्रंप के पोस्टर की होली जलाई गई, बाद में आयुक्त को ज्ञापन सौंपा गया।
छिंदवाड़ा में किसान संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव और प्रदेश सचिव सज्जेे चंद्रवंशी के नेतृत्व में भूला पुनर्वास केंद्र, जमुनिया और चौसरा में 3 स्थानों पर ‘अडानी छिंदवाड़ा छोड़ो’ के नारे के साथ गौतम अडानी का पुतला दहन किया गया।
रीवा में एसकेएम के नेताओं ने ऋतुराज पार्क से मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मार्च निकालकर पुतला दहन किया तथा राष्ट्रपति के नाम आयुक्त, रीवा को राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों का ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम में किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिवसिंह, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, प्रदेश सचिव संतकुमार, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष गया प्रसाद मिश्र, सीटू यूनियन से गिरजेश सिंह सेंगर ,मध्य प्रदेश किसान सभा से रामजीत सिंह, भारतीय किसान यूनियन टिकैत से सुग्रीव सिंह ,राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ से शोभनाथ कुशवाहा, अग्रणी किसान संघ से अशोक चतुर्वेदी, बंसल मोर्चे से प्रदीप बंसल एवं अन्य संगठनों के साथी शामिल हुए।
ग्वालियर में किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव शत्रुघ्न यादव, जिला अध्यक्ष रमेश परिहार, अखिल भारतीय किसान सभा के अखिलेश यादव, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), ए आई के के एस, ट्रेड यूनियन एटक, इंटक, हिंद मजदूर सभा के द्वारा पूर्व पार्षद भगवान दास सैनी, पार्षद पी पी शर्मा, सुग्रीव कुशवाहा, चौधरी ओमप्रकाश, गनी खान, विनोद रावत, मयंक रावत, रामविलास गोस्वामी, रामबाबू जाटव के नेतृत्व में पुतला दहन और जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा गया।
सिवनी जिले के ग्राम कमकासुर में किसान संघर्ष समिति और अखिल भारतीय किसान सभा के द्वारा डीडी वासनिक, रामकुमार सनोडिया, पवन सनोडिया, इमरत सनोडिया के नेतृत्व में आर आई को ज्ञापन सौंपा गया।
मुलताई में किसान संघर्ष समिति द्वारा जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
राजगढ़ और रायसेन में किसान जागृति संगठन प्रमुख इरफ़ान जाफरी के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपे गए।
भागवत परिहार
कार्यालय सचिव, किसंस, मुलतापी
9752922320