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रणजीत हनुमान मंदिर पर सजेगा आंजनेय कोट्टारम्:ऐसे हुई अलग-अलग थीम पर मंदिर सजाने की शुरुआत

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इंदौर1

6 अप्रैल यानी गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव पर्व धूमधाम से मनेगा। हनुमान मंदिरों में सजावट, लाइटिंग से लेकर भगवान का कैसा श्रंगार करना है इसकी तैयारी चल रही है। भक्तों से लेकर मंदिर के पुजारी तक सभी इस काम में लगे है।

वहीं इंदौर का एक बड़ा ओर प्राचीन मंदिर ऐसा है, जहां इस उत्सव को लेकर जोर शोर से तैयारी चल रही है। इस बार इस मंदिर में आने वाले भक्तों को कुछ खास और अनोखा देखने को मिलेगा।

हम बात कर रहे है इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर की। 134 साल से भी ज्यादा प्राचीन है ये मंदिर। स्थापना के समय से ही हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाने की परंपरा यहां चली आ रही है। हनुमान जन्मोत्सव पर रणजीत हनुमान मंदिर आपको इस बार कुछ खास और अलग दिखेगा। मंदिर में इस साल भी राम-हनुमान जन्मोत्सव सप्ताह मनाया जा रहा है।

जानते है इस बार क्या कुछ खास मंदिर में आपको नजर आएगा…

हनुमान जन्मोत्सव पर रणजीत हनुमान मंदिर दक्षिण भारतीय शैली (थीम) आजंनेय कोट्‌टारम् (मां अंजनी पुत्र का महल) पर सजेगा। वहीं मंदिर के पुजारी और भक्त मंडल के सदस्य भी साउथ इंडियन ड्रेस में दिखेंगे। सभी भक्त अपनी-अपनी ड्रेस भी तैयार करा रहे है। इस ड्रेस में सफेद लुंगी, सफेद शर्ट और सफेद गमछा डाले नजर आएंगे। मंदिर सजाने का काम भी शुरू हो चुका है। वहीं ड्रेस भी तैयार की जा रही है। मथुरा-वृंदावन के कलाकार इंदौर पहुंच चुके हैं। उन्होंने सजावट के लिए जरूरी स्ट्रक्चर बनाना शुरू कर दिया है।

भक्तों को इस तरह दिया गया निमंत्रण।

ऑनलाइन सर्च और वहां के मंदिरों के दर्शन करने वालों से ली जानकारी

इस बार जो आजंनेय कोट्टारं सजाया जा रहा है। वह दक्षिण भारतीय मंदिरों का नमूना है। इसकी डिजाइन फाइनल करने के पहले रामेश्वरम सहित अन्य मंदिरों के फोटो-वीडियो को देखा गया। जिसके बाद मंदिर परिसर की नक्काशी व रंग रोगन के हिसाब से ही कलाकारों को डिजाइन बताई। अब ये कलाकार इन डिजाइन के आधार पर मंदिर को दक्षिण भारतीय शैली के रूप में तैयार करने का नाम कर रहे है। मंदिर में होने वाली सजावट में खास बात यह है कि इस थीम की प्लानिंग उन लोगों के साथ मिलकर की गई है, जो पहले साउथ के कई मंदिरों में घूम चुके है, वहां के दर्शन कर चुके है। मंदिर में रणजीत बाबा को देवरा, हनुमंत वाड़ा, रणजीत बाबा का राज घराना सहित महाराष्ट्रीयन, राजपूताना सहित अन्य थीम पर मंदिर को सजाया जा चुका है।

3 क्विंटल गेदा, मधुकामिनी व केले के पत्तों से सजेगा

हनुमान जन्मोत्सव के दिन मंदिर परिसर में आपको तीन क्विंटल गेंदे के फूल, 1 हजार बंच मधुकामिनी के फूल और केले के पत्तों की सजावट भी नजर आएगी। इसके अलावा मंदिर को सजाने के लिए 400 मीटर कपड़ा, 8 हजार रनिंग फीट लकड़ी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

2022 में रणजीत हनुमान मंदिर में सजा था हनुमंत वाड़ा

बुधवार रात को होगा भगवान का महाभिषेक

पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि बुधवार रात 9.30 बजे भगवान रणजीत हनुमान का महाभिषेक शुरू किया जाएगा। पंचामृत से भगवान का महाभिषेक होगा। महाभिषेक के बाद रात 11.30 बजे से भगवान का दक्षिण भारतीय शैली में श्रृंगार शुरू किया जाएगा, जो सुबह 5.30 बजे तक पूरा होगा। गुरुवार सुबह 6 बजे भगवान की जन्मोत्सव आरती होगी। इसके बाद शाम को 7 बजे भगवान की आरती की जाएगी। दिनभर भक्त भगवान के इस स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। गुरुवार रात 1 बजे भगवान का अभिषेक कर फिर से श्रृंगार किया जाएगा और शुक्रवार सुबह 6 बजे भगवान की कांकड आरती होगी और अखंड रामायण पाठ का समापन होगा।

महाराष्ट्रीयन थीम पर मराठी वेशभूषा में नजर आए थे भक्त व भक्त मंडल के सदस्य

राम दरबार सहित अन्य मंदिरों का भी होगा विशेष श्रृंगार

रणजीत हनुमान मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ, मां दुर्गा, राम दरबार के साथ ही भगवान रणजीत हनुमान विराजमान है। हनुमान जन्मोत्सव के दिन इन सभी मंदिरों में भगवान का भव्य श्रृंगार तो होगा ही साथ ही भगवान के आसपास साउथ इंडियन मंदिरों की तरह मंगल गिरी भी सजाई जाएगी, जिससे यहां की भव्यता ओर बढ़ेगी। रणजीत हनुमान का भी भव्य श्रृंगार दक्षिण भारतीय शैली पर ही किया जाएगा।

मंदिर परिसर में चल रहा है लकड़ी और कपड़ों से डिजाइन तैयार करने का काम।

भक्तों को नहीं होगी कोई परेशानी

हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुबह से लेकर रात में यहां लाखों भक्त भगवान के दर्शन करने आएंगे। उनके दर्शन अच्छे से हो इस देखते हुए जिगजैग पैर्टन पर भक्त लाइन में लगेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में 48 कूलर (गर्मी को देखते हुए) लगाए जाएंगे। यहां आने वाले भक्तों को ठंडा पानी और शरबत भी लाइन में ही भक्त मंडल से सदस्यों द्वारा दिया जाएगा, ताकि उन्हें कोई दिक्कत न हो। साथ ही 4 बड़ी स्क्रीन के माध्यम से लाइव दर्शन भी भक्त कर सकेंगे।

रणजीत बाबा का अलग-अलग स्वरूप में किया जा चुका है श्रृंगार।

2015 में शुरू हुई थीम पर सजावट की परंपरा

मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास बताते हैं कि मंदिर के भक्त मंडल में करीब 25 हजार भक्त हैं। मंदिर में होने वाले आयोजनों के पहले भक्त मंडल के उपस्थित सदस्यों के साथ बैठकर पूरा विचार-विमर्श किया जाता है। साल 2015 में भी इसी तरह जब भक्त मंडल के सदस्य वे लोग विचार करने बैठे थे। इसी में निर्णय लिया गया कि श्री हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिर को अलग थीम पर तैयार किया जाए। इसके बाद से ही मंदिर को हनुमान जन्मोत्सव पर अलग थीम पर सजाने की शुरुआत हुई। यह परंपरा आठ सालों से लगातार चली आ रही है। लेकिन कोरोना की वजह से एक साल आयोजन को टालना पड़ा था। पं. व्यास ने बताया कि इसके पीछे हमारी सोच ये रहती है कि युवाओं को धर्म से जोड़ा जा सके। ऐसे आयोजनों में उन्हें क्रिएटिविटी दिखाने का मौका मिलता है।

कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में नहीं हुए थे कोई आयोजन।

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