अग्नि आलोक

*सोशल मीडिया बैन पर नेपाल में भारी बवाल, संसद में तोड़फोड़, 20 की मौत, पीएम ओली के घर पर फेंके पत्थर, गृहमंत्री ने दिया इस्तीफा*

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भारत के पड़ोस नेपाल में बवाल मच गया है। सरकार से ग़ुस्साए सैकड़ों प्रदर्शनकारी सोमवार को नेपाल के संसद भवन में घुस गए। हिंसा हुई। नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने सोमवार को हिंसक प्रदर्शन हुआ। Gen-Z के प्रदर्शन में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 250 से अधिक लोग घायल हैं। नेपाली संसद के बाहर प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई, लेकिन अब यह आंदोलन प्रधानमंत्री केपी ओली के गृहनगर तक पहुंच गया है। बता दें कि केपी ओली का गृहनगर राजधानी काठमांडू से करीब 400 किलोमीटर दूर है।

पिछले कुछ दिनों से नेपाल में सरकार के ख़िलाफ़ असंतोष बढ़ रहा था। कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार और सरकार के सत्तावादी रवैये को लेकर लोगों में बेहद नाराज़ी थी। इसी बीच सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि युवाओं में ग़ुस्सा फूट पड़ा। वे सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन 26 साल से कम उम्र के युवाओं का है जिन्हें जेनरेशन Z कहा जाता है। इस वजह से इस प्रदर्शन को जेन Z का प्रोटेस्ट कहा जा रहा है।सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का मुद्दा तब और गंभीर हो गया, जब सरकार ने संसद में काम से घर यानी ‘वर्क फ्रॉम होम’ की नीति को लागू करने का प्रस्ताव रखा। इसे प्रदर्शनकारियों ने जनता की आवाज को अनसुना करने की कोशिश के रूप में देखा। इसके अलावा बढ़ते कर, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सांसदों द्वारा विशेषाधिकारों की मांग ने भी जनता के ग़ुस्से को भड़काया है।

सोमवार सुबह हजारों प्रदर्शनकारी काठमांडू की सड़कों पर उतरे और संसद भवन की ओर मार्च किया। स्थिति तब बेकाबू हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर संसद भवन में प्रवेश कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे और सरकार से सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और जनता के हित में नीतियां बनाने की मांग कर रहे थे।

पुलिस ने किया बल प्रयोग

पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इसमें आंसू गैस, लाठीचार्ज और कुछ जगहों पर कथित तौर पर गोलीबारी भी शामिल थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर निहत्थे लोगों पर हिंसा करने और बख्तरबंद वाहनों व स्नाइपर्स की तैनाती कर डराने का आरोप लगाया है। एक प्रदर्शनकारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हमारी आवाज सुनने के बजाय, सरकार ने हमें गुंडों और हिंसा से जवाब दिया।’

प्रदर्शनकारी सरकार पर भ्रष्टाचार करने, सत्तावादी नीतियाँ अपनाने, नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का आरोप लगा रहे हैं।

कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने सोशल मीडिया को बंद कर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की है, जो एक लोकतांत्रिक देश में अस्वीकार्य है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘जो देश लोकतंत्र की नींव पर बना है, वहाँ सरकार अपनी जनता की आवाज को दबाने के लिए हिंसा और सेंसरशिप का सहारा ले रही है। यह निराशाजनक है।’

सरकार का जवाब

प्रदर्शनकारियों के संसद भवन में प्रवेश के बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करने की घोषणा की है। सूत्रों के अनुसार, काठमांडू में कर्फ्यू लागू करने की भी योजना बन रही है। सरकार का कहना है कि यह क़दम क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। हालाँकि, प्रदर्शनकारी इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं।

नेपाल में हाल के महीनों में असंतोष की लहर देखी गई है। बढ़ते कर, नौकरी के अवसरों की कमी, भ्रष्टाचार के मामले और सांसदों द्वारा जनता को ‘मूर्ख’ कहने जैसे बयानों ने लोगों का ग़ुस्सा बढ़ाया है। इसके अलावा, एक टैक्सी चालक की पुलिस वाहन से कुचलकर मौत और कुछ सांसदों के देश छोड़कर भागने की ख़बरों ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।

यह घटना नेपाल के लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। प्रदर्शनकारी सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिसमें सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाना, भ्रष्टाचार पर जांच और जनहित में नीतियां शामिल हैं। दूसरी ओर, सरकार का कड़ा रुख और सैन्य बल की तैनाती स्थिति को और मुश्किल बना सकती है। काठमांडू में तनावपूर्ण माहौल के बीच, यह साफ़ है कि जनता और सरकार के बीच विश्वास की कमी गहरी हो चुकी है।

गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा

सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाद हुए बवाल के बाद गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रमेश ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया है। बता दें कि अभी भी नेपाल में सड़क से लेकर संसद तक बवाल जारी है।

जांच समिति की गठित

देश में भड़की हिंसा की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कैबिनेट की बैठक में इसको लेकर फैसला लिया गया। जांच समिति को हिंसा पर 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी। 

पूर्व उप प्रधानमंत्री ने की निंदा

पूर्व उप-प्रधानमंत्री राजेंद्र महतो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की निंदा की और इसे तुरंत हटाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा कठोर रुख से हिमालयी देश में अशांति और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध तुरंत हटाने की तत्काल आवश्यकता है। सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए; इसके लिए और विकल्प होने चाहिए।

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