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 सुप्रीम कोर्ट में महिला एडवोकेट अरुंधति काटजू  की एंट्री होते ही सारे कैमरे उनकी तरफ घूम गए

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नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हलचल थी। पूरे देश का मीडिया यहां पहुंचा हुआ था। समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता को लेकर फैसला आना था। हालांकि, जब एक महिला एडवोकेट की सुप्रीम कोर्ट में एंट्री हुई तो सारे कैमरे उस तरफ घूम गए। ये महिला कोई और नहीं, बल्कि एलजीबीटी राइट ऐक्टिविस्‍ट अरुंधति काटजू थीं। वह जानी-मानी एडवोकेट हैं। वह समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लड़ती रही हैं। 2016 में काटजू ने नवतेज सिंह जौहर और अन्य बनाम भारत सरकार मामले में मुख्य याचिका का मसौदा तैयार किया था। काटजू ने ही भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से संबंधित नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत सरकार (2018) मामले में मुख्य याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया।

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस बारे में कानून बनाने का काम संसद का है। समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दिए जाने का अनुरोध करने संबंधी 21 याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई की। प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायालय कानून नहीं बना सकता, बल्कि उनकी केवल व्याख्या कर सकता है। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव करना संसद का काम है।

इसके पहले जब एलजीबीटी राइट ऐक्टिविस्‍ट अरुंधति काटजू की सुप्रीम कोर्ट में एंट्री हुई तो सभी कैमरे उनकी ओर घूम गए। अरुंधति काटजू समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लड़ती रही हैं। 19 अगस्त, 1982 में जन्‍मीं अरुंधति काटजू मशहूर महिला एडवोकेट हैं। वह भारत और अमेरिका में प्रैक्टिस करती रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में कई बड़े मामलों की पैरवी की है। इनमें सेक्‍शन 377 का मामला, ट्रांस पुरुष को उसके माता-पिता की ओर से अवैध रूप से कैद करने का मामला, ऑगस्टा वेस्टलैंड रिश्वत मामला, 2 जी स्पेक्ट्रम भ्रष्टाचार मामला शामिल हैं। जेसिका लाल मर्डर केस में भी वह जुड़ी थीं।

अरुंधति काटजू ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलूर (2005) से बी.ए.एल.एल.बी. की है। 11 साल तक इंडियन बार में प्रैक्टिस करने के बाद उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क में (2017) एलएलएम में दाखिला लिया। वह ह्यूमन राइट्स फेलो, जेम्स केंट स्कॉलर और पब्लिक इंटरेस्ट ऑनरी थीं।

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