Site icon अग्नि आलोक

सिंध के लोगों को गायब करा रहे आसिम मुनीर, अब सुलगेगा कराची

Share

कराची:पाकिस्‍तान के कराची और हैदराबाद के बीच ट्रैफिक एक बार फिर से ब्‍लॉक होने की उम्मीदें हैं. हैदराबाद बाईपास , जो M9 मोटरवे को नेशनल हाईवे से जोड़ता है — आने वाले दिनों में एक और बड़े धरने की जगह बनने वाला है.द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, जेय सिंध महाज (JSM) ने सिंधी राष्‍ट्रवादियों के जबरन गायब किए जाने और सरकार समर्थित दमन की निंदा करने के लिए इस प्रदर्शन का ऐलान किया है. पिछले दिनों बलूचिस्तान पोस्ट ने एक चश्मदीद के हवाले से बताया था कि गनी अमन चंदियो को 28 अक्टूबर को तारिक रोड के पास शाहराह-ए-कायदीन के मेमोना हॉस्पिटल से किडनैप किया गया था.

लोगों का गायब होना जारी 

यह घोषणा पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) के उन दो लोगों को गिरफ्तार करने के दावे के बाद हुई, जिन्हें JSM ने पहले लापता बताया था, गनी अमन चंदियो और सरमद मीरानी. सीटीडी ने दोनों पर आरोप लगाया कि वो आतंकवाद में शामिल जेएसएम से जुड़े हैं. जवाब में जेएसएम के चेयरमैन रियाज अली चंदियो ने कहा कि उनकी पार्टी चुप रहने के लिए डरी हुई नहीं है. उन्होंने कहा, ‘सिंध के लोग अपनी ही जमीन पर अजनबी जैसा महसूस कर रहे हैं. कानून का राज, लोकतंत्र और न्याय प्रांत से गायब हो गए हैं.’ 

सरकार के दबाने के आरोप

चांदियों ने अधिकारियों पर प्रांत के अधिकारों की वकालत करने वाले सिंधी एक्टिविस्ट को सिस्टमैटिक तरीके से टारगेट करने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध की आवाजों को डरा-धमकाकर और जबरन गायब करके दबाया जा रहा है. उन्होंने आगे दावा किया कि जहां शांति से काम करने वाले पॉलिटिकल एक्टिविस्ट को सताया जा रहा है, वहीं ‘क्रिमिनल, करप्‍ट पॉलिटिशियन, नदी किनारे के डकैत, ड्रग ट्रैफिकर और गैर-कानूनी इमिग्रेंट’ सरकार के संरक्षण में बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहे हैं. 

क्‍या ह‍ुआ था 28 अक्‍टूबर को 

पिछले दिनों बलूचिस्तान पोस्ट ने एक चश्मदीद के हवाले से बताया था कि गनी अमन चंदियो को 28 अक्टूबर को तारिक रोड के पास शाहराह-ए-कायदीन के मेमोना हॉस्पिटल से किडनैप किया गया था, जहां वह अपनी छोटी बेटी को इलाज के लिए लेकर आए थे. चश्मदीदों ने न्यूज पोर्टल को बताया कि आम कपड़ों में हथियारबंद लोगों के एक ग्रुप, जिनके साथ पैरामिलिट्री रेंजर्स के जवान भी थे, हॉस्पिटल में घुसे, मोबाइल फोन छीन लिए, CCTV फुटेज तोड़ दिए, और चांदियों की आंखों पर पट्टी बांधकर उसे उसके परिवार के सामने ले गए. इस घटना पर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, ’28 अक्टूबर को कराची के मेमोना हॉस्पिटल से स्टूडेंट एक्टिविस्ट गनी अमन चंदियो का किडनैप होना वह भी सरकारी सेना की तरफ से द्वारा, बहुत परेशान करने वाला है.’ 

अब पाकिस्‍तान से आजादी की लड़ाई लड़ेंगे पश्‍तून, बलोच-सिंधी और कश्‍मीरी…  

पश्‍तून, बलूच, सिंधी और कश्‍मीरी समुदाय के लोगों ने अब पाकिस्‍तान से आजादी की जंग छेड़ दी है. अफगान यूनाइटेड फ्रंट की तरफ से आयोजित एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान पश्तून, बलूच, सिंधी और कश्मीरी समुदायों के प्रमुख राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों की आजादी और पाकिस्तान के नियंत्रण से मुक्ति की लड़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. इस मीटिंग की जानकारी पीओजेके (पाक-अधिकृत जम्मू-कश्मीर) के कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर साझा किया. 

मदरसे बने ब्रेनवॉश का जरिया 

इन सभी समुदायों के प्रतिनिधियों ने पाकिस्‍तानी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उसने शिक्षा, मीडिया और धार्मिक मदरसों को वैचारिक ब्रेनवॉश के साधन के तौर पर इस्तेमाल किया है. उन्‍होंने बताया कि जनरल जियाउल हक के शासनकाल (1977-1988) के दौरान खैबर पख्‍तूनख्‍वा में मदरसों की संख्‍या मात्र 89 से बढ़कर करीब 10,000 पंजीकृत संस्‍थानों तक पहुंच गई थी.

प्रतिनिधियों के अनुसार, जियाउल हक ने घोषणा की थी कि ये मदरसे ‘इस्लाम के किले’ बनेंगे, जिनका मकसद न सिर्फ अफगानिस्तान में कठोर इस्लामी ढांचे को थोपना था बल्कि पाकिस्तान के अंदर पश्तून राष्‍ट्रवाद को कमजोर करना भी था. पश्तून प्रतिनिधियों का कहना था कि खैबर पख्तूनख्वा का गठन और अलग ‘पश्तूनिस्तान’ की अवधारणा जानबूझकर बनाई गई रणनीतियां थीं ताकि पश्तून पहचान, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तौर पर अफगानिस्तान से जुड़ी है, को भ्रमित और विभाजित किया जा सके. 

सिंधियों को किया नजरअंदाज 

पूरी बातचीत के दौरान प्रति‍निधियों ने पाकिस्तान में होने वाली आतंकी घटनाओं पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों ऐसे हमलों से हमेशा पंजाब प्रांत अछूता रहता है, जबकि कट्टरपंथी संगठनों का नेतृत्व और उनके संचालन केंद्र वहीं स्थित हैं.  सिंधी प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि उनका प्रांत पाकिस्तान की सेना के प्रभुत्व में जकड़ा हुआ है. उन्होंने बताया कि आज तक किसी भी सिंधी व्यक्ति को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, कोर कमांडर या किसी उच्च सैन्य पद पर नियुक्त नहीं किया गया है.

Exit mobile version