अग्नि आलोक

मुंबई में बस्ती बस्ती पहुंची अस्थी कलश यात्रा और किसान आंदोलन

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महाराष्ट्र राज्य के अलग-अलग जिलों में, गांवों और बस्तियों में लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों के अस्थी कलश यात्रा 27 सितंबर से फुले वाडा (पुणे ) और हमाल भवन में हुए सम्मेलन के बाद शुरू हुई है । मुंबई में 28 तारीख को पहला कार्यक्रम माहुल में चेंबूर के पास होने के बाद, दूसरा कार्यक्रम हुआ सिद्धार्थनगर की बस्ती में वरसोवा अंधेरी में । सिद्धार्थनगर में अपने घर के लिए बरसों से लड़ने वाले साथी जयमती ,भाई नेहा बहन और अन्य …रास्ते पर उतर कर शहीदों को नमन करने के लिए सैकड़ों की तादात में आगे आए।
हमारी बहनों ने किसान मजदूर एकता जताते हुए, अपनी भावना व्यक्त की । जयमती भाई बोले कि, हमारे संघर्ष को हम लोग किसानों के सम्मान के साथ जोड़ना चाहते हैं । गोलीबार से खार में चल रहे संघर्ष से पधारे कृष्णा नायरजी ने किसानों को कम से कम उपज का दाम मिल कर कैसे नरक यातना और आत्महत्या भुगतनी पड़ती है, इसका वर्णन किया और कहा कि आज देश को बचाने के लिए किसान आंदोलन ही एक आशा स्थान है । हर प्रकार की हिंसा का विरोध करते हुए मेधाताईने किसान आंदोलन के पूरे इतिहास को संक्षिप्त में रखा और तीनों कानूनों के कारण किसानों की खेती पर तो आक्रमण होगा ही, लेकिन गरीबों की सस्ते अनाज की राशन व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी, इस बात के स्पष्टता की। उन्होंने कहा कि अब हिंसा का आधार ले रही है केंद्र की, यूपी की और हरियाणा की सरकार… क्योंकि उन्हें पता चला है देश
की जनता अब जागृत हो चुकी है और आने वाले चुनाव में उनके लिए किसान और मजदूर विरोधी कानून निश्चित ही खतरा साबित होंगे ।


सिद्धार्थ नगर में पहुंचे थे विभिन्न बस्तियों के लोग और प्रतिनिधि जिनमें समर्थक जय किशन भाई भी थे और पूजा पंडित ने शहीदों को नमन करते हुए, आजादी के जंग को याद करते हुए,के द्वारा प्रेरणा को आगे बढ़ाया । पूनम कनौजिया ने कार्यक्रम का सूत्र संचालन किया, कहां की ,घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन किसान मजदूर एकता के साथ दिल्ली तक पहुंच चुका है। लेकिन आज के आगे 28 नवंबर के रोज 1 साल पूर्ति के समय हम सब आजाद मैदान पर हजारों की तादाद में उपस्थित रहेंगे । सभी सभी मजदूर महिला और पुरुषों में जो उनके मूल गांव में आज भी छोटे या सीमांत किसान है उन्होंने मोमबत्ती ही नहीं तो मशाल भी जलाई और अपना संकल्प व्यक्त किया ।

सिद्धार्थनगर के बाद कलश यात्रा अप्पा पाड़ा मलाड में पहुंची।
यह कार्यक्रम में रात 8:30 से 10:30 बजे तक चला। कई सारे अतिथि इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए । सलीम भाटीजी, जो मुस्लिम समाज के संगठन के साथ साथ समाजवादी विचारधारा के, जनता दल सेक्युलर के अहम प्रतिनिधि रहे हैं। भाटीजी ने हिंसा और हत्या जो जाति और मजहब के नाम बढ़ती जा रही है उसका निषेध किया और लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद जो महिलाओं को टिकरी बॉर्डर से बहादुरगढ़ के द्वारा पंजाब लौटते हुए ट्रक से उड़ाया , तथा त्रिपुरा में विश्व हिंदू परिषद की रैली में मुस्लिम बंधु और मस्जिद पर हत्या का भी जिक्र किया । मालाड के अप्पापड़ा क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. चौहानजी ने भी किसानों और मजदूरों की एकता का महत्व बताते देश को बचाने का ऐलान किया। किसान आंदोलन एक प्रकार से आजादी की जंग हैं और हमें उस आंदोलन में सहभागी होते आए हैं उससे भी आगे बढ़कर अब हिंसा को रोकने का संकल्प लेना जरूरी है ।


मेधा पाटकरजी ने लखीमपुर खीरी के हिंसा की कारण मीमांसा करते हुए कहा कि, 26 नवंबर से पिछले साल भर में कई प्रकार से केंद्र और यूपी की सरकारने हिंसा की है । लेकिन अब अमानवीय था दर्शाने वाली बर्बरता से भरी हिंसा खुले आम हो रही है । ऐसे राजनेता इस देश की संपत्ति भी बेच रहे हैं, जो गरीबोंको भूखे मारनेकी साजिश दिख रही है। हिंसा के बावजूद डटे हुये किसान 631 आंदोलन में शहीद हो चुके है उन्हें भी श्रद्धांजलि नही तो कार्यांजलि अर्पित करने का संकल्प किया गया । माहुल में प्रकल्पग्रस्तोंके पुनर्वसित होने से जिन्होंने मौत भुगती है , उन्हें भी एक प्रकार से विकास के नाम पर हो रहे हिंसा के मुफ्तभोगी ही मानना चाहिए । हम लोग ना ही जात और मजहब के नाम पर, ना ही विकास के नाम पर हिंसा का समर्थन नहीं कर सकते । कई अपराधों के लिए दी जाने वाली फांसी के सजा के भी हम विरुद्ध है । मोदी विरुद्ध गांधी की लड़ाई में हम सब गांधी जी के मार्ग पर ही चल रहे हैं और चलते रहेंगे ऐसा मेधा पाटकरजी ने कहा । त्रिपुरा में हो रही मुस्लिमों की हत्या और मस्जिदों पर हुए हम लोग का निषेध उन्होंने व्यक्त किया और मजहब के नाम पर गुंडागर्दी नहीं चलेगी….नहीं चलेगी… इस नारे के साथ उस हिंसा का धिक्कार किया।
शहीदों की अस्थीस को फूल अर्पित कर सैकड़ों मोमबत्तियां और मशाले जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की ।

29 नवंबर को यह यात्रा मालवणी के अंबोजवाडी में पहुंची ।
करीबन 12000 परिवारोंकी यह बस्ती जो 2005 के बाद उजाड़ी गई थी । उसे बसाने का कार्य घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन ने अन्य साथियों के साथ किया। इसमें महिलाए, पुरुष और युवाओंका बड़ा सहभाग रहा। अंबुजवाड़ी में दया शंकर भाई ,रहमत भाई और सभी साथियों ने अपना गुप्ता जी के साथ साथ शहीदों को श्रद्धांजलि का कलश यात्रा का कार्यक्रम चलाया। इसमें सैकड़ों भाई-बहन हिंदू – मुस्लिम समाज के शरीक हुए। श्रमिक जनता संघ के महासचिव जगदीश खैरलियाजी ने श्रमिकोंको न्याय देनेवाले 29 कानून को बदलने की मोदी शासन की साजिश का धिक्कार किया । साथ ही वकील शेख सहिद और नंदू शिंदे भी इस अस्थी कलश यात्रा में शामिल हुए । हर किसी ने किसान आंदोलन को एक चिवटता से भरा और पथ निर्देशक आंदोलन माना। किसानों के शहादत से हमारे समता और न्याय के लिए चलने वाले आंदोलन को प्रेरणा मिली है और मिलती रहेगी , यह बात भी सबके सामने रखी । विभिन्न गीतो द्वारा बहुत ही भावुक माहौल पूनम कनौजिया, निर्मला गुप्ता और अन्य साथियों ने यहां निर्माण किया। मेधा पाटकर जी ने जगदीश खैरालियाजी के साथ श्रमिक जनता संघ और घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन की तरफ से किसानों पर हो रहा हमला मजदूरों के जीवन पर की हमला हो रहा है और होगा। इस बात को विश्लेषण के साथ लोगों को समझाया । लखीमपुर खीरी की हिंसा मुख्य कारण रहे केंद्र के गृहराज्यमंत्री अजय मिश्रा जी को मंत्री पद से हटाने की मांग जोर शोर से रखी गयी । साथ ही हिंसा का आधार किसी भी मौके पर लेना संयुक्त किसान मोर्चा को मंजूर नहीं है, यह बात भी सभी ने दोहराई । सिंघु बॉर्डर की हत्या हो या करनाल की हत्या हमें ना मंजूर है । यह कहते हुए अहिंसा के पथ पर चलने का संकल्प बस्तियों में अपने नारों से और गीतों से व्यक्त किया। मशाले और मोमबत्तियां जलाते हुए जलाकर कलश अस्थि कलश यात्रा किसान मजदूर एकता 28 नवंबर को मुंबई में जरूर दिखाएंगे… यह निर्णय जाहिर किया गया । गरीबों की राशन व्यवस्था यानी अन्न सुरक्षा पर हो रहा आक्रमण हम लोग नहीं सहन करेंगे , इसलिए किसान आंदोलन के हिस्सा रहे घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन और जन आंदोलनोंका राष्ट्रीय समन्वय के साथीयोंने मुट्ठी बांधकर संकल्प लेते हुए श्रद्धांजली अर्पित की ।

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