भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को क्षत्रिय करणी सेना का माहौल अचानक गर्म हो गया. भोपाल के खुशीलाल ग्राउंड में चल रहे क्रांति सम्मेलन के बाद क्षत्रिय करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने सीएम-हाउस की ओर कूच कर दिया. क्षत्रिय करणी सेना ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों पर तुरंत निर्णय की मांग कर डाली. उन्हाेंने बताया कि दोपहर 2 बजे तक अधिकारियों के न पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने मार्च शुरू कर दिया. पुलिस को बैरिकेडिंग लगाकर उनके रास्ते को रोकना पड़ा. रास्ता रोके जाने पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए.
इसी दौरान करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष इंदल सिंह राणा ने कहा कि यह आंदोलन की शुरुआत है. राणा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो भोपाल को नेपाल बनाने में देर नहीं लगेगी. यह चेतावनी हरदा प्रकरण में हुए विरोध, कथित लाठीचार्ज और गिरफ्तारी को लेकर दी गई. राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत भी सम्मेलन में मौजूद रहे. उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग दोहराई. शेखावत ने कहा कि भाजपा सरकार होने के बावजूद यह निर्णय लंबित है.
सभी मांगों पर 25 नवंबर तक समाधान का आश्वासन
उन्होंने कहा कि समाज इसे अपमान के रूप में देखता है. शेखावत ने कहा कि अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो करणी सेना नई रणनीति के साथ फिर आंदोलन करेगी. इसके बाद संगठन का 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सीएम-हाउस पहुंचा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजधानी से बाहर थे. प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की. अधिकारियों ने हरदा प्रकरण सहित सभी मांगों पर 25 नवंबर तक समाधान का आश्वासन दिया. इसके बाद संगठन ने फिलहाल आंदोलन रोकने का निर्णय लिया. लेकिन पदाधिकारियों ने साफ कहा कि यह केवल शुरुआत है.
प्रदेशभर से हजारों लोग पहुंचे, 25 नवंबर की समयसीमा
संगठन की 10 प्रमुख मांगों में हरदा मामले में कार्रवाई, EWS आरक्षण बढ़ाना, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा, अग्निवीर योजना समाप्त करना और एमएसपी की कानूनी गारंटी शामिल है. साथ ही समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने, एट्रोसिटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने और मंदिरों की जमीन दर्ज कराने की मांगें भी शामिल हैं. कार्यक्रम में प्रदेशभर से हजारों लोग पहुंचे. ग्राउंड में समाज के लोग एकजुट नजर आए. मंच से बार-बार संदेश दिया गया कि समाज अब ठोस निर्णय चाहता है. पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने आश्वासन को पूरा नहीं किया तो आंदोलन और बड़ा रूप लेगा. संगठन ने साफ कहा कि 25 नवंबर की समयसीमा अब अंतिम है. इसके बाद करणी सेना पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज कर देगी. फिलहाल आंदोलन स्थगित हुआ है. लेकिन असल परीक्षा सरकार की कार्रवाई से तय होगी.

