मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित सेंचुरी श्रमिकों का संघर्ष 1377 दिनों से जारी होते हुए बगल में मराल ओवरसीज टेक्सटाइल्स कंपनी में श्रमिकों के साथ कई प्रकार से अन्याय और अत्याचार जारी है । भिलवाडा समूह की यह कंपनी 30 वर्षों से कार्य कर रही है। उनमें से श्रमिक जब कई प्रकार के अन्याय भूगतने लगे, तभी हमारे पास आकर हमारा सहयोग मांगने लगे। उनकी पूरी हकीकत सुनकर जब हमने उन्हें हमारे श्रमिक जनता संघ के तहत सहयोग देने का आश्वासन दिया, तब मराल के 73% श्रमिकों ने हमारी सदस्यता स्वीकार की और आज तक उन्होंने कानूनी न्याय मांगना जारी रखा है।
मराल ओवरसीज ने एक हजार श्रमिको को जो गारमेंट विभाग में कार्यरत धे,उन्हें सन 2007 में अचानक कंपनी से निकाल दिया। बचे हुए श्रमिकों से भरपूर काम करवाते हुए 8-10 सालों से कार्यरत होने वालों को कायमी करना तो दूर, बल्कि कभी भी किसी भी श्रमिक को गेट के बाहर खड़ा कर देते हैं। *अंदर कार्य करते हुए कुछ श्रमिकों को ओवरटाइम का वेतन भी दोगुना नहीं देते। मात्र नॉर्मल वेतन देते हैं।
* मराल मैनेजमेंट के गुंडों द्वारा कारखाने के अंदर महिला श्रमिकों के साथ छेड़छाड़ आम बात हो गई है। *महिला श्रमिकों के होते हुए मराल डिस्पेंसरी में महिला डॉक्टर की व्यवस्था नहीं है।
आज भी श्रमिकों ने जो स्कूल की मार्कशीट ना देते हुए भी कंपनी ने स्वयं गलत-सलत मार्कशीट बनाकर रखी और अब उसका दोष लगाकर श्रमिकों को बाहर करने की, गॄह जांच की साजिश शुरू की है। करीबन 7-8 श्रमिकों को अन्याय पूर्ण तरीके से घर बिठाने का काम कंपनी ने किया है।
इस परिस्थिति में कामगार एकता यूनियन जो मराल में बनी रही, उससे कोई भी सुलझाव नहीं लाया जा रहा था। यह यूनियन तो मैनेजमेंट के साथ जुड़ी रहती है, और वेतन से ही यूनियन फंड प्रत्येक श्रमिक से प्रतिमाह ₹70 काटने का काम भी मैनेजमेंट ही करती है। यह शिकायत भी श्रमिकों द्वारा होती रही। अब 73% श्रमिकों के ‘श्रमिक जनता संघ’ के सदस्य बनने के बाद कंपनी ने सेंचुरी और मराल के गिने-चुने श्रमिकों की बैठक पर पानवा गांव की मंदिर परिसर में श्रमिकों पर हमला किया उसमें शामिल खल बुजुर्ग गांव के सरपंच के पति दिलीप पटेल और अन्यो ने खुद को मराल के कारखाना प्रबंधक राजकुमार गीते द्वारा भेजे जाने की बात कही। सभी पर अपराधी प्रकरण दर्ज करने पर गीते जी को मालिकों ने पद से हटाया और मनोज ठक्कर नए प्रबंधक क्या नए मानव संसाधन विभाग के प्रमुख बन गए। इसके बाद भी ठक्कर जी स्वयं नए संगठन से श्रमिक ना जुड़े इसलिए जल्दबाजी में 30% से कम सदस्यता रखने वाले, सदस्यता की पर्ची ना फाड़ने वाले श्रमिक संगठन के ही साथ एक अनुबंध किया और 5 वर्षों के लिए करीबन ₹3000 वेतन बढ़ाया, लेकिन बहुसंख्य श्रमिकों का संगठन होते हुए, ना ही अनुबंध की प्रति हमें दी है, ना ही हमारे साथ अधिकृत मीटिंग के लिए स्थान, समय तय कर रहे हैं। ऐसा क्यों? मराल मैनेजमेंट सच का सामना करने से क्यों डर रही है?
प्रत्येक कार्यरत श्रमिकों को अधिकारी घंटों तक डांट सुनाते व दबाव डालते हुए, श्रमिक जनता संघ से दूर रहने को कह रहे हैं। मराल मैनेजमेंट के गुंडों द्वारा श्रमिको को श्रमिक जनता संघ से दूर, रहने के लिए दबाव बनाया जाता है। मारपीट की धमकियां स्वयं ठेकेदार के द्वारा देना, कहीं 8-10 श्रमिक भी एकत्रित हुए तो उन पर हमला करना या करवाना आज भी जारी है। अभी-अभी आदिवासी श्रमिक के साथ हुई मारपीट व अत्याचार हुआ है। इस परिस्थिति में मध्य प्रदेश शासन के श्रम पदाधिकारियों को व श्रम आयुक्त को चाहिए कि वे मराल ओवरसीज के पदाधिकारियों को समझाइश और निर्देश दें कि वे कानूनी और अहिंसक तरीके से संवाद के द्वारा कंपनी ठीक से चलाएं और मजदूरों के साथ भी हक मानकर ही पेश आए।
संजय चौहान मेधा पाटकर

