सच सामने लाने राज्यसभा की आंशिक नहीं पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाएं
राज्यसभा अध्यक्षीय आसंदी का दुरुपयोग रोका जाए
जहां एक एक वोट का हिसाब और मत विभाजन की मांग है वहां ध्वनि मत विभाजन क्यों ?
रीवा . समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि गत बुधवार 11 अगस्त के दिन राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ वह लोकतंत्र को कलंकित करने वाला अत्यंत शर्मनाक प्रदर्शन है . उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है . सरकार बिना बहस के संविधान संशोधन पर आमादा है , ऐसे में लोकतंत्र कैसे चलेगा .
श्री खरे ने कहा कि सदन में जो कुछ भी चर्चा होती है , उसे देश की जनता संज्ञान में लेती है . लोकतंत्र में किसी भी विषय पर चर्चा बेहद जरूरी है . श्री खरे ने बताया कि मोदी सरकार नहीं चाहती कि देश की जनता को पता चले कि देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं को बेचा जा रहा है .
पिछले 7 सालों से संवैधानिक संस्थाओं को निरंतर कमजोर किया जा रहा है . मोदी सरकार के द्वारा पूंजी पतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है . अब ऐसा लगता है कि देश जनप्रतिनिधि नहीं पूंजीपति चला रहे हैं . यह भारी विडंबना है कि जो लोग देश बचाने की बात कर रहे हैं उन्हें देशद्रोही बताया जा रहा है . पिछले कुछ सालों से बिना बहुमत के ही राज्यसभा में जिस मनमाने तरीके से प्रस्ताव पारित किए जाने लगे उसका विरोध स्वाभाविक है . विपक्षी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन उनकी बात न सुनकर बिना मत विभाजन के मनमाने तरीके से संविधान संशोधन करना लोकतंत्र की हत्या है . ऐसे मौके पर सदन के अंदर बड़ी संख्या में मार्शल बुलवाकर विपक्षी दलों के सदस्यों पर हमला करवाना सरकारी आतंकवाद है . सदन के अंदर मार्शल का काम व्यवस्था बनाना है न कि सांसदों की पिटाई करना . श्री खरे ने कहा कि सच को सामने लाने के लिए घटना के दिन की राज्यसभा की कार्यवाही का आंशिक नहीं पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई जानी चाहिए .
समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने अध्यक्षीय आसंदी के दुरुपयोग पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है . उन्होंने कहा कि यदि देश के संवैधानिक पदों पर बैठे लोग ही निष्पक्ष नहीं रहेंगे तो देश का लोकतंत्र कैसे चलेगा . श्री खरे ने कहा कि यदि सत्ता पक्ष में जरा भी सच्चाई है तो राज्यसभा में उन प्रस्तावों को नए सिरे से रखकर पारित करवा लें . श्री खरे ने कहा कि सत्ता पक्ष हर कानून पारित कराने के लिए सदन के अंदर देशभक्ति का स्वांग न रचा करें . सत्ता पक्ष के बैठे हुए लोगों की तुलना में विपक्ष के लोगों को देश की अधिक चिंता है तभी वह विषम परिस्थितियों में मार खाते हुए भी लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहे हैं .

