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*’मुख्य न्यायाधीश पर हमले की कोशिश न्यायपालिका एवं दलित अस्मिता पर हमला’ — सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)*

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सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) देश के मुख्य न्यायाधीश पर हुए हमले की कोशिश की कड़ी निंदा करती है। यह केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। जिस प्रकार यह घटना न्याय व्यवस्था को भयभीत करने का प्रयास है, उसी प्रकार यह दलित समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक अस्मिता पर भी प्रहार है। इस घटना ने देश में दलितों की दयनीय स्थिति और सुरक्षा के सवाल को फिर से उजागर कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश, जो दलित समुदाय से आते हैं, देश में न्याय और समानता के प्रतीक बनकर उभरे हैं। धर्म की आड़ लेकर की गई उनके ऊपर हमले की कोशिश यह दर्शाती है कि समाज में अब भी वे शक्तियाँ सक्रिय हैं जो दलितों की उन्नति, आत्मसम्मान और संवैधानिक अधिकारों से भयभीत हैं। यह मानसिकता न केवल घृणित है बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय के आदर्शों के विरुद्ध है।

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मानती है कि यह घटना देश में बढ़ती असहिष्णुता और सामाजिक असमानता की चेतावनी है। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले के दोषियों को यथाशीघ्र कठोर दंड दे तथा यह सुनिश्चित करे कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और देश में दलितों की गरिमा दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहें। यह भी एक जाँच का विषय है कि इस तरह के आपराधिक तत्वों को कहाँ से शह मिल रही है।

पार्टी सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील नागरिकों से अपील करती है कि वे इस हमले की निंदा करें और संविधान, न्याय और सामाजिक समानता की रक्षा के लिए एकजुट हों।

बसंत हेतमसरिया 

राष्ट्रीय प्रवक्ता 

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

मो. 9934443337

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