इंदौर
आयुष्मान योजना के तहत शहर के 78 अस्पतालों में भले ही एक हजार से ज्यादा बेड आरक्षित किए गए हों, लेकिन ज्यादातर अस्पताल मरीजों को भर्ती को तैयार नहीं हैं। भास्कर ने प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची में से 13 अस्पतालों में फोन लगाए तो 11 ने मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया।
एक ने कहा-अटेंडर को अस्पताल भेजिए, जब वहां अटेंडर बनकर पहुंचे तो फाइल लाने के बहाने टाल दिया। हालांकि छह अस्पतालों ने बेड खाली नहीं होने की बात कही। हद यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को नहीं पता कि योजना के तहत शहर में कितने लोगों का इलाज चल रहा है। योजना के तहत आयुष्मान कार्डधारी लोगों का पांच लाख रुपए तक का कोविड उपचार सरकार कराएगी, लेकिन तब जब अस्पताल योजना में किसी को भर्ती करेंगे।
सरकार का दावा
1013 बेड रिजर्व, इनमें 459 आईसीयू/एचडीयू
योजना की घोषणा के समय यह दावा किया गया था कि इंदौर जिले में लगभग 9 लाख 50 हजार आयुष्मान कार्डधारी हैं। जिन्हें कोरोना के निःशुल्क इलाज की पात्रता है। जिले के 74 अस्पताल, जो मेडिसिन विशेषज्ञता रखते हैं, को तीन माह के लिए अस्थायी संबद्धता दी गई है।
योजना के तहत 1013 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें 459 आईसीयू/एचडीयू बेड हैं। ऑक्सीजन बेड 326 और आइसोलेशन बेड 228 हैं।
सीधी बात- सीएमएचओ बी.एस. सेत्या से
सूची में शामिल अस्पताल कार्ड धारक काे इलाज से मना नहीं कर सकते
- सूची में शामिल हॉस्पिटल भर्ती करने से मना कर रहे हैं?
– शिकायत मिली तो कार्रवाई करेंगे। अपने स्तर पर भी चेक कराएंगे।
- अभी कितने मरीज भर्ती हैं?
– अभी इसकी जानकारी नहीं है।
- योजना में भी रेमडेसिविर व अन्य दवा बाहर से लाना पड़ रही है?
– हां रेमडेसिविर सहित कुछ इंजेक्शन इसमें शामिल नहीं है।
- फिर वे मरीज कहां जाएंगे?
– विभाग से बात करके ही कुछ बता पाऊंगा।
इनकार करने वालों पर करेंगे कार्रवाई
आयुष्मान भारत योजना में अस्पतालों की सूची तय है। बेड न होना वजह हो सकती है, दूसरे कारणों से मना करने वालों पर कार्रवाई करेंगे। – तुलसी सिलावट, प्रभारी मंत्री

