कोरोना महामारी का दौर केवल हमारे चिकित्सय स्वास्थ्य के लिए ही नहीं वरन देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए भी परीक्षा की घड़ी थी और स्यास्थ्य कर्मियों के सामान ही बैंककर्मियों ने भी इस ऑपातकाल में कोरोना योद्धाओं की भूमिका का निर्वाह कर देश के आर्थिक तंत्र को सम्हालने हेतु आम जनता , लघु एवं मध्यम व्यापारियों एवं उद्यमियों हेतु सरकार द्वारा घोषित राहत उपायों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये विचार प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, शाशकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय उज्जैन में प्राध्यापक नीता तपन ने ऑल इंडिया इलाहाबाद बैंक (अब इंडियन बैंक) ऑफिसर्स फेडरेशन के सातवें राज्य अधिवेशन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किये।डॉ नीता ने कहा कि कोवीड महामारी ने पूरी दुनिया में और भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और कर्मचारियों के महत्त्व, उनके समर्पण भाव एवं समाज और देश के प्रति उनके निष्ठां भाव एवं कर्तव्य बोध को साबित किया है और सरकारों द्वारा निजी करण, निगमीकरण की अंधी दौड़ में इस बात को नहीं भुलाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे पाठ्यक्रमों में हम अर्थशास्त्र पढ़ाते हुए मिश्रित अर्थव्यवस्था और उसमें मौद्रिक नीतियों के क्रियान्वयन में बैंकों की भूमिका, जन कल्याणकारी बैंकिंग, ग्रामीण बैंकिंग, वित्तीय समावेशन तो पढ़ाते हैं मगर बड़े निगमित ऋणों में डूबत ऋण, उसके कारण , उनको छुपाने के प्रयास , बैंकों की लाभ प्रदता पर उनके प्रभाव और जनता से जुडी योजनाओं में निजी बैंकों की अरुचिपूर्ण भूमिका आदि विषय पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों को सशक्त किया जाए। सरकार को भी इनके नियामक और नियंत्रक की अपेक्षा एक फिक्रमंद निवेशक की भूमिका निभानी चाहिए न कि विनिवेश की और कदम बढ़ाना चाहिए । सभी कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सार्वजनिक बैंक घाटे का शिकार होते हैं और फिर विलयन की प्रक्रिया के ।आज भी आम आदमी का विश्वास सरकारी बैंकों पर ही है।
अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए मध्य प्रदेश बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के महासचिव आलोक खरे ने कहा कि बैंकों के निजी करण से देश की आर्थिक व्यवस्था को खतरा है ।बैंकों की स्वायत्तता से छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए।उनने कहा की अमेरिका, कनाडा , इंग्लैंड और यूरोप के देशों में जहाँ लॉकडाउन काल में सरकारों ने कर्मचारियों और नियोजकों को यथोचित सहायता उपलब्ध कराई ताकि छंटनी और बेरोजगारी न हो वहीँ भारत में उन्हें केवल बैंकों से और कर्ज लेने के लिए कहा गया। सरकार ने अपना पल्ला पूरी तरह झाड़ लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अरविंद पोरवाल ने इस विपत्तिकाल में कर्मचारियों, मज़दूरों , किसानों के प्रति सरकार के असंवेदनशील रवैये का जिक्र करते हुए कहा कि यही वजह है कि देश के तमाम श्रम संगठनों ने मिलकर 26 नवम्बर को देशव्यापी हड़ताल की थी। 8 दिसंबर को किसानों द्वारा भारत बंद का आवाहन किया गया था। मज़दूर , किसान अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर लगातार संघर्षरत हैं और एकजुट संघर्ष ही सही रास्ता है।इंदौर प्रेस क्लब के राजेंद्र माथुर सभागृह में आयोजित अधिवेशन में इलाहाबाद बैंक एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष राजीव उपाध्याय सहित मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से आये प्रतिनिधियों ने हिस्से लिया। अतिथि स्वागत रिसेप्शन कमेटी के चेयरमैन श्री सुनील चंद्रन ने किया । इप्टा की कलाकार श्रीमती शर्मिष्ठा बनर्जी द्वारा जनगीत प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर संगठन द्वारा स्मारिका का विमोचन भी किया गया जिसका संपादन प्रगतिशील लेखक व कवि श्री सुरेश उपाध्याय एवं अरविन्द पोरवाल ने किया है। अगले कार्यकाल के लिए गठित संगठन की कार्यकारिणी में सर्वानुमति से अरविन्द पोरवाल चेयरमैन; अभय कुमार आस्थाना , अध्यक्ष ; राजेंद्र कुमार नागर , सचिव एवं सतीश जाधव कोषाध्यक्ष चुने गए। कार्यक्रम का संचालन सचिव राजेंद्र कुमार नागर ने किया व आभार उपमहासचिव अभय कुमार अस्थाना ने माना।
बैंक अधिकारीयों ने निभाई है कोरोना वारियर्स की भूमिका

