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बेंगलुरु, भुवनेश्वर-पूरी-कटक ट्राई-सिटी, कोयंबटूर-इरोड-तिरुप्पुर क्लस्टर, पुणे, सूरत, वाराणसी और विशाखापत्तनम चमकेंगे

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 बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शहरी भारत की तस्वीर बदलने के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (CERs) विकसित करने की महत्वाकांक्षी घोषणा है. इस पहल का उद्देश्य शहरों को विकास के शक्तिशाली केंद्रों में बदलना है. सरकार का मानना है कि भारत की आर्थिक उन्नति का रास्ता शहरों के आधुनिकीकरण और उनके भीतर छिपी संभावनाओं से ही होकर गुजरता है.

बजट में शुरुआती चरण के लिए 7 प्रमुख सिटी इकोनॉमिक रीजन की पहचान की गई है जो देश के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इनमें बेंगलुरु, भुवनेश्वर-पूरी-कटक ट्राई-सिटी, कोयंबटूर-इरोड-तिरुप्पुर क्लस्टर, पुणे, सूरत, वाराणसी और विशाखापत्तनम शामिल हैं. इन क्षेत्रों का चयन उनकी मौजूदा औद्योगिक क्षमता और भविष्य में बड़े वैश्विक व्यापार केंद्र बनने की योग्यता को ध्यान में रखकर किया गया है.

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि अब भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ प्रसिद्ध ‘मंदिर नगरों’ (Temple Towns) पर विशेष ध्यान देने का समय आ गया है. वाराणसी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों को अब सिर्फ आस्था के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस आर्थिक जोन के रूप में विकसित किया जाएगा. इन शहरों में जल आपूर्ति, स्वच्छता और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है.

सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) की अवधारणा के पीछे मुख्य विचार शहरों की “एग्लोमरेशन इकोनॉमी” यानी समूहित आर्थिक शक्ति को बढ़ावा देना है. इसका अर्थ है कि एक प्रमुख शहर और उसके आसपास के औद्योगिक या पर्यटन क्षेत्रों को जोड़कर एक बड़ा आर्थिक क्लस्टर तैयार किया जाएगा. जब एक क्षेत्र के सभी संसाधन एक साथ मिलकर काम करेंगे, तो वह इनोवेशन, रोजगार सृजन और निवेश के लिए एक विशाल और आकर्षक बाजार बनकर उभरेगा.

इस योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रत्येक CER के लिए अगले 5 वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित किया है. यह फंड उन शहरों को मिलेगा जो अपनी विशिष्ट आर्थिक मजबूती, जैसे आईटी, टेक्सटाइल या पर्यटन के आधार पर बेहतर विकास रोडमैप पेश करेंगे. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इन योजनाओं के प्रारंभिक क्रियान्वयन हेतु सरकार ने बजट में 2,000.01 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि भी आवंटित कर दी है

परियोजनाओं को लागू करने के लिए सरकार ने ‘चैलेंज मोड’ और ‘रिफॉर्म-कम-रिजल्ट्स’ आधारित फाइनेंसिंग मैकेनिज्म का चयन किया है. इसका मतलब है कि केवल उन्हीं शहरों को वित्तीय सहायता मिलेगी जो शहरी प्रशासन में सुधार करेंगे और समयबद्ध तरीके से परिणाम लाकर दिखाएंगे. यह प्रतिस्पर्धात्मक मॉडल राज्यों और शहरी निकायों को अपनी कार्यक्षमता सुधारने और परियोजनाओं को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा.

इस पूरी पहल में निजी क्षेत्र की भागीदारी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विशेष जोर दिया गया है. सरकार चाहती है कि निजी कंपनियां इन इकोनॉमिक रीजन्स के भीतर आधुनिक परिवहन, स्मार्ट हाउसिंग और व्यापारिक केंद्रों के विकास में निवेश करें. निजी क्षेत्र के आने से न केवल पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक भी इन उभरते हुए शहरों तक आसानी से पहुंच सकेगी.

विशेष रूप से मंदिर शहरों या ‘टेम्पल टाउन्स’ के इर्द-गिर्द CER विकसित करने की योजना पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगी. वाराणसी और पूरी जैसे शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और व्यापारियों को भी बड़ा मंच मिलेगा. पर्यटन पर आधारित यह विकास मॉडल स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा करेगा.

सिटी इकोनॉमिक रीजन की यह पहल भारतीय शहरीकरण के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है. यह टियर-2 और टियर-3 शहरों के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार करेगी और बड़े महानगरों पर आबादी के बोझ को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी. यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो भारत के ये शहर आने वाले दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए चमकते हुए सितारे बनकर उभरेंगे.

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