नई दिल्ली
भारत में 1970 से 2019 के बीच यानी पिछले 50 सालों के दौरान 117 चक्रवातीय तूफान आए हैं। इसमें करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। एक स्टडी में यह जानकारी सामने आई है। स्टडी के मुताबिक, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की वजह से पिछले 10 सालों में मृत्यु दर में कमी आई है।
स्टडी में बताया गया है कि इन 50 वर्षों में देश में मौसम से जुड़ी 7,063 भीषण घटनाएं घटीं। इसमें 1 लाख 41 हजार 308 लोगों की जान चली गई। इनमें से 40 हजार 358 लोगों (28%) ने चक्रवात की वजह से और 65,130 लोगों (46%) ने बाढ़ के कारण अपनी जान गंवाई।
ताउ ते ने ली 50 लोगों की जान, यास आया
मई महीने के मध्य में पश्चिमी तट ने चक्रवात ताउ ते का प्रकोप झेला। ताउ ते खतरनाक चक्रवाती तूफान के रूप में गुजरात तट से टकराया और उसने कई राज्यों में तबाही मचाई। इसमें करीब 50 लोगों की जान चली गई। इसके बाद पूर्वी तट पर ‘अति भयंकर’ चक्रवात तूफान ‘यास’ आया। वह ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में तबाही मचाकर झारखंड और बिहार तक पहुंचा।
1971 में ओडिशा में आए तूफान सबसे भयावह
स्टडी के मुताबिक सितंबर 1971 के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक बंगाल की खाड़ी में 6 सप्ताह के अंदर 4 ऊष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) तूफान आए। उनमें सबसे ज्यादा खतरनाक तूफान 30 अक्टूबर, 1971 की सुबह ओडिशा तट से टकराया और जान-माल का काफी नुकसान हुआ। इसमें करीब 10 हजार लोगों की जान गई और 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गये।
तूफान चिराला ने मचाई थी बड़ी तबाही
1977 में 9-20 नवंबर के बीच बंगाल की खाड़ी में 2 तूफान उठे। इनमें ‘चिराला’ खतरनाक तूफान था। वह आंध्रप्रदेश के तट से टकराया था। 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं और समुद्र में 5 मीटर ऊंची लहरें उठी थीं। 10 हजार लोगों की जान गई थी और करीब 2.5 करोड़ डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर और फसलों को नुकसान पहुंचा था।
1970-80 के बीच चक्रवाती तूफानों के कारण 20 हजार लोगों की मौत हुई। रिसर्च पेपर में कहा गया है कि तूफानों की वजह से मौतों में पहले दशक (2000-09) की तुलना में आखिरी दशक (2010-19) में करीब 88% की गिरावट आई।
मौसम पूर्वानुमान से दो दशक में कम हुई मौतें
रिसर्च पेपर इस साल के शुरुआत में पब्लिश हुआ, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस के सेक्रेटरी एम राजीवन और कमलजीत राय, एस एस राय, आर के गिरि, ए पी दिमरी जैसे साइंटिस्ट ने मिलकर तैयार किया है। कमलजीत राय इस रिसर्च के मुख्य राइटर हैं। स्टडी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में मौसम विज्ञान (IMD) के पूर्वानुमान में बड़ा सुधार देखा गया है। इससे चक्रवात के कारण होने वाली मौतों में काफी कमी आई है।

