मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह का भव्य समापन मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ का तीसरा और अंतिम दिन आज राजधानी भोपाल में सांस्कृतिक उल्लास और तकनीकी भव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। लाल परेड ग्राउंड में सोमवार शाम को सुप्रसिद्ध गायक स्नेहा शंकर अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगी।
ड्रोन शो: ‘विरासत से विकास’ की झलक
राज्य सरकार की पहल पर आयोजित होने वाला भव्य ड्रोन शो “अभ्युदय मध्यप्रदेश 2047” की थीम पर आधारित है। इस शो में 2000 ड्रोन समन्वित रूप से उड़ान भरकर मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत, संस्कृति और विकास यात्रा को जीवंत करेंगे। इसे कन्सेप्ट कम्युनिकेशन्स लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है और सेंट्रल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट अर्पित गोयल के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।
यह 15 मिनट का शो मध्यप्रदेश की उपलब्धियों और नवाचारों को 3D फॉर्मेशन के रूप में प्रदर्शित करेगा। शो के दौरान भारत का मानचित्र, मध्यप्रदेश के जिले, महाकाल मंदिर, सिंहस्थ-2028 का प्रतीक, उद्योग और इन्वेस्ट एमपी का लोगो, कृषि दृश्य, हाईवे, मेट्रो, और हवाई जहाज के प्रतीक दर्शाए जाएंगे। अंत में “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान” का दृश्य भी प्रस्तुत होगा।शाम 6:30 बजे से शुरू होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत एक महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य की भव्य प्रस्तुति से होगी। इसके बाद मंच पर बॉलीवुड की प्रसिद्ध गायिका स्नेहा शंकर अपने मधुर गानों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। उनकी प्रस्तुति में “चांद के टुकड़े”, “मेरा महबूब”, और “हकूना मटाटा” जैसे लोकप्रिय गाने शामिल होंगे।
स्नेहा शंकर की प्रस्तुतियों के दौरान लाल परेड ग्राउंड में संगीत, रोशनी और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा। यह राज्योत्सव स्नेहा की जादुई आवाज से गूंजेगा, जो सभी को झूमने पर मजबूर कर देगा।
महानाट्य: सम्राट विक्रमादित्य का गौरव
तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” होगा, जिसे उज्जैन की संस्था विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। इसका निर्देशन संजीव मालवीय कर रहे हैं, जिसमें 150 कलाकारों का दल और 50 तकनीकी सहयोगी शामिल होंगे। इस नाट्य में अश्व, रथ, पालकी, ऊंट और एलईडी ग्राफिक्स का प्रयोग कर इसे जीवंत बनाया गया है।
यह नाट्य सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर उनके वीरतापूर्ण अभियानों तक की कहानी को दर्शाएगा। यह उस काल की कहानी है जब विक्रमादित्य ने शकों और यवनों से भारत को मुक्त कराया और न्याय, कला, साहित्य तथा जनकल्याण की नींव रखी थी। यह प्रदर्शन दर्शकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से अवगत कराएगा।
प्रदर्शनी, लोकनृत्य और अंचलों के स्वाद का समागम
लाल परेड ग्राउंड में दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक प्रदर्शनियां, शिल्प मेला और व्यंजन मेला आम नागरिकों के लिए खुले रहेंगे। इन प्रदर्शनों में ‘विकसित मध्यप्रदेश 2047’, ‘विक्रमादित्य और अयोध्या’, ‘मध्यप्रदेश के मंदिर’ और ‘भारत विक्रम’ जैसे विषयों पर प्रदर्शित सामग्री शामिल होगी, जो प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करेगी।
‘एक जिला–एक उत्पाद’ योजना के तहत शिल्प मेला में चंदेरी साड़ी, बुरहानपुर के केले से बने उत्पाद, मुरैना की गजक और रायसेन का बासमती चावल जैसे उत्पाद प्रदर्शित होंगे। इसके अलावा, व्यंजन मेले में बुंदेली, बघेली, मालवा, निमाड़, चंबल और जनजातीय व्यंजनों का स्वाद प्रदेशवासी ले सकेंगे। दोपहर 3 बजे से जनजातीय एवं लोक नृत्य प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें करमा, परधौनी, भगोरिया, बधाई, गणगौर, और अहिराई जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल हैं।
समारोह का समापन और उत्सव का महत्व
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ का यह भव्य समापन न केवल प्रदेश की संस्कृति और धरोहर को प्रदर्शित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा। इस तरह के आयोजनों से न केवल प्रदेश की पहचान बढ़ती है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को भी प्रोत्साहन मिलता है। इस समारोह में भाग लेने वाले सभी दर्शकों का उत्साह और समर्पण यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि को बनाए रखने के लिए सभी तत्पर हैं।

