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*धर्मांतरण के खिलाफ एक्शन, आदिवासी संगठनों का बड़ी घोषणा…’अब खुद की जमीन पर करना होगा अंतिम संस्कार’*

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अलीराजपुर: धर्मांतरण के खिलाफ आदिवासी समाज ने बड़ी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य राज्य अलीराजपुर में आदिवासी समाज के लोगों ने घोषणा की है बहकावे और लालच में आकर धर्मांतरण करने वाले परिवार के किसी भी सदस्य का अंतिम संस्कार गांव के श्मसान घाट में नहीं होने दिया जाएगा। जिले में लगातार धर्मांतरण की आ रही खबरों के बीच समाज ने यह घोषणा की है।

समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से घोषणा करते हुए कहा है कि जिले में ईसाई मिशनरियों के बहकावे में आकर मतांतरण करने वालों का सामाजिक विरोध किया जाएगा। जनजातीय संगठनों ने मतांतरित आदिवासियों और उनके परिवार के लोगों की मौत के बाद गांव के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार नहीं करने देने की बात रही है।

खुद की जमीन पर करना होगा अंतिम संस्कार
दरअसल, जिले के वड़ी और डूंगरगांव में ऐसा ही मामला सामने आया था। यहां समाज के लोगों के सामूहिक विरोध पर मतांतरित आदिवासियों का अंतिम संस्कार करवाने से मना कर दिया था। जिसके बाद विवाद बढ़ गया था। इस मामले में पुलिस ने भी हस्ताक्षेप किया था लेकिन समाज के लोगों ने इसका विरोध किया था। बाद में धर्म परिवर्तन करन वाले परिवार के सदस्य का अंतिम संस्कार खुद की जमीन पर करना पड़ा था।

क्या कहा आदिवासी समाज ने
आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि ईसाई मिशनरी से जुड़े कुछ लोग भोले भाले आदिवासियों को लालच देकर उनका धर्मांतरण करवाते हैं। उन्हें इलाज के नाम पर अंधविश्वास के जाल में फंसाया जाता है और फिर उनका धर्मांतरण कराया जाता है। जनजाति विकास मंच के जिलाध्यक्ष राजेश डुडवे ने कहा मतांतरण के मामले सामने आने पर मतांतरित लोगों और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में बाबादेव संघर्ष समिति बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबादेव आदिवासी समाज के जंगल देवता हैं। हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि हम सब सनातनी हैं और हमारी पूजा और संस्कार पद्धति सनातन है।

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