फिलहाल पांच विधानसभा चुनावों में विपक्ष ने जिस तरह जातिगत जनगणना और ओबीसी की विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया है उससे तय है कि लोकसभा चुनावों में भी यह मुद्दा अहम होगा। यह मुद्दा कांग्रेस सहित कई अन्य दलों के घोषणा पत्र में भी शामिल हो सकता है। भाजपा ने इससे निपटने की रणनीति बना ली है। पार्टी अब ओबीसी वर्ग के लिए किए गए काम, सभी योजनाओं में ओबीसी को मिलने वाली हिस्सेदारी और केंद्र-राज्य व भाजपा संगठन में ओबीसी समुदाय के नेताओं को मिली हिस्सेदारी को जनता के बीच ले जाकर विपक्ष को जवाब देगी।
गुरुवार को भाजपा की दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष, यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रतापगढ़ से सांसद संगम लाल गुप्ता, बिहार के भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी सहित कई शीर्ष नेता शामिल हुए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में विपक्ष के जातिगत जनगणना और राहुल गांधी द्वारा बार-बार उठाए जा रहे ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी के मामले पर चर्चा हुई। सभी नेताओं से उनके संबंधित राज्यों में विपक्ष के इस कार्ड के संभावित असर के बारे में पूछा गया।
यूपी-बिहार में सबसे ज्यादा चिंता
भाजपा के एक शीर्ष नेता ने बताया कि विपक्ष के इस कार्ड का उत्तर प्रदेश और बिहार पर क्या असर पड़ सकता है, इसको लेकर सबसे ज्यादा चर्चा की गई। केवल इन्हीं दो राज्यों में लोकसभा की 120 सीटें आती हैं। भाजपा नेताओं का अनुमान है कि विपक्ष के इस कार्ड का सबसे ज्यादा असर इन्हीं दो राज्यों में पड़ सकता है। इसके पहले जब 1990 के दशक में भाजपा की राम रथ यात्रा अपने चरम पर थी, उस समय भी इन्हीं दो राज्यों में भाजपा को सबसे ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ा। विपक्ष की मंडलवादी नीति ने उसको एक सीमा के अन्दर समेट कर रख दिया। 2024 में एक बार फिर परिणाम उसी तरह का न हो, इसे लेकर भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व पूरी तरह तैयार है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी समुदाय के लिए रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई इस बैठक में सबसे ज्यादा यूपी बिहार के ही नेताओं को बुलाया गया था।
पार्टी का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में वह यूपी में अपना गढ़ मजबूती से बनाए रखेगी। इसके लिए भगवान राम के मंदिर का उद्घाटन युवा मतदाताओं को आकर्षित करेगा तो लाभकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और अति पिछड़े और महादलित समुदाय को अपने साथ लाया जा सकेगा। पार्टी का अनुमान है कि मजबूत ओबीसी समुदाय के नेताओं के नेतृत्व और भागीदारी के दम पर वह विपक्ष के इस वार को बेअसर करने में वह सफल रहेगी।

