राहुल गांधी के 3 आरोपों पर अमित शाह ने लोकसभा में जवाब दिया. IndiGo चेयरमैन विक्रम मेहता ने फ्लाइट संकट पर माफी मांगी. युवाओं में बढ़ते BP पर नई गाइडलाइन जारी की गई है. इजराइली PM नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की.
आज के प्रमुख इवेंट्स
- बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होगी. उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स वेबसाइटें बिना अनुमति उनके नाम, फोटो, पहचान और छवि का इस्तेमाल न करें.
- बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन फरवरी में होने वाले 13वें संसदीय चुनाव का शेड्यूल जारी करेगा. इसकी जानकारी शाम 6 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जाएगी.
- अब देश-दुनिया की 5 बड़ी खबरें
- CEC, CCTV और चीफ जस्टिसराहुल के 3 सवालों का शाह ने दिया सिलसिलेवार जवाब
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव सुधार और वोट चोरी समेत 3 आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया. शाह ने कहा कि 73 साल तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई कानून नहीं था. सभी CEC औक आयुक्त प्रधानमंत्री की सिफारिश पर नियुक्त होते थे. 55 साल प्रधानमंत्री ने ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की. CCTV फुटेज पर उन्होंने कहा कि कानून में 45 दिन बाद विवाद की व्यवस्था ही नहीं है, इसलिए फुटेज रखने का प्रावधान नहीं है. चुनाव आयुक्तों के लिए कानूनी इम्युनिटी भी 1950 के कानून से ही चली आ रही है, इस कानून में कुछ नया नहीं जोड़ा गया.
वोट चोरी और चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान कल कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला था. उन्होंने EC की नियुक्ति, चुनाव आयोग की भूमिका और CCTV फुटेज हटाने संबंधी तीन बड़े सवाल उठाए थे. आज (बुधवार) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के उन सभी सवालों का सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया है.
पहले जान लीजिए राहुल गांधी के वो तीन सवाल
EC की नियुक्ति में CJI क्यों नहीं?
CCTV फुटेज 45 दिन में हटाने की जल्दबाजी क्यों?
EC को पूरी कानूनी इम्युनिटी क्यों?
अमित शाह ने इन सभी सवालों का सिलसिलेवार जवाब दिया है….
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पहला सवाल: EC की नियुक्ति में CJI क्यों नहीं?
इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि इस देश में 73 साल तक चुनाव आयोग की नियुक्ति का कानून नहीं था. नियुक्ति प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सीधे करती थीं. अब तक जितने CEC और चुनाव आयुक्त हुए सभी ऐसे ही हुए. 1950 से 1989 तक एक ही CEC होता था. कोई कानून नहीं था. प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के पास फाइल भेजते थे और वो अप्रूव हो जाती थी.
शाह ने कहा कि पूरे 55 साल प्रधानमंत्री ने ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त को नियुक्त किया. तब तक कोई सवाल नहीं था. नरेंद्र मोदी करते हैं तो उन पर सवाल उठाते हैं. मगर हमने ऐसा भी नहीं किया. उन्होंने कहा कि जब 1989 में चुनाव आयुक्त उनकी सुनते नहीं थे तो पहली बार उसे बहुसदस्यीय बनाया गया. मगर वो भी प्रधानमंत्री की फाइल से ही होती थी. 29 चुनाव आयुक्त सीधा पीएम चुने.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ही ये परंपरा बनाई थी. कानून भी उसे ने ही बनाया था. मगर आज आरोप लगाना है तो कहते हैं चुनाव चोरी कर लिया, चुनाव चोरी कर लिया. कहने से कुछ नहीं होता है, जनता हमें चुनती है और हम जवाब भी देते हैं. उन्होंने आगे कहा कि 1950 से लेकर 2023 तक कोई कानून नहीं था. 2023 में एक केस हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए.
इसके बाद CJI, प्रधानमंत्री, लीडर ऑफ अपोजीशन की कमेटी बनी. तय हुआ कि ये तीनों मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त चुनेंगे. शाह ने कहा कि 2012 में आडवाणी जी का सुझाव नहीं माना गया. उनका कहना है कि कमेटी में उनके दो लोग रहते हैं और हमारे एक, मगर ये तो देश की 140 करोड़ जनता तय करती है.
दूसरा सवाल: CCTV फुटेज 45 दिन में हटाने की जल्दबाजी क्यों?
इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि चुनाव आयोग ने CCTV फुटेज को 45 दिन में नष्ट करने का फैसला किया, इस पर इनको आपत्ति है. शाह ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 81 में एक प्रावधान है. प्रावधान क्या है, वो ये है- उम्मीदवार चुने जाने के बाद 45 दिन में चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं. 45 दिन के बाद इसको कोई चुनौती नहीं दे सकता. ये नियम 1991 में बना. सीसीटीवी फुटेज को चुनाव आयोग ने बाद में एक सर्कुलर जारी नियम में बदलाव करके एड किया.
उन्होंने आगे कहा कि आयोग ने इसे 81 की धारा के साथ संरक्षित किया है. जब 45 दिन दिन बाद डिस्प्यूट की प्रोविजन ही नहीं है तो 45 दिन बाद सीसीटीवी फुटेज क्यों रखना. जब चुनाव आयोग ने इसे एड किया था तब उन्होंने साफ कहा था कि यह सीसीटीवी फुटेज संवैधानिक दस्तावेज नहीं है. कोई भी 45 दिन तक सीसीटीवी मांग सकता है. शाह ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं कोर्ट में जाने से सीसीटीवी मिलेगी. आप इस देश के लोकतंत्र को बदनाम नहीं कर सकते. पहले अच्छे से भाषण लिखना सीखिए.
तीसरा सवाल: EC को पूरी कानूनी इम्युनिटी क्यों?
इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि 1950 के ही रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट में चुनाव आयोग के अधिकारी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त भी शामिल हैं, इन पर कोई मुकदमा चुनाव प्रक्रिया के लिए नहीं चल सकता है. हमने इसमें कुछ नया नहीं जोड़ा है. बस उसे और स्पष्ट करके नए कानून में डाला है. कांग्रेस के पास राज्यसभा में इतने सारे कानून के जानकार बैठे हैं, भगवान जानें दिन भर करते क्या हैं.
- इंडिगो के चेयरमैन विक्रम मेहता का माफीनामा, कहा- ये 19 साल के रिकॉर्ड पर दाग है
IndiGo चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने हालिया फ्लाइट संकट पर गलती स्वीकार करते हुए यात्रियों से माफी मांगी. उन्होंने कहा कि ये 19 साल के रिकॉर्ड पर दाग है. मेहता ने कहा कि मुझ पर बयान देने का दबाव था, लेकिन कंपनी की प्राथमिकता ऑपरेशंस को सामान्य करना और यात्रियों की मदद करना थी. अब IndiGo रोजाना 1,900 से अधिक उड़ानें चला रही है और सभी 138 डेस्टिनेशन जुड़ चुके हैं. मेहता ने माना कि आलोचना सही है, लेकिन जानबूझकर संकट पैदा करने या नियमों को प्रभावित करने के आरोप गलत हैं.
इंडिगो एयरलाइंस के महासंकट से जूझने के चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. कंपनी को लोगों के गुस्से और दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार का भी सामना करना पड़ा है. इस बीच राहत की खबर आई है. गलती मानते हुए और माफी मांगते हुए IndiGo बोर्ड चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने कहा है कि हमने आपको निराश किया, इसके लिए हम बेहद खेद जताते हैं.
विक्रम मेहता ने कहा, पिछले कई दिनों से बयान देने का दबाव था लेकिन पहली प्राथमिकता ऑपरेशन सुधारना और यात्रियों की मदद करना थी. अब इंडिगो की उड़ानें सामान्य हो चुकी हैं. रोजाना 1 हजार 900 से ज्यादा उड़ानों का संचालन हो रहा है. सभी 138 डेस्टिनेशन जुड़ चुके हैं. ऑन-टाइम परफॉरमेंस फिर से सामान्य हो चुका है. कंपनी ने माना कि आलोचना सही है, हमसे चूक हुई है.
ये सभी आरोप गलत, हमने नए नियमों का पालन किया
उन्होंने कहा कि बोर्ड ने फैसला किया है कि एक बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल किया जाएगा ताकि पता चल सके कि ये संकट क्यों आया और दोबारा ना हो. चेयरमैन ने कहा कि इंडिगो ने जानबूझकर संकट पैदा किया, सरकारी नियमों को प्रभावित करने की कोशिश की, सुरक्षा से समझौता और बोर्ड शामिल नहीं था, ये सभी आरोप गलत हैं. हमने सभी नए FDTL नियमों का पालन किया है.
सैकड़ों करोड़ रुपये के रिफंड जारी हैं
विक्रम मेहता ने कहा, संकट इसलिए हुआ क्योंकि तकनीकी दिक्कतें, मौसम, रोस्टर बदलाव और सिस्टम पर ज्यादा दबाव एक साथ आ गए. पहले दिन से ही बोर्ड ने इमरजेंसी मीटिंग की और संकट प्रबंधन टीम बनाई. अब स्थिति में सुधार में हुआ है. अब ऑपरेशन सामान्य है. सैकड़ों करोड़ रुपये के रिफंड जारी हैं. यात्रियों को होटल और ट्रैवल सहायता दी जा रही है.
इंडिगो को 19 सालों से प्यार देने के लिए धन्यवाद
उन्होंने कहा कि बाकी सामान भी पहुंचाया जा रहा है. सरकार और रेगुलेटर्स का धन्यवाद. यह घटना IndiGo के 19 साल के रिकॉर्ड पर दाग है. हमें आपका विश्वास फिर से जीतना होगा. कंपनी ने बिना शर्त माफी मांगी है. सुरक्षा और भरोसेमंद सेवा की गारंटी दी है. साथ ही कहा है कि इस संकट से सीखकर और मजबूत बनकर निकलेंगे. इंडिगो को 19 सालों से प्यार और भरोसा देने के लिए धन्यवाद.
- युवाओं में बढ़ते BP पर नई गाइडलाइन, जानिए स्वस्थ व्यक्ति के लिए क्या रेंज होनी चाहिए
आज के समय में तनाव, जंक फूड, खराब नींद और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण युवाओं में हाई BP तेजी से बढ़ रहा है. इसे देखते हुए अमेरिकन हॉर्ट असोसिएशन (AHA) ने नई गाइडलाइन जारी की है. इसमें 120 से 80 mmHg से कम BP को स्वस्थ, 120-129 को बढ़ा हुआ BP, 130-139 को स्टेज 1 हाइपरटेंशन और 140/90 mmHg से ऊपर को स्टेज 2 हाइपरटेंशन माना गया है.
ड प्रेशर आज के समय की तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. ऐसे में बुज़ुर्गों की तुलना में युवा पीढ़ी में हाई BP के केस तेजी से बढ़ रहे हैं. इसकी वजह है लगातार तनाव, खराब नींद, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और स्क्रीन टाइम बढ़ना. बढ़ते मामलों को देखते हुए AHA ने अपनी नई गाइडलाइन जारी की हैं, हालांकि ये बहुत हद तक पिछली गाइडलाइन जैसी ही है, लेकिन कुछ बदलाव भी हैं.

ऐसे में इन गाइडलाइनों में ब्लड प्रेशर की नई कैटेगरीज़, जोखिम के संकेत और इलाज के तरीके पहले से ज्यादा स्पष्ट किए गए हैं. आइए जानते हैं कि इन नई गाइडलाइनों में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं और उन्हें किस तरह समझा जाए. पहले जानते हैं कि BP की नई कैटेगरीज़ क्या हैं.
क्या हैं BP की नई कैटेगरीज़?
पहले ब्लड प्रेशर की सामान्य रेंज को आमतौर पर 120/80 mmHg होती थी और यही पूरी तरह नॉर्मल होती थी. इसके थोड़ा ऊपर-नीचे होने को लोग अक्सर गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन अब AHA और ACC की नई गाइडलाइन आने के बाद ब्लड प्रेशर की रेंज को और स्पष्ट कर दिया गया है, ताकि हाई BP को जल्दी पहचाना जा सके. अब 120/80 mmHg से नीचे नॉर्मल है , लेकिन इसके ऊपर की रीडिंग्स को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है.
जैसे 120-129 को Elevated यानी हाई BP की शुरुआती चेतावनी, 130-139 को Stage 1 Hypertension यानी हाई BP की पहली स्टेज और 140/90 mmHg से ऊपर को Stage 2 Hypertension यानी गंभीर हाई BP माना जाता है. नई रेंज से यह फायदा हुआ है कि लोग समय रहते BP बढ़ने के संकेत पहचानकर इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव कर सकते हैं.
क्या हैं ब्लड प्रेशर की 10 नई गाइडलाइन?
- अब 120/80 mmHg से नीचे नॉर्मल बीपी
नई गाइडलाइन बताती है कि 120/80 mmHg से नीचे की रेंज को पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित माना जाता है. अगर BP इससे थोड़ा भी ऊपर जाता है तो अब इसे नजरअंदाज नहीं किया जाता. नई गाइडलाइन का मकसद है शुरुआत में ही बदलाव पहचान लेना, ताकि भविष्य में हाई BP बनने का खतरा कम हो.
- 120-129 Elevated BP कहा गया
यह हाई BP की शुरुआत की चेतावनी है. इस स्टेज में दवाओं की जरूरत नहीं होती, बस आदतें सुधारनी होती हैं. जैसे नमक कम करना, वजन कंट्रोल और रोजाना वॉक. अगर इसे अनदेखा किया गया तो आगे BP बढ़ सकता है.
- 130-139 को Stage 1 Hypertension
इस रेंज पर BP बढ़ चुका है और ध्यान की जरूरत है. डॉक्टर पहले लाइफस्टाइल बदलने की सलाह देते हैं. अगर मरीज को हार्ट का जोखिम ज्यादा है, तो दवाएं भी शुरू हो सकती हैं. यह स्टेज हार्ट और किडनी पर दबाव बढ़ाती है.
- 140/90 mmHg से ऊपर Stage 2 Hypertension
यह हाई BP का गंभीर स्तर है और तुरंत इलाज चाहिए. इसमें दवाओं के साथ सख्त निगरानी की जरूरत है. अगर कंट्रोल न किया जाए तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है. रोजाना BP की मॉनिटरिंग बहुत जरूरी हो जाती है.
- दवाओं की शुरुआत जल्दी की जाएगी
नई गाइडलाइन कहती है कि जोखिम देखते ही दवा शुरू होनी चाहिए. पुरानी गाइडलाइन की तरह इंतजार नहीं किया जाएगा. इससे गंभीर मुश्किलों को पहले ही रोका जा सकता है. खासतौर पर उन लोगों में जिन्हें हार्ट का खतरा ज़्यादा है.
- लाइफस्टाइल बदलाव जरूरी
एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल और नमक कम करना सबसे जरूरी कदम बताए गए हैं. ये बदलाव दवा जितने ही असरदार माने गए हैं. रोजाना 30 मिनट वॉक या योग की सलाह दी गई है. साथ ही पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड कम करने को कहा गया है.
- घर पर BP मॉनिटरिंग जरूरी
अब केवल क्लिनिक BP पर भरोसा करना सही नहीं माना जाता, घर में BP मशीन रखना और नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है. इससे सटीक रीडिंग्स मिलती हैं और उपचार प्रभावी होता है. कई लोग व्हाइट कोट इफेक्ट से भी बच पाते हैं.
- नमक कम करना जरूरी
ज्यादा नमक BP को तुरंत और तेज बढ़ाता है. नई गाइडलाइन रोज़मर्रा के खाने में नमक को सीमित रखने की सलाह देती है. पैक्ड स्नैक्स, अचार, चिप्स और प्रोसेस्ड फूड से बचना जरूरी है. ताजा और हल्का भोजन BP को स्थिर रखने में मदद करता है.
- तनाव मैनेजमेंट इलाज का हिस्सा
तनाव हाई BP का बड़ा कारण माना गया है. नई गाइडलाइन में नींद सुधारना, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने को जरूरी बताया गया है. तनाव कम करने से BP खुद-ब-खुद कम होने लगता है. मूड स्थिर रहने से हार्ट पर दबाव भी कम होता है.
- हाई-रिस्क मरीजों के लिए BP के मानक और कड़े किए गए
जिन्हें हार्ट डिजीज, डायबिटीज या किडनी रोग का खतरा अधिक है, उन्हें BP को बाकी लोगों से भी कम रखना जरूरी है, ताकि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी खराब होने की आशंका कम हो. इन मरीजों की मॉनिटरिंग और इलाज दोनों ज्यादा सख्त रखे जाते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
राजीव गांधी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि नई गाइडलाइनों से हाई ब्लड प्रेशर के मामलों की पहचान पहले होगी और इससे हार्ट डिजीज, किडनी की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा काफी कम किया जा सकेगा. अब केवल बहुत ज्यादा BP होने पर ही नहीं, बल्कि थोड़ी सी बढ़ोतरी पर भी लाइफस्टाइल में बदलाव करना बेहद जरूरी है.
युवा वर्ग में तनाव और खराब लाइफस्टाइल हाई BP की सबसे बड़ी वजह बन रही है. इसलिए नियमित मॉनिटरिंग, स्वस्थ खानपान और फिजिकल एक्टिविटी शारीरिक करने की बहुत जरूरी है. ऐसे में नई गाइडलाइन का उद्देश्य साफ है, जितनी जल्दी पहचान, उतना बेहतर कंट्रोल.
BP को कंट्रोल करने के लिए ये भी जरूरी
रोज 30 मिनट तेज वॉक या योग करें.
नमक और पैक्ड फूड कम करें.
नींद 7 से 8 घंटे जरूर लें.
कैफीन और धूम्रपान से बचें.
पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं.
तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन करें.
- नेतन्याहू ने PM मोदी को फोन किया, गाजा पीस प्लान और आतंकवाद पर की बात की
इजराइल के PM बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया. दोनों नेताओं ने भारतइजराइल रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की. आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी दोहराई. PM मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर बात की और गाजा पीस प्लान के जल्द लागू होने का समर्थन किया. दोनों नेताओं ने भविष्य में संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई.
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कॉल किया. दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी दोहराई और कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
PM मोदी और नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रयासों का समर्थन करता है. उन्होंने गाजा पीस प्लान को जल्द लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखने का वादा किया.
इस कॉल के क्या मायने हैं?
यह कॉल दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को बढ़ाने का संकेत है. भारत और इजराइल सिर्फ रक्षा या सुरक्षा में ही नहीं, बल्कि विदेश नीति और क्षेत्रीय शांति में भी मिलकर काम कर रहे हैं. मोदी और नेतन्याहू की यह बातचीत नई नहीं है. इससे पहले भी दोनों नेता कई बार फोन पर बात कर चुके हैं.
नेतन्याहू 2017 में भारत आए थे. उस समय दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी पर कई समझौते किए थे. इसके बाद भी दोनों देश नियमित रूप से रक्षा, तकनीकी सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर संवाद करते रहे हैं.
भारत-इजराइल की रणनीतिक साझेदारी
यह बातचीत दिखाती है कि भारत-इजराइल रिश्ता केवल औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक है. आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को मजबूत करती है. साथ ही यह भारत की पश्चिम एशिया में सक्रिय और सकारात्मक भूमिका को भी दर्शाती है.
दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि वे भविष्य में लगातार संपर्क बनाए रखेंगे, ताकि साझेदारी और मजबूत हो सके. इस तरह की बातचीत से क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका भी बढ़ती है.
- IPL 2026 ऑक्शन टेबल पर दिख सकते हैं अय्यर, पहली बार नीलामी में शामिल होंगे
16 दिसंबर को अबू धाबी में होने वाले IPL 2026 मिनी ऑक्शन में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर पहली बार ऑक्शन टेबल पर नजर आ सकते हैं. क्रिकबज के मुताबिक, चोट के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट से बाहर चल रहे अय्यर इस बार टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. पंजाब किंग्स को अपने कोच की गैरमौजूदगी में ऑक्शन में उतरना है, इसलिए अय्यर ऑक्शन में बोली लगाते दिख सकते हैं. ऐसा पहली बार होगा, जब कप्तान बोली लगाएगा
अबू धाबी के एतिहाद एरीना में 16 दिसंबर को आईपीएल के कर्ता-धर्ताओं का जमघट लगेगा. मौका होगा IPL 2026 सीजन के लिए खिलाड़ियों की नीलामी का. पिछले सीजन के मेगा ऑक्शन के बाद इस बार मिनी ऑक्शन होने जा रहा है. कई हफ्तों से इस दिन का हर किसी को इंतजार है और इस बार ऑक्शन को और भी खास बनाने जा रहे हैं श्रेयस अय्यर. पंजाब किंग्स के कप्तान अय्यर इस बार ऑक्शन टेबल पर बैठे नजर आ सकते हैं.
इस कारण ऑक्शन में पहुंचेंगे अय्यर
क्रिकबज की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चोट के कारण फिलहाल टीम इंडिया से बाहर चल रहे अय्यर इस बार ऑक्शन के लिए अबू धाबी में नजर आ सकते हैं. अय्यर इससे पहले किसी भी टीम के कप्तान के रूप में कभी भी ऑक्शन में शामिल नहीं हुए हैं. मगर इस बार ऐसा हो सकता है क्योंकि एक तो वो फिलहाल इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर हैं और दूसरा पंजाब किंग्स को अपने कोच के बिना ही ऑक्शन में उतरना पड़ रहा है.
जी हां, अय्यर के ऑक्शन में शामिल होने की एक बड़ी वजह पंजाब किंग्स के कोच रिकी पॉन्टिंग हैं, जो ऑक्शन में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. असल में पॉन्टिंग इस वक्त ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच चल रही एशेज सीरीज के कॉमेंट्री पैनल का हिस्सा हैं. वो सीरीज के ब्रॉडकास्टर 7 क्रिकेट से जुड़े हुए हैं और ऐसे में वो इस ऑक्शन में हिस्सा नहीं लेंगे. हालांकि इसका दूसरा पहलू ये भी है कि पंजाब को ऑक्शन में सिर्फ 4 खिलाड़ी ही खरीदने हैं और ऐसे में पॉन्टिंग को इस नीलामी से छुट्टी दी गई है.
चोट के कारण बाहर, वापसी में अभी वक्त
अय्यर पिछले करीब डेढ़ महीने से क्रिकेट एक्शन से दूर हैं. उन्हें ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वनडे सीरीज के दौरान कैच लपकते हुए चोट लग गई थी. उनकी पसली में चोट लगी थी, जिसके कारण शरीर के अंदर खून बहने लगा था. इसके बाद उनकी वहीं सर्जरी हुई थी और तब से ही वो रिकवरी-रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से उनकी वापसी की उम्मीद की जा रही है.
पंत ने भी लिया था ऑक्शन में हिस्सा
वैसे ये पहला मौका नहीं होगा जब कोई कप्तान ऑक्शन टेबल का हिस्सा बनेगा. इससे पहले भी कुछ मौकों पर देखने को मिला है, जब कोई कप्तान या टीम का अहम खिलाड़ी ऑक्शन का हिस्सा रहा है. सबसे ताजा नजारा 2024 सीजन की नीलामी के दौरान दिखा था, जब एक्सीडेंट के कारण पूरे सीजन बाहर रहे ऋषभ पंत अपनी पुरानी टीम दिल्ली कैपिटल्स के साथ ऑक्शन टेबल पर नजर आए थे.
महाराष्ट्र में बढ़ते तेंदुए के खतरों पर ध्यान दिलाने के लिए जुन्नर के विधायक शरद सोनवणे विधानसभा में तेंदुए की खाल जैसे कपड़े पहनकर पहुंचे. उन्होंने यह कदम उस दिन उठाया, जब नागपुर के पारडी इलाके में तेंदुए के हमले में सात लोग घायल हुए. हालांकि बाद में वन विभाग ने उसे पकड़ लिया. सोनवणे ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में पुणे के जुन्नर तालुका में तेंदुए के हमलों से 55 लोगों की मौत हो चुकी है, इसलिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है.
5 राज्यों की 5 बड़ी खबरें
- उत्तर प्रदेश: पूर्व टोल मैनेजर का बड़ा खुलासा- एक नहीं हजारों कपल के वीडियो रिकॉर्ड हुए.
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कपल का प्राइवेट वीडियो वायरल होने के बाद सुल्तानपुर पुलिस एक्शन में है. पुलिस ने हलिया टोल प्लाजा के चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. वहीं तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में टोल प्लाजा के एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) का पूर्व सहायक मैनेजर आशुतोष सरकार भी है.
आशुतोष सरकार ने क्या बताया?
गिरफ्तार लोगों में हलियापुर टोल प्लाजा के एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) का पूर्व सहायक मैनेजर आशुतोष सरकार भी है. पुलिस पूछताछ में आशुतोष ने कई चौंकाने वाला खुलासा किया. सूत्रों के मुताबिक, आशुतोष ने बताया कि ढाई साल में इस तरह के हजारों वीडियो सामने आए. ये सभी वीडियो टोल प्लाजा पर लगे CCTV में रिकॉर्ड हो गए. हालांकि उसने एक भी वीडियो वायरल नहीं किया. जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसे टोल पर काम करने वाले एक पूर्व कर्मचारी ने किसी ड्राइवर को दिया था. उसी ने इसे वायरल कर दिया.
दरअसल, ये मामला हलियापुर स्थित पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के टोल प्लाजा का है. पिछले दिनों पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर चलने वाले कुछ लोगों का वीडियो वायरल हुआ था. ये वीडियो कपल और नवविवाहित जोड़ों का था. आरोप है कि कपल का गाड़ी के अंदर रोमांस करते और उनके प्राइवेट पलों को रिकॉर्ड कर एंटी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा वायरल किया गया था.
CM को लेटर लिखकर हुई थी शिकायत
इसके साथ ही सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को संबोधित एक शिकायती पत्र भी वायरल हुआ, जिसमें बताया गया कि यहां कार्यरत कर्मचारी ऐसे यात्रियों का वीडियो क्लोज करके बनाते हैं, साथ ही उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूल लेते हैं. जब जांच पड़ताल हुई तो मामला सही पाया गया. वहीं शासन ने खबर का संज्ञान लेते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर निजी वीडियो वायरल करने और अवैध वसूली के मामले में बड़ी कार्रवाई की.
ब्लैकमेल कर करते थे वसूली
यूपीडा के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक चौहान ने हलियापुर टोल प्लाजा पर कार्यरत सिस्टम टेक्नीशियन आशुतोष तिवारी, ट्रैफिक मैनेजर शशांक शेखर, सहायक मैनेजर आशुतोष सरकार और सिस्टम इंजीनियर प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से हटा दिया. इन पर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने, कपल की निजता का हनन करने और ब्लैकमेल कर अवैध वसूली करने का आरोप है.
4 आरोपियों के खिलाफ FIR, 3 गिरफ्तार
इसके साथ ही हलियापुर थानाध्यक्ष को इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए निर्देश दिया गया था. फिलहाल पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान इन चारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. साथ ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है. वहीं मामले में टर्मिनेट होने के बाद आशुतोष सरकार और शशांक शेखर अपने आपको बेकसूर बता रहे हैं. साथ ही अपने साथ काम करने वालों पर वीडियो बनाने और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा रहे हैं.
- दिल्ली: उमर-शरजील की जमानत पर SC का फैसला सुरक्षित, पुलिस ने किया ये दावा.सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. याचिकाकर्ताओं ने 5 साल से अधिक की हिरासत और ट्रायल में देरी का हवाला दिया. दिल्ली पुलिस ने इसे ‘रेजीम चेंज’ की पैन-इंडिया साजिश बताया, व्हाट्सएप ग्रुप्स का जिक्र किया.
दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा समेत अन्य की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजरिया की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के जमानत खारिज आदेश के खिलाफ सुनवाई पूरी की. याचिकाकर्ताओं ने 5 साल से अधिक की हिरासत, ट्रायल में देरी और हिंसा भड़काने के सबूत न होने की दलील दी.
दिल्ली पुलिस ने इसे रेजीम चेंज और इकोनॉमिक स्ट्रैंगुलेशन के उद्देश्य से बनी पैन-इंडिया साजिश बताया. पुलिस ने व्हाट्सएप ग्रुप, DPSG और जामिया अवेयरनेस कैंपेन टीम का हवाला दिया. पुलिस का दावा है कि देरी याचिकाकर्ताओं की वजह से हुई, सहयोग करने पर ट्रायल दो साल में पूरा हो सकता है.
जब दंगे हुए थे उस समय दिल्ली में था ही नहीं
इससे पहले हुई सुनवाई मेंशरजील इमाम ने कहा था कि वह कोई आतंकवादी नहीं है. शरजील ने बिना किसी पूरी सुनवाई या दोषसिद्धि के खतरनाक बौद्धिक आतंकवादी करार दिए जाने पर नाराजगी जताई थी. वहीं उमर खालिद ने कहा था कि जब दंगे हुए थे उस समय वह दिल्ली में था ही नहीं.
कहना चाहूंगा कि मैं आतंकवादी नहीं हूं
कोर्ट में शरजील की ओर से पेश हुए वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा, मैं कहना चाहूंगा कि मैं आतंकवादी नहीं हूं, जैसा कि पुलिस ने मेरे बारे में कहा है. मैं कोई राष्ट्र-विरोधी नहीं हूं, जैसा राज्य की ओर से कहा गया है. मैं इस देश का जन्म से नागरिक हूं. अब तक मुझे किसी भी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है.
ऐसे में साजिश का आरोप नहीं लग सकता
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच के सामने दलील रखते हुए दवे ने कहा, शरजील को दंगे से कुछ दिन पहले ही 28 जनवरी 2020 को अरेस्ट कर लिया गया था. ऐसे में भाषणों के आधार पर दंगों को लेकर किसी तरह की आपराधिक साजिश का आरोप नहीं लगाया जा सकता. उसके खिलाफ एफआईआर मार्च 2020 में दर्ज की गई थी.
- बिहार: सीतामढ़ी में 7000 HIV मरीज, 400 बच्चे पॉजिटिव; डॉक्टरों ने दी ये सलाह
- बिहार के सीतामढ़ी जिले से हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां एचआईवी से संक्रमित लोगों की संख्या ने सभी को हैरान कर दिया है. वहीं स्वास्थ्य विभाग में आंकड़ों को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग एचआईवी पॉजीटिव मरीजों के आंकड़े सामने आ रहे हैं. जिले में एचआईवी पॉजीटिव मरीजों की संख्या 7000 से अधिक बताई जा रही है, इनमें बच्चे भी शामिल हैं. एचआईवी संक्रमितों के सात हजार से अधिक आंकड़ें सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग इसे गंभीरता से लेते हुए शहर और ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा लोगों के टेस्ट करने की भी बात कही है.
- मध्य प्रदेश: अब ड्रेस कोड में नजर आएंगे महाकाल मंदिर के पुजारी, रखना होगा ID कार्ड.
मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति जल्द ही एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसके तहत महाकालेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले पुजारी और पुरोहित भी ड्रेस कोड में नजर आएंगे. प्रबंध समिति द्वारा यह कार्य इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि मंदिर में सभी पुजारियो और पुरोहित की एक जैसी वेशभूषा देखकर अधिकांश समय श्रद्धालु मंदिर के अन्य लोगों के संपर्क में आकर ठगी के शिकार हो जाते हैं. इस नई व्यवस्था से सभी पुजारी पुरोहित और उनके प्रतिनिधि एक ही तरह के ड्रेस कोड में नजर आएंगे जिससे उन्हें आसानी से पहचाना जा सकेगा.
मामले की जानकारी देते हुए श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी और पुरोहितों के लिए भी ड्रेस कोड लागू होने वाला है. इसके तहत अब मंदिर के 16 रजिस्टर्ड पुजारी, 22 पुरोहित और लगभग 45 प्रतिनिधि सभी को ड्रेस कोड का पालन करना जरूरी होगा. इस ड्रेस कोड को लागू करने के बारे में प्रशासक ने बताया कि एक जैसी वेशभूषा होने के कारण श्रद्धालु मंदिर के पुजारी और पुरोहितों को आसानी से पहचान सकेंगे.
ठगी पर लगेगी रोक
इस सबके साथ ही उनके गले में आईडी कार्ड भी होगा, जिससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को इन्हें पहचानने में कोई भी परेशानी नहीं होगी. उन्होंने बताया कि कई बार एक जैसी वेशभूषा होने के कारण अनाधिकृत लोग भी पुजारी पुरोहित बनकर मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं. इस नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को जहां पुजारी पुरोहितों को पहचानने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. वहीं भोले भाले भक्तजनों से होने वाली ठगी पर भी रोक लगेगी.
नियमों का कराया जाएगा पालन
ड्रेस कोड लागू होते ही श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति यह प्रयास करेगी की सभी पुजारी पुरोहित और उनके प्रतिनिधि ड्रेस कोड का पालन करें और अपने गले में आईडी कार्ड भी डालकर रखें. इस कार्ड पर व्यक्ति का नाम, पता, फोटो, ब्लड ग्रुप के साथ ही मोबाइल नंबर की भी जानकारी होगी. अगर किसी कारण से यह कार्ड गुम होता है तो तुरंत इसकी जानकारी महाकाल थाने पर देना अनिवार्य होगा, जिससे कि कोई इस कार्ड का दुरुपयोग ना कर सके.
- महाराष्ट्र: क्या Dy CM के बेटे को बचा रही पुलिस, पुणे जमीन विवाद पर HC की फटकार.
पुणे में एक विवादित जमीन के सौदे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को पुलिस पर कड़े सवाल उठाए. कोर्ट ने इशारा किया कि पुलिस शायद उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार को बचाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उनका नाम FIR में नहीं है.
जस्टिस माधव जामदार की सिंगल बेंच ने एक व्यापारी महिला शीतल तेजवानी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तीखा सवाल उठाया. जस्टिस माधव जामदार ने पूछा कि क्या पुलिस उपमुख्यमंत्री के बेटे की रक्षा कर रही है और सिर्फ बाकी लोगों की जांच कर रही है? इस पर सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी.
40 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
दरअसल, यह मामला पुणे के मुंधवा इलाके की 40 एकड़ जमीन से जुड़ा है. जमीन को 300 करोड़ रुपये में अमेडिया एंटरप्राइजेज LLP नाम की फर्म को बेचा गया. इस फर्म में पार्थ पवार 99 प्रतिशत के साझेदार हैं. फर्म को कथित तौर पर 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी से भी छूट दी गई थी. बाद में पता चला कि यह जमीन सरकारी है और बेची ही नहीं जा सकती थी.
FIR में इन लोगों के नाम, 2 गिरफ्तार, 1 फरार
इस मामले में अब तक IGR (Inspector General of Registration) की कमेटी की रिपोर्ट में इन लोगों को दोषी ठहराया गया. दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और रविंद्र तारु.. इन सभी के नाम पर पुणे पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. इसमें शीतल तेजवानी और रविन्द्र तारु को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि दिग्विजय पाटिल फरार हैं. दिग्विजय पार्थ पवार के बिजनेस पार्टनर और चचेरे भाई हैं. शीतल जमीन विक्रेताओं की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक और रविंद्र तारु सब-रजिस्ट्रार ऑफिसर हैं. इस मामले की जांच में मोड़ तब आया जब जांच अधिकारी ने कहा था कि पार्थ पवार का नाम किसी भी दस्तावेज में नहीं था, इसलिए उन्हें नामजद नहीं किया गया.
शीतल तेजवानी की गिरफ्तारी और दूसरी FIR
शीतल तेजवानी को 3 दिसंबर को पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गिरफ्तार किया था. वह 11 दिसंबर तक पुलिस रिमांड में हैं. इसी मामले में बवधन पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ दूसरी FIR दर्ज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की. तेजवानी के वकील राजीव चव्हाण और अजय भीसे ने तर्क दिया कि एक ही मामले में दूसरी FIR दर्ज करना गलत है जबकि पहली FIR की जांच पहले से चल रही है. सरकारी वकील ने कहा कि तेजवानी सेशंस कोर्ट में पहले ही प्री-अरेस्ट बेल मांग चुकी हैं, इसलिए हाईकोर्ट में समान राहत मांगना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है.
कोर्ट ने याचिका खारिज करने के संकेत दिए तो तेजवानी के वकीलों ने याचिका वापस ले ली. शीतल तेजवानी की याचिका में कहा गया कि जमीन सौदा कानूनी रूप से पंजीकृत और पूरी तरह वैध था. FIR में किसी संज्ञेय अपराध का आवश्यक तत्व नहीं है. उन्होंने केवल भूमि मालिकों की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत काम किया. एक ही मामले में दूसरी FIR दर्ज करना गलत और कानून के खिलाफ है.
सियासी रूप ले चुका है मामला
विपक्ष का आरोप है कि यह जमीन “महार वतन” श्रेणी की थी और इसकी वास्तविक कीमत 300 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है. महार वतन-यह एक परंपरागत प्रणाली है, जिसमें महार समुदाय (SC) को गांव प्रशासन की सेवाओं के बदले जमीन दी जाती थी.ऐसी जमीन को सरकार की पूर्व अनुमति के बिना बेचा नहीं जा सकता. राजनीतिक विवाद बढ़ने पर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा था कि पार्थ पवार और उनके पार्टनर को जमीन के सरकारी होने की जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि यह विवादित सौदा अब रद्द कर दिया गया है.