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लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को बड़ी राहत,संपत्ति विवाद में पद्मजा कुमारी परमार की याचिका खारिज

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दिल्ली हाईकोर्ट ने मेवाड़ राजपरिवार के संपत्ति विवाद में पद्मजा कुमारी परमार की याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे उनके भाई लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को बड़ी राहत मिली है. विवाद दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को लेकर है, जिसमें उन्होंने लक्ष्यराज को अपना उत्तराधिकारी बनाया था. फैसले के बाद लक्ष्यराज ने उदयपुर के जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए और इसे ‘सत्य की जीत’ करार दिया.

मामले के मुख्य बिंदु:

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने फैसले पर खुशी जताते हुए इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है। 

 मेवाड़ पूर्व राजपरिवार की अरबों की संपत्ति से जुड़े बहुचर्चित विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को एक अहम फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने पद्मजा कुमारी परमार द्वारा दायर उस याचिका (TEST.CAS. 2/2026) को खारिज कर दिया है. जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के लिए ‘लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ (Letters of Administration) जारी करने की मांग की थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि वसीयत की वैधता से जुड़ा मूल विवाद पहले से ही विचाराधीन है. ऐसे में बिना वसीयत (Intestacy) के आधार पर प्रशासन पत्र जारी करना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा. इस फैसले को लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के लिए एक बड़ी कानूनी और नैतिक जीत माना जा रहा है.

इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 मार्च 2025 को अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद हुई थी. विवाद का मुख्य केंद्र फरवरी 2025 में तैयार की गई वह वसीयत है. जिसमें अरविंद सिंह मेवाड़ ने अपनी सभी स्व-अर्जित संपत्तियां, जिनमें उदयपुर का ऐतिहासिक सिटी पैलेस और प्रतिष्ठित एचआरएच (HRH) ग्रुप ऑफ होटल्स शामिल हैं, अपने बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के नाम कर दी थीं. पद्मजा कुमारी परमार ने इस वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती देते हुए दावा किया था कि उनके पिता उस समय स्वस्थ मानसिक स्थिति में नहीं थे. उन्होंने तर्क दिया था कि संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत होना चाहिए. हालांकि लक्ष्यराज सिंह के वकीलों ने इसे आधारहीन बताते हुए वसीयत को पूरी तरह वैध करार दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में सुनवाई
यह मामला पहले राजस्थान हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में अलग-अलग चल रहा था. लेकिन दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘फोरम शॉपिंग’ से बचने और त्वरित न्याय के लिए सभी याचिकाओं को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित (Transfer) करने का आदेश दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट अब इन सभी संबंधित मामलों की एक साथ सुनवाई कर रहा है. मंगलवार के फैसले में अदालत ने पद्मजा कुमारी को यह स्वतंत्रता जरूर दी है कि वे वसीयत की वैधता (TEST.CAS. 4/2026) वाली मुख्य याचिका में अपनी सभी आपत्तियां दर्ज करा सकती हैं. लेकिन वर्तमान में उनकी ‘इंटेस्टेसी’ याचिका खारिज होने से संपत्ति पर तत्काल नियंत्रण पाने की उनकी कोशिश को झटका लगा है.

लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मंदिर में नवाया शीश
अदालत के फैसले की खबर मिलते ही उदयपुर स्थित मेवाड़ राजपरिवार के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. फैसले के बाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ अपने परिवार के साथ उदयपुर के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर पहुंचे. यहाँ उन्होंने भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना की और न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया. मंदिर से बाहर निकलने पर जगदीश चौक पर मौजूद समर्थकों ने आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया. इस दौरान मंदिर प्रबंधन की ओर से उन्हें विशेष प्रसाद और दुपट्टा भेंट किया गया. लक्ष्यराज ने इस मौके पर हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया और इसे मेवाड़ की परंपराओं की जीत बताया.

“सत्य की जीत”: लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का बयान
मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा. “आज के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. मेरे पिता की वसीयत और उनके निर्णयों पर जो सवाल उठाए गए थे. उनसे मुझे और मेरे परिवार को गहरी मानसिक पीड़ा हुई थी. लेकिन मुझे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था.” उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य मेवाड़ की विरासत को सहेजना और जनसेवा करना है. उन्होंने इस कानूनी लड़ाई में साथ देने वाले शुभचिंतकों और जनता का शुक्रिया अदा किया. अब सभी की निगाहें मुख्य वसीयत केस की अगली सुनवाई पर टिकी हैं. जो इस विवाद का अंतिम फैसला तय करेगी.

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