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BJP ने हर्षवर्धन का खंडवा से टिकट काटा, हर्ष बोले- अभी कुछ नहीं कहूंगा..

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बुरहानपुर

खंडवा संसदीय सीट से भाजपा के सबसे प्रबल दावेदार रहे पूर्व सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन सिंह चौहान ने टिकट कटने के बाद चुप्पी साध ली है। उनसे जुड़े करीब नेता, कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट कटने से वह बहुत आहत हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे किसी से बात करने को भी तैयार नहीं हैं। हर्षवर्धन सिंह चौहान से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बड़े ही भारी मन से कहा – इस संबंध में अभी मैं कोई बात नहीं करना चाहता। बताया जा रहा है कि टिकट कटने के बाद सभा करने आए सीएम ने भी उन्हें फोनकर बुलाया, लेकिन वे बहाना बनाकर वहां नहीं गए।

दरअसल, पूरा मामला यहां से शुरू हुआ कि जब उनका टिकट कटा तो उनको इसकी कतई उम्मीद नहीं थी। वह मानकर चल रहे थे कि यह राजनीतिक विरासत उनके घर से नहीं जाएगी, लेकिन पार्टी ने दूसरा उम्मीदवार उतार दिया। इससे वह उबर ही नहीं पा रहे हैं। भाजपा के कुछ नेता, कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह अभी दुःखी जरूर हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि पुराने दिनों की तरह लौट आएंगे।

5 अक्टूबर को प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव की सभा में हर्षवर्धन सिंह चौहान कार्यकर्ता की तरह मंच के सामने बैठे थे।

सीएम का फोन आया तो भी नामांकन रैली में नहीं गए हर्षवर्धन
भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार गुरुवार को खंडवा में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल की नामांकन रैली से पहले सीएम शिवराज सिंह का फोन भी हर्षवर्धन को गया था, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम में यह कहकर आने से मना कर दिया कि मां की तबीयत खराब है, इसलिए नहीं आ सकते। वहीं, प्रत्याशी घोषित होने के बाद ज्ञानेश्वर पाटिल जब नंदू भैया की समाधि से उनकी पत्नी से आशीर्वाद लेना चाहते थे, तब हर्षवर्धन ने उन्हें कहा कि मां की तबीयत खराब है, अभी आप न आएं। अब भाजपा उन्हें मनाने की कोशिशें कर सकती है, क्योंकि निमाड़ में उनके पिता नंदकुमार सिंह चौहान का खासा नाम है और शुरुआत से ही सीएम से लेकर हर मंत्री, संगठन के नेता बुरहानपुर आकर एक ही बात कर रहे थे कि हमें नंदू भैया के सपने पूरे करने हैं। अंदरूनी तौर पर हर्षवर्धन को भी आश्वस्त किया जा चुका था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा, लेकिन ऐनवक्त पर पार्टी ने दूसरा उम्मीदवार मैदान में उतार दिया।

टिकट कटने से पहले आखिरी बार प्रदेश प्रभारी के कार्यक्रम में नजर आए थे
हर्षवर्धन टिकट के प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन 5 अक्टूबर को जब प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव बुरहानपुर आए तो मंच की बजाए हर्षवर्धन सिंह चौहान कार्यकर्ता की तैयार मंच के सामने बैठे थे। उनके आगे पूर्व महापौर अनिल भोंसले, भाजपा नेता राजू जोशी, पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप श्राफ, पूर्व निगम अध्यक्ष मनोज तारवाला आदि बैठे थे। जबकि मंच पर मुरलीधर राव, स्कूली शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट थे। इसके बाद हर्षवर्धन केवल संगठन की बैठकों में नजर आए।

पहले पार्टी ने पूर्व विधायक मंजू दादू का टिकट काटकर कास्डेकर को दिया था, अब हर्षवर्धन की जगह पाटिल
बुरहानपुर जिले में ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब संगठन के लिए पार्टी के नेताओं के उत्तराधिकारियों ने बलिदान दिया हो। इससे पहले विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आई नेपानगर विधायक सुमित्रा कास्डेकर को पार्टी ने टिकट दिया था। तब मंजू दादू को काफी समझाया गया। उनकी पार्टी तक छोड़ने की चर्चाएं भी चली थीं, हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब दूसरा बलीदान सांसद पुत्र हर्षवर्धन ने दिया है।

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