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भाजपा ने स्वाति काशिद का टिकट काटा: भारी पड़ा दो मर्डर केस में फंस चुके पति युवराज का नाम

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इंदौर

इंदौर में भाजपा ने वार्ड 56 से पार्षद पद के लिए स्वाति काशिद का टिकट 16 घंटे के अंदर ही निरस्त कर दिया गया। उनकी जगह गजानंद गावड़े को टिकट मिला है। गावड़े पूर्व में पार्षद रह चुके हैं। इस संबंध में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा आपराधिक पृष्ठभूमि के पारिवारिक सदस्यों को भी टिकट नहीं देती। स्वाति काशिद के बारे में हमें पता चला कि उनके पति और परिवार की पृष्ठभूमि आपराधिक है। वो बहन (स्वाति) कैसी है ये कहने की जरुरत नहीं। लेकिन, यदि उनके पति से लेकर परिवार की आपराधिक पृष्ठभूमि का हमें यदि फीडबैक मिलता है तो भाजपा इसे लेकर जीरो टॉलरेंस पर है। इसलिए पार्टी वार्ड 56 से दूसरे प्रत्याशी को टिकट दिया जाएगा।

शर्मा ने कहा कि इस संबंध में पार्टी संगठन महामंत्री और मुख्यमंत्री को इस बारे में फीडबैक मिला था। इसलिए भाजपा ने उनका टिकट निरस्त किया है। दरअसल युवराज काशिद उर्फ युवराज उस्ताद और उसकी गैंग पर अवैध वसूली और विवादित प्रॉपर्टी के केस निपटाने के आरोप हैं। युवराज उस्ताद पर कुख्यात बदमाश जीतू ठाकुर की जेल के भीतर हत्या सहित हत्या के प्रयास के दो केस दर्ज हैं। इसके अलावा संगठित गिरोह के बदमाशों की सूची में भी उसे एसटीएफ ने शामिल किया था। प्रशासन ने युवराज पर दो बार रासुका भी लगाया था। युवराज को 2020 में क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था।

स्वाति काशिद पति युवराज उस्ताद के साथ।

माफिया अभियान में तोड़ा था निर्माण
इंदौर में चले माफिया अभियान के दौरान पुलिस ने युवराज के घर दबिश दी थी। लेकिन युवराज फरार हो गया था। बासद में बंसी प्रेस की चाल में इसका मकान प्रशासन और नगर निगम ने ध्वस्त कर दिया। बताते हैं कि कुछ साल से राजनीतिक संरक्षण के चलते उसने महाराष्ट्र में कामकाज फैला लिया है।

वसूली के भी लग चुके हैं आरोप
युवराज पर अपनी गैंग और बदमाशों के साथ मिलकर अवैध वसूली और विवादित संपत्तियों का निपटारा करवाने के भी आरोप हैं। बताते हैं कि अवैध वसूली के जरिए इसने अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया था। युवराज के गिरोह पर मारपीट, अवैध वसूली, हत्या, हत्या का प्रयास जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। ये परदेशीपुरा, बाणगंगा, हीरानगर, किशनगंज और महू में वारदात को अंजाम देते थे।

जीतू ठाकुर हत्याकांड से आया चर्चा में
23 जनवरी 2007 को महू की उपजेल में हत्या के आरोप में बंद जीतू ठाकुर की पांच लोगों ने जेल में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। आरोपितों ने हत्याकांड को अंजाम देने से पहले जेल में जीतू की रैकी भी करवाई थी। घटना वाले दिन जीतू खिड़की पर मुलाकात के लिए खड़ा था, उसी दौरान पांचों आरोपित भेष बदलकर वहां पहुंचे और दनादन गोली चलाना शुरू कर दिया। गोलीकांड में जीतू की मौत हो गई थी और एक जेल प्रहरी हरिप्रसाद घायल हो गया। पुलिस ने इस मामले में युवराज काशिद, अशोक सूर्यवंशी, अशोक मराठा, यशवंत उर्फ बबलू, विनोद उर्फ विक्की और विनोद उर्फ विक्की के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं में केस दर्ज किया। इसके अलावा 2005 में जीतू ठाकुर के साथ महेंद्र उपाध्याय की रेलवे पटरी के यहां हत्या का भी आरोप था। लेकिन यह आरोप भी साबित नहीं हो सका।

आरोप साबित नहीं हो सका
युवराज उस्ताद पर आरोप था कि उसने अपने पिता और मजदूर युनियन नेता विष्णु उस्ताद की वर्ष 2000 में हुई हत्या का बदला लेने के लिए जीतू ठाकुर की हत्या का षडयंत्र रचा था, लेकिन यह आरोप कोर्ट में साबित नहीं हो सका। तर्क रखा गया था कि घटना के दो दिन पहले से वह महाराष्ट्र की बीड़ जेल में एक अन्य मामले में बंद था। घटना के कई दिन बाद तक भी वह जेल में बंद रहा था। ऐसी स्थिति में वह हत्या के षडयंत्र में शामिल नहीं हो सकता।

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