जबलपुर
जबलपुर में भाजपा नेता प्रियांश विश्वकर्मा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। शुक्रवार को प्रियांश विश्वकर्मा के दफ्तर में गोली लगने से एमबीए की एक छात्रा घायल हो गई थी। वह एक निजी अस्पताल में भर्ती है। इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
छात्रा को गोली लगने की घटना शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे की बताई जा रही है। जिसके बाद घायल को अस्पताल ले जाने के बजाय बीजेपी नेता ने घटना छिपाने के लिए ऑफिस की सफाई की। उसने दफ्तर से सीसीटीवी की हार्ड डिस्क भी निकाल ली। फिर घायल लड़की को कार में लेकर 5 घंटे तक घूमता रहा। उसे अस्पताल में भर्ती कराकर फरार हो गया। पुलिस की शुरुआती जांच में गोली बीजेपी नेता के हाथ से ही चलने की बात सामने आ रही है। उसके दफ्तर में चार गोली चलने के निशान मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक संजीवनी नगर थाना क्षेत्र स्थित धनवंतरी चौकी के पास प्रियांश विश्वकर्मा का दफ्तर है। वह पेशे से रेत कारोबारी है। जमीन खरीदी-बिक्री का काम भी करता है।पुलिस के मुताबिक शुक्रवार रात करीब 9 बजे युवती को गोली लगने की बात पता चली, जिसके बाद पुलिस अस्पताल पहुंची।
अस्पताल में छात्रा को भर्ती कराया गया है।
दबाव में पहले युवती ने बोला झूठ, फिर बताया सच
गोली लगने से घायल हुई लड़की एमबीए की छात्रा है। वह बीजेपी नेता प्रियांश विश्वकर्मा की दोस्त बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि युवती के घरवालों को भी दोनों की दोस्ती के बारे में पता है। युवती ने पुलिस को रात में बताया था कि दोपहर करीब 1:30 बजे दफ्तर में बातचीत के दौरान प्रियांश पिस्टल दिखा रहा था। इसी बीच, अचानक गोली चल गई।
पुलिस ने युवती के परिवार वालों से भी बात की। पुलिस का कहना है कि रात में परिवार वाले भी केस दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं थे। यही नहीं, दूसरे दिन जब वापस से युवती से पूछताछ की गई, तब उसने हकीकत बताई। उसने पुलिस को बताया कि दोपहर में दोनों ऑफिस में बैठे थे। इसी दौरान, प्रियांश के हाथों से गोली चली। वह मौके पर ही बेहोश हो गई।
घटना के सबूत मिटाए, घायल को कार में लेकर घूमता रहा
जांच में पता चला कि बीजेपी नेता प्रियांश के हाथों से ही गोली चली। जिसके बाद उसने युवती को अस्पताल ले जाने के बजाय सबूत मिटाने की कोशिश की। ऑफिस में फैले खून के धब्बों को पूरी तरह साफ किया। वहां लगे सीसीटीवी की हार्ड डिस्क भी निकाली। इसके बाद घायल युवती को कार में लेकर गया। जांच में मौके पर फायर के चार निशान मिले हैं। पुलिस को पता चला है कि आरोपी प्रियांश की बंदूक भी लाइसेंसी नहीं है।
युवती गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।
घरवालों को भी दी झूठी जानकारी
पुलिस के मुताबिक प्रियांश ने युवती की मौसी को शुक्रवार करीब दो बजे फोन कर कहा कि युवती को उल्टियां हो रही हैं। अस्पताल ले जा रहा हूं। इसके बाद वह उसे स्मार्ट सिटी अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां से कुछ देर बाद मेट्रो अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। शाम तक वह घायल युवती को कार से शहर में घुमाता रहा। शाम करीब 6 बजे मेट्रो अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां युवती की मौसी भी पहुंच गई। उसने देखा, तो खून देखकर होश उड़ गए। प्रियांश ने युवती की मौसी को बताया कि ऑफिस में पिस्टल दिखाने के दौरान गोली चल गई। घबराने की बात नहीं है। ठीक हो जाएगी। आप पुलिस में रिपोर्ट मत करना। इसके बाद युवती के घरवालों को भी जानकारी दी गई।
परिजनों और अस्पताल पर बनाया दबाव
पुलिस के मुताबिक प्रियांश ने युवती के परिवार वालों पर इस कदर दबाव बनाया कि पहले वे कुछ बोलने को तैयार नहीं थे। वह परिजनों से कह रहा था कि वह ठीक हो जाएगी। रिपोर्ट मत कराओ। जब उन्हें पुलिस ने आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। स्मार्ट सिटी और मेट्रो अस्पताल वालों से भी भाजपा नेता ने सेटिंग कर रखी थी। आमतौर पर घटना के आधे घंटे में पुलिस को सूचना मिल जानी चाहिए थी, लेकिन भाजपा नेता के दबाव में दोनों ही अस्पताल मैनेजमेंट ने पुलिस को जानकारी नहीं दी।

