भोपाल।। दमोह विधानसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में प्रचार अभियान में तेजी पकड़ ली है। आमतौर पर जैसा हर चुनाव में होता है, इस बार भी दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस में अपनों से भितरघात का खतरा बरकरार है। दोनों दलों के नेता डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। इस दिशा में कांग्रेस की ओर से जहां दमोह जिले का स्थानीय नेतृत्व ज्यादा सक्रिय है तो भाजपा ने पूरी कमान प्रदेश नेतृत्व ने संभाल रखी है। दमोह से मिल रही खबरों के मुताबिक भाजपा की ओर से प्रचार अभियार में ज्यादा दिग्गज जुटे हैं, फिर भी भितरघात का खतरा कांग्रेस की तुलना में भाजपा में ज्यादा है। जिले का भाजपा कार्यकर्ता वरिष्ठ नेता जयंत मलैया के साथ नाइंसाफी को भुला नहीं पा रहा है। कांग्रेस में मुकेश नायक समर्थक घर बैठे हैं। इन दोनों नेताओं पर नजर ज्यादा है। कांग्रेस ने दमोह के सबसे अनुभवी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अजय टंडन को अपना प्रत्याशी बनाया है। दूसरे नंबर पर पार्टी की ओर से दावेदर थे मनु मिश्रा। मनु की ब्राह्मण समाज में अच्छी पकड़ है। उपचुनाव में यह वर्ग निर्णायक भी है। कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल करने में देर नहीं की और टंडन को प्रत्याशी घोषित करते हुए मनु मिश्रा को उनके स्थान पर दमोह जिला कांग्रेस का अध्यख बना दिया। खबर है कि मनु अब ईमानदारी से पार्टी का काम कर रहे हैं। हां, पार्टी नेतृत्व मुकेश नायक के मामले में फेल हो गया7 मुकेश के कभाई सतीश नायक कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। मुकेश भी पार्टी का काम न कर राजनीति से सन्यास की बात कर रहे हैं। भाजपा में जयंत के बाद भाव सिंह बने मुसीबत – भाजपा नेतृत्व ने बाहर से देखने में वरिष्ठ नेता जयंत मलैया को मना लिया है। उनका नाम स्टार प्रचारकों की सूची में भी शामिल कर लिया है, फिर भी भितरघात का ज्यादा खतरा भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी के खिलाफ ही है। पहला यह कि मलैय समर्थक अब भी असमंजस में हैं। दूसरा, भाजपा का आम कार्यकर्ता राहुल के साथ सहजता से तालमेल नहीं बना पा रहा है और तीसरा, राहुल लोधी के भाई भाव सिंह लोधी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतर आए हैं। भाव सिंह का कहना है कि वे पार्टी एवं परिवार के सम्मान एवं स्वाभिमान को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने चुनाव चिन्ह के तौर पर जूता और चप्पल की मांग की है। भाव सिंह का कहना है कि यदि ये चुनाव चिन्ह मिल गए तो जनता राहुल को आसानी से दगाबाजी का जवाब दे सकेगी। साफ है कि मुकाबला कांटे का होने के आसार हैं।
दमोह चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा भाजपा को भितरघात का खतरा

