कोझिकोड (केरल): UCC यानी समान नागरिक संहिता इस वक़्त चर्चा में हैं और राजनीतिक पार्टियों की तरफ से इस मुद्दे को लेकर तर्क-वितर्क जारी हैं। इसी कड़ी में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने शनिवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) एक राजनीतिक हथियार है जिसका इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज़ करने के लिए कर रही है।
वाम दल द्वारा UCC पर चर्चा के लिए आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एकरूपता का मतलब समानता नहीं है।
येचुरी ने कहा कि भेदभावपूर्ण कानूनों को पूरे समुदाय के परामर्श से ठीक किया जाना चाहिए, न कि ऊपर से UCC थोपकर। माकपा महासचिव ने कहा, ‘‘एकरूपता का मतलब समानता नहीं है। माकपा समानता के लिए खड़ी है जैसे कि भारत का संविधान समानता के लिए है…और यह वह समानता है जिसके लिए हमें लड़ने की ज़रूरत है…हममें से हर कोई पहले एक इंसान है और उसके बाद बाकी कुछ।’
माकपा नेता ने कहा कि 21वें विधि आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया था कि UCC ‘‘इस स्तर पर न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।’’ येचुरी ने कहा कि एकरूपता थोपने का कोई भी प्रयास हमारे सामाजिक ताने-बाने को तोड़ देगा।
येचुरी ने आरोप लगाया, ‘‘UCC एक नारा है जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज़ करने के लिए है। यह वास्तव में कोई एकरूपता हासिल करने के लिए नहीं है…बल्कि इसे भाजपा द्वारा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज़ करने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।’’
संगोष्ठी सरोवरम बायोपार्क के पास कालीकट ट्रेड सेंटर में आयोजित की गई। समस्त केरल जमीयत उलमा सहित मुस्लिम समुदाय के विभिन्न संगठन और ईसाई समुदायों के कई संगठन इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
सांसद एलामाराम करीम और जोस के. मणि, मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास, ए.के. ससींद्रन समेत विभिन्न पादरी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं।

