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ममता के किले में BJP बना पाएगी ‘छोटी सरकार’?

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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव इस बार खूनी रहे। वोटिंग के दिन 20 से ज्यादा हत्याएं हुईं। बंगाल पंचायत चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद से लेकर हुई चुनावी हिंसा में अब तक 39 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसा वाले अतिसंवेदनशील केंद्रों पर 10 जुलाई को फिर से वोटिंग हुई। अब बंगाल के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित हो रहे हैं। वोटो की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होगी। बंगाल में काउंटिंग के दौरान सभी मतगणना केंद्रों पर भारी केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के 19 जिलों के 696 केंद्रों पर सोमवार को फिर से वोटिंग हुई। यहां 69.85 प्रतिशत मतदान हुआ। इससे पहले 8 जुलाई को 61,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ था। कई स्थानों पर मतपेटियां लूट ली गईं या उनमें आग लगा दी गईं और उन्हें तालाबों में फेंक दिया गया, जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी। राज्य के ग्रामीण इलाकों की 73,887 सीट के लिए शनिवार को हुए मतदान में 5.67 करोड़ लोग मतदान करने के पात्र थे।

बीजेपी नेताओं से पहुंचने से पहले ही खुले स्ट्रॉन्ग रूम के ताले, हंगामा

कूच बिहार के दिनहाटा हाई सेकेंडरी स्कूल में मतगणना केंद्र पर जाने को लेकर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर भाजपा नेता अजय रॉय पर हमला किया। जिसके बाद यहां हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। टीएमसी पर गड़बड़ी का आरोप लगाया। अजय रॉय ने कहा कि खंड विकास अधिकारी ने हमें फोन कर कहा कि रात 10:00 बजे स्ट्रांगरूम खोला जाएगा। जब हम यहां आए तो देखा कि स्ट्रॉन्ग रूम पहले से ही खुला हुआ था…ऐसे में वे स्ट्रॉन्ग रूम कैसे खोल सकते हैं? सील को सभी पार्टियों को सूचित करते हुए खोला जाना चाहिए था… स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंच और सील का सत्यापन सभी पार्टियों के लिए पारदर्शी और समावेशी होना चाहिए।

हमारा सिर शर्म से झुक जाना चाहिए: टीएमसी नेता

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेताओं ने राजनीतिक हिंसा की संस्कृति खत्म करने की अपील करते हुए कहा है कि दो दिन पहले हुए पंचायत चुनाव में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौत को लेकर हर किसी को शर्मिंदा होना चाहिए। चुनावी हिंसा में जान गंवाने वालों में 11 लोग टीएमसी से जुड़े थे। टीएमसी विधायक एवं पूर्व पुलिस अधिकारी हुमायूं कबीर ने कहा, ‘एक बंगाली होने के नाते, मेरा सिर शर्म से झुक गया है, और इसके लिए हर किसी को शर्मिंदा होना चाहिए कि 2023 में भी हम हिंसा की इस संस्कृति पर रोक नहीं लगा सके हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमें आत्मावलोकन करना चाहिए कि हम इस संस्कृति को बंद क्यों नहीं कर सकते। हम किसी अन्य स्थान पर इतनी हिंसा नहीं देखते।’

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