अग्नि आलोक

*83 साल से घरों के लिए तरस रहे हैं: केस पर फैसला करेगा बॉम्बे हाई कोर्ट*

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मुंबई : आठ दशक से भी ज्यादा समय से अपनी जमीन से बेदखल होने का दर्द झेल रहे 29 लोगों की पीड़ा पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने उम्मीद का मरहम लगाया है। मामला महाराष्ट्र के पुणे जिले के कोपरे गांव के निवासियों के पुनर्वास से संबंधित है, जिन्हें 1942 में ब्रिटिश सरकार द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध के समय दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था। उनकी भूमि अधिग्रहीत कर ली गई थी।बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे जिले के कोपरे गांव के 29 निवासियों के पुनर्वास मामले में हस्तक्षेप किया है, जो 1942 से अपनी जमीन से बेदखल हैं। अदालत ने डिवेलपर से पूछा है कि इमारत का निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा और बचे हुए लाभार्थियों को कब तक फ्लैट मिलेंगे। अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2025 को होगी।

28 अगस्त 1951 को भूमि ग्रहण कानून के अंतर्गत गांव वालों की जमीन नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के लिए अधिग्रहीत कर ली गई। प्रभावितों के पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से जमीन आवंटित की गई थी।

बिल्डर ने बनाए कम घर

आवंटित जमीन पर डिवेलपर द्वारा बनाई जाने वाली इमारत में 235 लोगों को घर मिलने थे, लेकिन अब तक 206 लोगों को ही घर मिले हैं। घर न मिलने से परेशान कई लोगों ने राहत के लिए 2018 में बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब कोर्ट ने मार्च 2018 में अंतरिम राहत के तौर पर डिवेलपर को बिल्डिंग में किसी तीसरे पक्ष को घर बेचने से रोक दिया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा

हाल ही में चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एम.एस कर्णिक की बेंच के सामने पुनर्वास से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। बेंच ने कहा कि पुनर्वास के लाभार्थियों को अब तक पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है, इसलिए मामले में जारी अंतरिम आदेश को यथावत रखा जाता है। सुनवाई के दौरान बेंच ने डिवेलपर से पूछा कि वे निर्माण कार्य कब तक पूरा करेंगे और क्या वे उन 29 लाभार्थियों को फ्लैट देने को तैयार हैं? बेंच ने अगली सुनवाई के दौरान इन सवालों का जवाब देने कहा है। अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2025 को होगी।

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