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ब्रेकिंग समाचार – भाजपा को वरुण की जगह जितिन पर भरोसा, कंगना-अरुण गोविल भी लड़ेंगे चुनाव,छात्रसंघ चुनाव में वाम गठबंधन का कब्जा,सत्ता संग्राम के बीच सियासत के रंग : नेता भी खेलें, वोटर भी खेलें… होली के रंग बरसे, बरसे रे

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बसपा ने यूपी की 7 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतार दिए हैं। इसमें सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और संभल सीट शामिल है। बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार उतारने से इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।रूस में आतंकी हमले की अमेरिका ने की निंदा, कहा- ISIS का जड़ से खात्मा जरूरी,JNU छात्रसंघ चुनाव के आज जारी होंगे नतीजे,सात हजार से ज्यादा छात्रों ने की वोटिंग,मॉस्को में गोलीबारी कर 140 लोगों की जान लेने वाले चारों आतंकी गिरफ्तार, उधर AAP नेता और दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि पूरा INDIA गठबंधन 31 मार्च को रामलीला मैदान में 10 बजे रैली करने जा रहा है, जिसमें दिल्ली के साथ-साथ पूरे देश के लोगों, कार्यकर्ताओं, व्यापारी संगठनों, NGO सभी से आग्रह हैं कि रैली में शामिल हों। भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की 5वीं सूची जारी की।

JNU छात्रसंघ चुनाव में वाम गठबंधन का कब्जा, धनंजय अध्यक्ष और प्रियांशी बनीं महासचिव

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) चुनाव में वामपंथी गठबंधन को जीत मिली है। रविवार देर रात घोषित नतीजों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद पर वामपंथी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। महासचिव पद पर बापसा को जीत मिली है। शुक्रवार को हुए मतदान में 73 फीसदी मत पड़े थे।

वामपंथी गठबंधन में आइसा, एसएफआई, डीएसएफ व एआईएसएफ शामिल हैं। आइसा के धनंजय ने छात्रसंघ अध्यक्ष, एसएफआई के अवजीत घोष उपाध्यक्ष और एआईएसएफ के साजिद ने संयुक्त सचिव पर जीत हासिल की है। वहीं, बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) से पि्रयांशी आर्या महासचिव बनी हैं। खास बात यह है कि बापसा ने पहली बार महासचिव पद जीता है।  प्रियांशी उत्तराखंड के हल्द्वानी की रहने वाली हैं।

चुनाव में वोटों के आधार पर एबीवीपी दूसरा सबसे बड़ा छात्र संगठन बना है। जेएनयू छात्रसंघ चुनाव समिति के चेयरपर्सन शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, धनंजय को 2,598 वोट मिले हैं और उन्होंने एबीवीपी के उमेश को 922 वोट से हराया है। अवजीत घोष को 2,409 वोट मिले हैं और उन्होंने एबीवीपी की दीपिका को 927 वोट से हराया है। प्रियांशी को 2,887 वोट मिले और उन्होंने एबीवीपी के अर्जुन आनंद को 926 वोट से हराया है। वहीं, एआईएसएफ के 2,574 वोट हासिल करने वाले साजिद ने एबीवीपी के ही गोबिंद डांगी को 508 वोट से हराया है। साजिद यूपी के मऊ जिले के रहने वाले हैं। 

जीत के बाद लेफ्ट ने खेली खुशियों की होली
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के नतीजे लाल और नीले झंडे को सलाम करने वाले आए हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पद की सीट वामदल गठबंधन तो महासचिव बापसा को मिली है। सेंट्रल पैनल की सीटों पर रविवार देर शाम रुझान लेफ्ट की ओर जाते ही ढोल-डफली पर छात्रों ने लाल सलाम के नारे लगाने शुरू कर दिए। लेफ्ट छात्रों ने चुनाव नतीजे जारी होने से पहले ही होली खेलते हुए लाल सलाम के नारे लगाते हुए लाल झंडे को फहराना शुरू कर दिया था। मतगणना स्थल पूरा लाल झंडों और लाल सलाम से ही गूंज रहा था। 

जेएनयू इतिहास में उत्तराखंड की प्रियांशी ने दर्ज की जीत : लाल सलाम के बीच बापसा ने आंबेडकरवादी विचारधारा के साथ बहुजन नेताओं को भी याद किया। लाल के बीच नीला झंडा लहराती प्रियांशी ने जेएनयू  छात्रसंघ चुनाव इतिहास में अपना नाम सुनहरी अक्षरों में लिख दिया है। बापसा को पहली बार सेंट्रल पैनल में महासचिव पद उत्तराखंड के हल्द्वानी की प्रियांशी की जीत के साथ मिला है। बेशक लेफ्ट बापसा को अपना समर्थन देने की बात कर रहा था,लेकिन मतगणना स्थल पर बापसा अपने नीले झंडे के साथ अलग जीत का जश्न मना रहा था।  

पहले एबीवीपी फिर लेफ्ट को बढ़त
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव समिति ने  शनिवार रात को पहले वामदल गठबंधन की महासचिव स्वाति सिंह के नामांकन रद्द पर ऑल पार्टी बैठक बुलाई। इसमें इस पद के लिए दोबारा मतदान नहीं करने की जानकारी दी। इसके बाद शनिवार तीन बजे से सेंट्रल पैनल की मतगणना शुरू हुई थी। यह रात 10.40 तक चली। उसके बाद जेएनयू छात्रसंघ चुनाव समिति ने उसके नतीजे तैयार किए। जेएनयू छात्रसंघ चुनाव की रिपोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट को भी जानी है। चुनाव हाईकोर्ट की निगरानी में हो रहे थे। रविवार दोपहर तक संस्कृत, इंजीनियरिंग, साइंस समेत अन्य स्कूल की मतगणना शुरू होने पर रुझान चारों सीटों पर एबीवीपी के पक्ष में आ रहे थे। लेकिन शाम पांच बजे के बाद स्कूल ऑफ सोशल साइंस और स्कूल ऑफ इंटरनेशनल लैंग्वेज की मतगणना शुरू होते ही रुझान बदलने लगे, जोकि नतीजों में दिख रहा है। 

एबीवीपी ने वंदे मातरम और भारत माता के नारे लगाए
एबीवीपी ने जेएनयू छात्रसंघ सेंट्रल पैनल की चारों सीटों पर आखिरी तक कांटे की टक्कर दी। मतगणना आखिरी तीन घंटों में स्कूल ऑफ सोशल साइंस और स्कूल ऑफ लैंग्वेज की मतगणना शुरू होते ही रुझान धीरे-धीरे बदलने लगा। पहले अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के उमेश, महासचिव पद पर अर्जुन और सचिव पद पर गोबिंद सबसे आगे चल रहे थे। लेकिन इन दोनों स्कूलों की मतगणना शुरू होने पर वोट फीसदी वामदल के पाले में बढ़ने लगा। हालांकि एबीवीपी ने सेंट्रल पैनल की चारों सीट बेहद मामूली वोटों से हारी हैं। इसके बाद भी एबीवीपी के कार्यकर्ता शांतिप्रिय तरीके से मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाते रहे। 

सेंट्रल पैनल में हिंदी बेल्ट का दबदबा 
सेंट्रल पैनल के अध्यक्ष धनंजय, बिहार,  उपाध्यक्ष अवजीत, बिहार, महासचिव प्रियांशी, उत्तराखंड और सचिव साजिद उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इस प्रकार सेंट्रल पैनल पर हिंदी बेल्ट का दबदबा रहेगा। 

स्कूल काउंसलर के 18 पद एबीवीपी के नाम 
एबीवीपी ने बेशक सेंट्रल पैनल की चारों सीट बहुत अधिक अंतर से नहीं हारे हैं।  लेकिन स्कूल काउंसलर के 42 पदों में से 18 एबीवीपी के नाम रहे हैं। वोट फीसदी में एबीवीपी सेकेंड रनर अप संगठन बना है। वोट फीसदी में भी बढ़ोतरी हुई। यदि वामदल गठबंधन नहीं करते तो एबीवीपी को सेंट्रल पैनल से लेकर अन्य काउंसलर सीट भी आसानी से मिलती। एबीवीपी ने छह स्कूल में क्लीन स्वीप किया है। जबकि अन्य स्कूलों में कहीं एक, दो पर जीत हासिल की है।

इसमें स्कूल ऑफ संस्कृत एवं इंडिक स्टडीज के तीनों पद, स्कूल ऑफ नैनो साइंस का एकमात्र पद, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के चारों पद, स्कूल ऑफ कंप्यूटर सिस्टम एंड साइंसेज के सभी तीनों पदों पर एबीवीपी ने परचम लहराया है। इसके अलावा साइंस सेंटर, स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड सिस्टम साइंसेज, स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड इंटीग्रेटेड साइंसेज, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में भी अपना परचम लहराया है।

भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की 5वीं सूची जारी की।

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपनी पांचवीं सूची जारी कर दी है। इसमें 13 उम्मीदवारों के नाम का एलान किया गया है। पार्टी ने पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी का टिकट काट दिया है। उनकी जगह कांग्रेस से आए जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा मेनका गांधी का टिकट सुलतानपुर से बरकार रखा गया है।

गाजियाबाद से सांसद वीके सिंह का टिकट काटकर अतुल गर्ग को दिया है। इसके अलावा मेरठ से अरुण गोविल को उम्मीदवार बनाया है। अलीगढ़ से सतीश गौतम, बाराबंकी से राजरानी रावत, मुरादाबाद से सर्वेश सिंह, हाथरस से अनूप वाल्मीकि, बरेली से क्षत्रपाल सिंह, सहारनपुर से राघव लखनपाल, कानपुर से रमेश अवस्थी, बहराइच से अरविंद गोंड और बदायूं से दुर्विजय शाक्य को टिकट दिया गया। 

साइमन हैरिस बनने जा रहे आयरलैंड के सबसे युवा प्रधानमंत्री, बदल सकती है देश की तस्वीर

आयरलैंड की तस्वीर अब बदल सकती है, क्योंकि यहां लियो वराडकर के इस्तीफे के बाद देश की कमान युवा हाथों में सौंपी जा रही है। भारतीय मूल के साइमन हैरिस प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार हैरिस गवर्निंग फाइन गेल पार्टी के नए नेता के रूप में चुने जाने के बाद अब वह देश के सबसे कम उम्र के पीएम बनने के लिए तैयार हैं।भारतीय मूल के साइमन हैरिस प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार हैरिस गवर्निंग फाइन गेल पार्टी के नए नेता के रूप में चुने जाने के बाद अब वह देश के सबसे कम उम्र के पीएम बनने के लिए तैयार हैं। 

37 वर्षीय साइमन हैरिस ने कहा कि लियो वराडकर की जगह रविवार को पार्टी नेता नियुक्त किया जाना मेरे जीवन काफी  सम्मानजनक पल था। दरअसल, लियो वराडकर ने बुधवार को अप्रत्याशित रूप से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि पार्टी किसी अन्य नेता के तहत बेहतर ढंग से संचालित होगी।  

बता दें कि फाइन गेल के गठबंधन सहयोगियों के समर्थन के कारण, हैरिस को आयरलैंड गणराज्य के अब तक के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री के रूप में वोट दिया जाएगा जिसे ताओसीच के नाम से जाना जाता है, जब देश की संसद या ओरेचटास की अगली बैठक 9 अप्रैल को होगी।

ASI: केके मोहम्मद बोले- भोजशाला सरस्वती मंदिर था, हाईकोर्ट के फैसले और काशी-मथुरा की अहमियत पर कही यह बात

प्रसिद्ध पुरातत्वविद् केके मोहम्मद ने कहा कि मध्य प्रदेश के धार जिले में विवादास्पद भोजशाला या कमल मौला मस्जिद परिसर एक सरस्वती मंदिर था। बाद में इसे इस्लामी उपासाना स्थल में बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दोनों पक्षों को अदालत के फैसले का पालन करना चाहिए। उन्हें ऐसे स्थानों पर मतभेदों को दूर करने के लिए एकसाथ बैठने के अलावा उपासना स्थल अधिनियम, 1991 का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, मुसलमानों को भी मथुरा और काशी को लेकर हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मोहम्मद 1976-77 में अयोध्या में विवादित स्थल पर प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व वाली पहली खोदाई टीम का हिस्सा थे।

पुरातत्वविद् केके मोहम्मदने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मथुरा और काशी हिंदुओं के लिए वैसे ही हैं, जैसे मुस्लिमों के लिए मक्का और मदीना। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को हिंदुओं की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले में विवादित भोजशाला परिसर का सर्वेक्षण कर रहा है। हिंदुओं का मानना है कि यह देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है और मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद कहता है।

काशी-मथुरा को लेकर दी सीख
मोहम्मद ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मथुरा और काशी हिंदुओं के लिए वैसे ही हैं, जैसे मुस्लिमों के लिए मक्का और मदीना। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को हिंदुओं की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए। काशी भगवान शिव से जुड़ा है तो वहीं मथुरा भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है। इसे कहीं और स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। लेकिन मुस्लिमों के लिए यह सिर्फ एक मस्जिद है। चूंकि, यह सीधे तौर पर न तो पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी है और न ही उलियास से। इसलिए उन्हें कहीं और स्थानांतरित किया जा सकता है।

यह है भोजशाला विवाद
धार की भोजशाला राजा भोज ने बनवाई थी। जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार यह एक यूनिवर्सिटी थी, जिसमें वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। मुस्लिम शासक ने इसे मस्जिद में बदल दिया था। इसके अवशेष प्रसिद्ध मौलाना कमालुद्दीन मस्जिद में भी देखे जा सकते हैं। यह मस्जिद भोजशाला के कैंपस में ही स्थित है जबकि देवी प्रतिमा लंदन के म्यूजियम में रखी है। 

क्या है 1902 की रिपोर्ट में
हाईकोर्ट में आर्कियोलॉजिक्ल सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। वर्ष 1902 में लॉर्ड कर्जन धार, मांडू के दौरे पर आए थे। उन्होंने भोजशाला के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये खर्च करने की मंजूरी दी थी। तब सर्वे भी किया गया था। 1951 को धार भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। तब हुए नोटिफिकेशन में भोजशाला और कमाल मौला की मस्जिद का उल्लेख है। याचिका हिंदू फॉर जस्टिस ट्रस्ट की तरफ से लगाई गई थी। इसके अलावा छह अन्य याचिकाएं भी इस मामले में पूर्व में लगी हैं। ट्रस्ट की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने पक्ष रखते हुए बताया था कि 1902 में हुए सर्वे में भोजशाला में हिंदू चिन्ह, संस्कृत के शब्द आदि पाए गए हैं। इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच होना चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो। 

सत्ता संग्राम के बीच सियासत के रंग : नेता भी खेलें, वोटर भी खेलें… होली के रंग बरसे, बरसे रे

होली और सियासत के बीच का रिश्ता अनूठा है। मुगलिया शहंशाह और ब्रिटिश हुक्मरान तक इससे अछूते नहीं रहे। उत्सव का लुत्फ इन्होंने भी उठाया। आजादी के बाद होली दरबारों से निकलकर प्रधानमंत्री आवास तक पहुंची। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने होली पर अपने आवास तीन मूर्ति भवन का दरवाजा हर आम और खास के लिए खोल दिया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी होली दिल्ली वालों के साथ मनाई। चुनावी साल में होली और सियासत के और भी गहरे व दिलचस्प संयोग में पेश है दिल्ली में नेताओं की होली के मजेदार किस्से। सुना रहे हैं संतोष कुमार …

मुगलिया शहंशाह और ब्रिटिश हुक्मरान तक इससे अछूते नहीं रहे। उत्सव का लुत्फ इन्होंने भी उठाया। आजादी के बाद होली दरबारों से निकलकर प्रधानमंत्री आवास तक पहुंची। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने होली पर अपने आवास तीन मूर्ति भवन का दरवाजा हर आम और खास के लिए खोल दिया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की पत्नी जैकलीन को पीएम नेहरू ने लगाया था गुलाल
तीन मूर्ति भवन पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आवास था। तब होली के दिन इस भवन को आम लोगों के लिए खोल दिया जाता था। नेहरू गुलाल लगाते और लगवाते थे। अब की तरह सुरक्षा नियम सख्त न होने से हजारों लोग तीन मूर्ति के लॉन में पहुंचते और सभी के साथ नेहरू के साथ होली खेलते थे। एक दिलचस्प वाकया अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की पत्नी जैकलीन के साथ का है। तत्कालीन राजनयिक बीके नेहरू अपनी आत्मकथा ‘नाइस गाइज फिनिश सेकेंड’ में लिखते हैं, 1962 में कैनेडी की पत्नी जैकलीन नौ दिनों की निजी यात्रा पर भारत पहुंची थीं। जिस दिन उनकी यहां से वापसी थी, उसी दिन होली थी। जाने से पहले वह जवाहर लाल नेहरू को अलविदा कहने तीन मूर्ति भवन पहुंची। वह हमेशा की तरह फैशनेबल कपड़े पहनीं थीं। वहां मौजूद तत्कालीन अमेरिकी राजदूत गालब्रेथ ने कुर्ता-पायजामा पहन रखा था। बीके नेहरू के मुताबिक, नेहरू होली खेलने के शौकीन थे। जैसे ही जैकलीन तीन मूर्ति भवन पहुंची, उनके सामने चांदी की ट्रे में कई रंगों में गुलाल भरी छोटी-छोटी कटोरियां लाई गईं। नेहरू ने जैकलीन के माथे पर गुलाल का टीका लगाया। उन्होंने भी नेहरू के माथे पर टीका लगा दिया। इंदिरा गांधी ने भी यही किया। रंग गीले नहीं थे, इसलिए थोड़े पानी की मदद से जैकलीन का चेहरा और कपड़े दोनों साफ हो गए। नेहरू ने फिर अमेरिकी राजदूत गालब्रेथ के साथ पालम हवाई अड्डे पर जैकलीन कैनेडी को विदाई दी। देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के साथ ही प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी होली खेलते थे। तीन मूर्ति भवन में होली का यह सिलसिला 1963 तक चलता रहा। 1964 में नेहरू अस्वस्थ थे। उस साल होली वहां हुई नहीं। 27 मई, 1964 को उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री आवास में होली खेलना बंद हो गया।

गुजिया से स्वागत करती थीं इंदिरा गांधी 

इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री थीं, तब उनके एक सफदरजंग रोड स्थित सरकार आवास में भी होली खेली जाती थी और आने वाले सभी मेहमानों को गुजिया खिलाई जाती थी। उनके आवास पर होली बहुत शालीनता के साथ मनाई जाती थी। कहते हैं कि जब सोनिया गांधी पहली बार बहू बनकर उनके सामने आईं तो इंदिरा गांधी ने पूछा कि बहू तुम गुजिया बना लेती हो? अब बहू के चेहरे पर परेशानी के बादल छा गए।    बेचारी ने गुजिया का नाम तक नहीं सुना था। इस पर इंदिरा गांधी ने तेजी बच्चन को बुलाया और कहा उनको जिम्मेदारी दी कि वह उनकी बहू को गुजिया बनाना सिखाएं। वह इसमें कामयाब भी रहीं। आगे पहले राजीव गांधी और उनके बाद सोनिया गांधी के घर भी होली खेली जाती है। बहुत से कांग्रेसी उनके आवास पर पहुंचते। उस दिन गुजिया परोसी जाती।

ब वाजपेयी के साथ मोदी ने खेली होली

अटल बिहारी जब देश के प्रधानमंत्री बने, तो काफी लोग उन्हें गुलाल लगाने जाते थे। होली के दिन कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री के आवास पर जाकर उनको गुलाल लगा सकता था। वह खुद गुजिया, मिठाई व ठंडाई का इंतजाम करते थे। ढोल की थाप पर फाग गाती टोलियां प्रधानमंत्री आवास पहुंचती और सब मिलकर होली खेलते। एक वाकया मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ का भी है। बात 1999 की है। प्रधानमंत्री रहते हुए वाजपेयी ने अपने आवास पर होली मिलन कार्यक्रम रखा। इसमें सरकार में सहयोगियों के अलावा बीजेपी के तमाम बड़े नेता शामिल हुए थे। इसमें मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। ढोल की थाप पर तत्कालीन पीएम वाजपेयी और मौजूदा पीएम मोदी खूब थिरके और एक-दूसरे को रंग लगाया। मौके पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विजय गोयल भी मौजूद थे।

चांदनी चौक की होली, दिल्ली के नेता करते थे शिरकत

पुरानी दिल्ली की गलियों की होली मशहूर है। इसमें सत्ता पक्ष-विपक्ष से परे जाकर सभी एक-दूसरे से मिलकर होली की शुभकामनाएं देते थे।। मोती बाजार, गली परांठे वाली, मालोवाड़ा, भागीरथ पैलेस समेत दूसरे जगहों पर होली के दिन मस्ती होती थी। होली का एक दिलचस्प खेल ऊपरी मंजिल से टोपी खींचने का था। इसमें घरों की ऊपरी मंजिलों से डोरी लगाई जाती थी। डोरी में कपड़े सुखाने वाली चिमटी लगी होती। गमी में से गुजरते लोगों की इसके सहारे टोपियां ऊपर खींच ली जाती और बच्चे शोर मचाते हुए होली की बधाई देते।

आडवाणी के घर नेता बनते थे काला भूत

पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के यहां पानी से होली खेली जाती थी। उनके आवास पर इसमें पानी का हौद बनाया जाता और जो भी नेता उनके घर पहुंचता, उसको पानी में डुबो दिया जाता था। आडवाणी के यहां लोगों को काला भूत भी बनाया जाता था। इसमें चेहरे पर इस कदर काला रंग पोत दिया जाता था कि पहचान कर पाना मुश्किल होता। दूसरी तरफ राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी होली अलग अंदाज में मनाई। वह अपनी होली मानसिक तौर पर कमजोर बच्चों के साथ मनाते। इसमें रंग और गुलाल की जगह फूलों का लेन-देन होता। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर भी होली उत्साह के साथ मनाई जाती है। गुलाल और खाने-पीने का दौर चलता है। गाना-बजाना होता है। इस मौके पर काफी लोग उनके आवास पर जाकर होली का आनंद लेते हैं।

(नोट: पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, भाजपा नेता हरीश खुराना, प्रवीण शंकर कपूर, कांग्रेस नेता जेपी अग्रवाल, मतीन अहमद, समाजसेवी धर्मेंद्र गुप्ता, चांदनी चौक के कारोबारी जगमोहन गोटेवाल, अभिषेक गुप्ता से मिले इनपुट पर आधारित)

नवीन जिंदल बीजेपी में शामिल

कांग्रेस से इस्तीफा देकर नवीन जिंदल बीजेपी में शामिल हो गए हैं। बीजेपी हेडक्वॉर्टर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने उनका स्वागत किया। तावड़े ने कहा कि कुछ वक्त पहले ही नवीन जिंदल ने कांग्रेस से अपना इस्तीफा दिया है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की यात्रा में जुड़ रहे हैं। उद्योगपति हैं, कई क्षेत्र में काम किया है, एजुकेशनिस्ट के नाते उनकी पहचान है। उनका मैं बीजेपी में स्वागत करता हूं। उनके आने से खासकर हरियाणा और देश में बीजेपी ने सशक्त बनाने का जो अभियान चलाया है, उसमें वे एक साथी की तरह योगदान देंगे। तावड़े ने कहा कि हरियाणा में निर्दलीय विधायक और मंत्री रणजीत चौटाला ने भी बीजेपी जॉइन की है, और मैं उनका भी स्वागत करता हूं।नवीन जिंदल ने कहा कि मेरे जीवन का यह अहम दिन है। मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि बीजेपी से जुड़कर पीएम मोदी के नेतृत्व में देश के प्रति अपना योगदान दे सकूं। विकसित भारत का सपना जो मोदी जी ने सबको दिखाया है, मैं भी उसमें शामिल होकर, उनकी नीतियों पर चलकर अपना योगदान देना चाहता हूं।

अजमेर ज़िले में पुष्कर के वराह घाट पर विदेशी पर्यटक भी होली का आनंद उठा रहे हैं।

31 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटेगा पूरा विपक्ष

इंडिया अलायंस की प्रेस कांफ्रेंस में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट होकर विरोध कर रहा है। आचार संहिता के समय आम आदमी पार्टी के कार्यालय को सील कर दिया गया। शरथ चंद्र रेड्डी से 60 करोड़ रूपये बीजेपी को मिले। आज पूरा विपक्ष एकजुट हो रहा है क्योंकि देश को खतरा है। कांग्रेस पार्टी का खाता सील कर दिया। इस देश के अंदर न तो कोई आंदोलन की गुंजाइश होगी और न विरोध प्रदर्शन की। 31 मार्च को पूरी दिल्ली रामलीला मैदान में होगी। महारैली होगी।

ईडी की कस्टडी से सीएम केजरीवाल ने जारी किया पहला आदेश

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने ईडी की कस्टडी में रहते हुए पहला आदेश जारी किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केजरीवाल ने यह आदेश जल मंत्रालय को लेकर जारी किया है। केजरीवाल ने सरकार के मंत्रियों को एक नोट भेजा है। वह आदेश क्या है, इसपर मंत्रा आतिशी सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताएंगी।

जयपुर की केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग, 5 लोगों की हुई मौत

राजस्थान के जयपुर के बस्सी में एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई है। आग की चपेट में आकर 5 लोगों की मौत हो गई। जबकि दो लोग घायल हो हैं। बता दें कि आग सूचना मिलते ही दमकल की नौ गाड़ियां मौके पर पहुंच गई और आग को बुझाने की कोशिश कर रही हैं।

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