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ब्रेकिंग न्यूज़:गुनाह सदाकत खान का, मुस्लिम हॉस्टल के सभी स्टूडेंट बेघर

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भारत और बांग्लादेश के बीच पहली एनर्जी पाइपलाइन का आज उद्घाटन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसकी शुरुआत करेंगे। इससे एक साल में 10 लाख टन हाई-स्पीड डीजल को भेजा जा सकता है।इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का 131 साल पुराना मुस्लिम हॉस्टल 11 दिन से बंद है पीएम मोदी सुबह 11 बजे नई दिल्ली में ग्लोबल मिलेट्स (श्री अन्न) सम्मेलन का उद्घाटन भी करेंगे। वहीं, तोशखाना मामले में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इस्लामाबाद की अदालत से पहले लाहौर हाई कोर्ट में पेश होंगे।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का 131 साल पुराना मुस्लिम हॉस्टल 11 दिन से बंद है। इसी के कमरा नंबर-36 से पुलिस ने एक वकील सदाकत खान को उठाया था। पुलिस का कहना है कि सदाकत माफिया अतीक अहमद का गुर्गा है और 24 फरवरी को हुई उमेश पाल की हत्या में शामिल था।

सदाकत की गिरफ्तारी के बाद से हॉस्टल सील है। यूनिवर्सिटी में एग्जाम चल रहे हैं, लेकिन स्टूडेंट्स रेलवे स्टेशन या ग्राउंड में रात काट रहे हैं। उन पर ‘क्रिमिनल’ का ठप्पा लग गया है और शहर में कोई किराए पर कमरा भी नहीं दे रहा।

हॉस्टल को क्रिमिनल्स का अड्डा घोषित कर दिया गया है। यहां के 107 कमरों में 193 बच्चे रह रहे थे। 13 मार्च से एग्जाम शुरू हो चुके हैं, पर छात्रों के पास रहने की जगह नहीं है। किताबें भी हॉस्टल के कमरों में बंद हैं। सवाल यही है कि क्या सच में मुस्लिम हॉस्टल क्राइम का अड्डा बना हुआ था? क्या सभी छात्रों को इसकी सजा मिलनी चाहिए।

कमरे खाली कराए जाने के बाद छात्रों ने हॉस्टल के बाहर ही बिस्तर लगा लिया। ऐसे करीब 100 बच्चे हैं, जिन्हें कहीं रहने के लिए जगह नहीं मिली।

हाॅस्टल में सन्नाटा, कमरों पर सीलबंद ताले
जवाब की तलाश में मैं पहुंचा प्रयागराज के कटरा। यहां इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की साइंस फैकल्टी के मेन गेट पर आजकल ताला लगा है। दाहिनी तरफ कुछ कदम चलने पर मुस्लिम हॉस्टल का बोर्ड नजर आने लगता है। गेट खुला है, सामने खाली मैदान है। मैदान के आखिर में एक बोर्ड लगा है, जिस पर जंग बहादुर मौलाना समीउल्ला खान गार्डन लिखा है।

इसी बोर्ड पर लिखा है कि मौलाना समीउल्ला खान ने इस हॉस्टल की स्थापना 1892 में की थी। इसी के बगल से मुस्लिम हॉस्टल शुरू हो जाता है। पुराने जमाने की शानदार बनावट वाली बिल्डिंग, इसके बंद लोहे के दरवाजों पर सरकारी सील वाले ताले लटके हैं। तारों पर कपड़े सूख रहे हैं, कमरों के बाहर साइकिल और कूलर पड़े हैं।

मुस्लिम हॉस्टल में कुल 110 कमरे हैं, इनमें से 107 में स्टूडेंट रहते थे। फिलहाल सभी सील कर दिए गए हैं।

देखने से पता चलता है कि सदाकत के पकड़े जाने के बाद छात्र जल्दबाजी में निकल गए। 6 मार्च को भी पुलिस ने हॉस्टल खाली करने, सामान समेटने के लिए छात्रों को टाइम नहीं दिया। उन्होंने थोड़ा-बहुत सामान लिया और हॉस्टल छोड़ दिया। बंद कमरों में किसी की किताबें, तो किसी का एडमिट कार्ड छूट गया।

एक दरवाजे पर हॉस्टल प्रशासन का नोटिस भी लगा है। इस पर लिखा है ‘5 मार्च, 2023 को हॉस्टल प्राधिकरण की बैठक में फैसला किया गया है कि वर्तमान हालात को देखते हुए 6 मार्च, 2023 को सभी छात्र अपने सामान के साथ हॉस्टल खाली कर दें।’

यह नोटिस मुस्लिम हॉस्टल के वार्डन डॉ. इरफान अहमद खान की तरफ से लगाया गया है। हॉस्टल प्रशासन के मुताबिक, हॉस्टल सील करने के लिए SDM के साथ पुलिस और PAC के जवान आए थे। हॉस्टल प्रबंधन ने फिलहाल तय किया है कि बच्चों को ईद तक घर भेज दिया जाए।

हॉस्टल प्रशासन की तरफ से लगाया गया नोटिस, जिसमें लिखा है कि हॉस्टल ईद तक बंद रहेगा।

हॉस्टल पर पुलिस तैनात नहीं, सुरक्षा का हवाला देकर खाली कराया
मुस्लिम हॉस्टल खाली कराने के पीछे प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था, लेकिन मैं वहां पहुंचा तो वहां सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात ही नहीं थी। मैंने आसपास के हॉस्टल में रह रहे स्टूडेंट से बात की, पता चला कि मुस्लिम हॉस्टल के सभी छात्र घर नहीं लौटे हैं।

हॉस्टल में रहने वाले छात्र डीएम ऑफिस के बाहर बैठे हैं। इन छात्रों की 13 मार्च से परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। कुछ स्टूडेंट ऐसे भी हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास रहने की जगह ही नहीं है।

मैं डीएम ऑफिस पहुंचा तो वहां छात्रों का एक ग्रुप दिखा। 40 से 50 बच्चे कंधे पर बैग टांगे भटक रहे थे। मैंने उनसे बात करने की कोशिश की, तो वे कैमरे पर आने से इनकार करने लगे। बोले- ‘पहले ही हमारा इतना नुकसान हो चुका है, अब ये देख लेंगे तो शायद कभी हॉस्टल में रहने ही न दें।’

हॉस्टल खाली करने के लिए छात्रों को वक्त भी नहीं मिला, ऐसे में उन्होंने जरूरी सामान लिया और निकल गए।

इसी बीच एक लड़का गुस्से में बोलने लगा- ‘मीडिया ने हमारे हॉस्टल को ऐसे दिखाया, जैसे वहां सिर्फ बुरे लोग ही रहते हैं। हॉस्टल बंद हुआ है, तब से हम लोग कभी फुटपाथ पर तो कभी रेलवे स्टेशन पर सो रहे हैं । आप पूछ रहे हैं कि क्या दिक्कत है। क्या बताऊं क्या दिक्कत है। आप बता दो कहां रहें?’

लड़का गुस्से में बोलते हुए वहां से चला गया। बातचीत में पता चला कि हॉस्टल के वार्डन इरफान अहमद खान की डीएम के साथ मीटिंग चल रही है। छात्रों के मुताबिक, उन्हें मीडिया से दूर रहने की हिदायत भी दी गई है। इसी बीच इरफान मीटिंग से निकले, लेकिन तेजी से कार में बैठकर निकल गए।

छात्र नेता भी हॉस्टल बंद करने के विरोध में
छात्रसंघ भवन के गेट से घुसते ही फीस बढ़ाने के विरोध में सालों से धरना दे रहे स्टूडेंट नजर आते हैं। यहां मेरी मुलाकात छात्र नेता अजय यादव सम्राट से हुई । अजय पैरों में जूते और चप्पल नहीं पहनते हैं। उन्होंने प्रण लिया है कि जब तक फीस बढ़ोतरी वापस नहीं होगी, तब तक वह पैरों में कुछ नहीं पहनेंगे।

अजय कहते हैं, ‘मुस्लिम हॉस्टल को पूरी तरह से बंद करने के पीछे की वजह समझ से बाहर है। इससे पढ़ने वाले बच्चों का नुकसान हो रहा है। ये सही है कि हॉस्टल में रह रहे अपराधियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई हो, लेकिन इससे छात्रों का नुकसान नहीं होना चाहिए।’

अजय आगे कहते हैं- ‘इस हॉस्टल में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और कई प्रदेशों के छात्र रहते हैं। उनके पास शहर में कहीं और रहने का ठिकाना नहीं है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के इस रवैये की वजह से छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।’

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जबसे ब्रिटेन देश के लोकतंत्र और मोदी सरकार के खिलाफ बयान दिए हैं तभी से वह सत्ता पक्ष के निशाने पर हैं। आज भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी कह दिया कि राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी ही होगी। वहीं कांग्रेसी नेताओं ने सीधे तौर पर कह दिया है कि राहुल माफी नहीं मांगेंगे। शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कांग्रेस सांसद शशि थरूर जब पहुंचे तो उनसे भी राहुल को लेकर सवाल किया गया। माफी वाले सवाल पर थरूर ने कहा कि राहुल गांधी ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जिसपर उन्हें माफी मांगने की जरूरत है।

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