भारतीय वायु सेना का लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस आज एक परिचालन प्रशिक्षण उड़ान के दौरान जैसलमेर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया है। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जननायक जनता पार्टी (JJP) के सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार दिखाई देने के बाद मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हरियाणा भाजपा अध्यक्ष नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ के राजभवन में हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी इस दौरान मौजूद रहे।
SBI ने चुनावी बॉन्ड का डेटा चुनाव आयोग को सौंपा,
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मंगलवार शाम को वर्किंग आवर खत्म होने से पहले भारतीय चुनाव आयोग को चुनावी बॉन्ड की तमाम डिटेल्स सौंप दी। अब आयोग को 15 मार्च की शाम पांच बजे तक बैंक द्वारा दी गई इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। ताकि यह जानकारी आम हो सके। मामले में आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि चुनावी बॉन्ड का डेटा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भारतीय चुनाव आयोग को सौंप दिया है। अभी इस पर काम किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि एसबीआई की ओर से चुनावी बॉन्ड का जो विवरण आयोग को दिया गया है। वह काफी रॉ है। इसे वेबसाइट पर अपलोड करने के लायक बनाया जाएगा। तभी इसे अपलोड किया जाएगा। हालांकि, आयोग की तरफ से केवल यही जानकारी दी गई कि एसबीआई ने चुनावी बॉण्ड का डेटा उन्हें सौंप दिया है। इसके अलावा आयोग की तरफ से आधिकारिक रूप से इस संबंध में कोई जानकारी शेयर नहीं की गई कि क्या आयोग इस डेटा को 15 मार्च की शाम पांच बजे तक ही अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा या इससे पहले भी।
इस मामले में 15 फरवरी और 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को चुनावी बॉन्ड की जानकारी 12 मार्च तक आयोग को सौंपने के आदेश दिए थे। आदेशों की ना फरमानी करने पर बैंक के उपर कोर्ट की अवहेलना का मामला बन सकता था। इस बात को देखते हुए बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार ही 12 मार्च की शाम कामकाजी समय समाप्त होने से पहले यह सारा डेटा आयोग को सौंप दिया। अब आगे आयोग का काम है कि वह 15 मार्च तक बैंक द्वारा दिए गए डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दे।
महिलाओं की मुखर आवाज, अभद्र टिप्पणी पर विधायक से लिया लोहा, अब वायनाड से राहुल को देंगी चुनौती
केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की उम्मीदवार एनी राजा सिर्फ वामपंथी खेमे में बड़ा नाम नहीं हैं, बल्कि महिलाओं के हक में उठने वाली उनकी मुखर आवाज को देशभर में पहचाना जाता है। सीपीआई महासचिव डी राजा की पत्नी होने के साथ ही वह पार्टी की महिला इकाई भारतीय राष्ट्रीय महिला फेडरेशन (एनएफआईडब्ल्यू) की महासचिव भी हैं। 2022 में जब केरल में सत्तारूढ़ उनकी पार्टी के गठबंधन साथी सीपीआई-एम के नेता एमएम मणि ने एक महिला विधायक पर अभद्र टिप्पणी की, तब भी एनी विरोध से नहीं चूकीं। मणि ने विधायक केके रमा को कहा था कि उन्हें तो विधवा होना ही था। एनी ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा था कि एक महिला की पीड़ा का सदन में मजाक बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।
भाजपा की कट्टर आलोचक एनी राजा का कहना है कि अगर कांग्रेस को वाम दलों के साथ मिलकर भाजपा से लड़ना है, तो राहुल गांधी को किसी ऐसी सीट से लड़ना चाहिए, जहां वे किसी भाजपाई उम्मीदवार को चुनौती दें। वायनाड सीट को सीपीआई के लिए छोड़ देना चाहिए।
1960 के दशक में केरल के कन्नूर जिले के इरती गांव के ईसाई परिवार में जन्मीं एनी के पिता थॉमस कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। एनी का बचपन नन बनने की शिक्षा प्राप्त करते हुए स्थानीय चर्च की सेवा व कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई करते बीता। वह 1980 के दशक से ही छात्र राजनीति में सक्रिय हो गई थीं।
भाजपा की कट्टर आलोचक एनी राजा का कहना है कि अगर कांग्रेस को वाम दलों के साथ मिलकर भाजपा से लड़ना है, तो राहुल गांधी को किसी ऐसी सीट से लड़ना चाहिए, जहां वे किसी भाजपाई उम्मीदवार को चुनौती दें। वायनाड सीट को सीपीआई के लिए छोड़ देना चाहिए।
सीपीआई के राजा-रानी…
1990 में कन्नूर में सीपीआई महिला मोर्चा की सचिव रहने के दौरान एनी की मुलाकात डी राजा से हुई। बाद में दोनों विवाह बंधन में बंध गए। पार्टी में दोनों को शुरुआत से ही सीपीआई का राजा-रानी कहा जाने लगा था। आज, असल में पार्टी इन्हीं दोनों के हाथों में है। इनकी बेटी अपराजिता भी पार्टी की छात्र इकाई में अहम पद पर हैं।
जताए इरादे, पेश करेंगी कठिन चुनौती
केरल में कांग्रेस सत्ताधारी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के खिलाफ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। यहां सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पाई। इस बीच, सीपीआई ने राहुल गांधी के खिलाफ एनी के रूप में प्रमुख चेहरे को उतारकर अपने इरादे जता दिए हैं। वह इस सीट पर नूरा कुश्ती नहीं, बल्कि राहुल को हराने के लिए लड़ेगी। राहुल 2019 में अमेठी में भाजपा की स्मृति इरानी से हार चुके हैं।
किडनी के इलाज में पारंपरिक फॉर्मूला प्रभावी, कुछ हफ्ते में असर, परीक्षण के बाद निकला निष्कर्ष
भारतीय शोधकर्ताओं ने किडनी के इलाज में पारंपरिक फॉर्मूला को असरदार पाया है। एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा है कि पारंपरिक फॉर्मूला से बनी नीरी केएफटी दवा का मरीजों में कुछ ही सप्ताह बाद असर दिखाई देने लगता है। 14 मार्च को विश्व किडनी दिवस के अवसर पर भारतीय शोधकर्ताओं का यह अध्ययन ईरान के मेडिकल जर्नल एविसेना जर्नल ऑफ मेडिकल बायोकेमिस्ट्री ने प्रकाशित किया है, जिसका संचालन चर्चित हमादान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन साइंसेज कर रहा है।बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान के शोधकर्ताओं ने किडनी बीमारी से ग्रस्त रोगियों पर एक चिकित्सा अध्ययन किया है। इसमें शोधकर्ताओं ने नीरी केएफटी दवा को शामिल कर परीक्षण शुरू किया।
गोखरू, वरुण, कासनी, मकोय, पलाश का मिश्रण फायदेमंद
शोधकर्ताओं ने बताया कि पुनर्नवा, गोखरू, वरुण, कासनी, मकोय, पलाश, गिलोय औषधियों का मिश्रण किडनी रोगियों के लिए फायदेमंद हैं। इस पारंपरिक फॉर्मूले को लेकर हाल ही में भारतीय शोधकर्ताओं ने नीरी केएफटी की खोज की, जिसे इस अध्ययन में शामिल किया। अध्ययन में पाया कि 15-15 मरीजों के दोनों समूह में अनेक सकारात्मक प्रभाव हैं। दोनों समूहों के मरीजों के सीरम क्रिएटिनिन में कमी दर्ज की गई। दूसरे ईजीएफआर यानी ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन दर में भी सुधार पाया गया। इसमें बढ़ोतरी सुधार का संकेत है। यह दोनों पैरामीटर किडनी की कार्य प्रणाली में सुधार के संकेत हैं।
भारत में लगातार बढ़ रहा बोझ
शोधकर्ताओं के अनुसार, समय पर पहचान न होने से क्रोनिक किडनी डिजीज यानी सीकेडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है। वैश्विक स्तर पर यह करीब 13 फीसदी तक है। भारत में 10 में से नौ सीकेडी रोगी महंगे उपचार का भार नहीं उठा सकते। इसलिए सस्ते विकल्प के तौर पर पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक तथ्यों का पता लगाने के लिए यह अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन औषधियों के सेवन से मरीजों में अरुचि और थकान में भी कमी पाई गई।
भारत में होता है दुनिया का सबसे महंगा चुनाव, 10 लाख करोड़ खर्च करेंगे सभी राजनीतिक दल
चुनावों के दौरान राजनीतिक दल पानी की तरह पैसा बहाते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी भारत का चुनाव दुनिया में सबसे महंगा होने वाला है। यदि ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनावों का एक बार का खर्च जोड़ दें, तो यह 10 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाता है। कई बड़े राज्यों का बजट मिलाने पर भी इतनी रकम नहीं होती। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के मुताबिक, अगर सारे चुनाव एक हफ्ते में कराए जाएं और पार्टियां चुनावी अनुशासन का पालन करें, तो तीन से पांच लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। हालांकि, इसकी संभावना नहीं है। राव के मुताबिक 2024 के लोकसभा चुनाव में 1.20 लाख करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों के प्रचार अभियान का होगा।सुरसा के मुख की तरह दिनोंदिन बढ़ता जा रहा चुनावी खर्च पिछले चुनाव में 550 अरब रुपये तक पहुंच गया। पिछले पांच चुनावों की ही तुलना करें, तो यह खर्च पांच गुना से अधिक बढ़ चुका है। 1999 में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
विधानसभा चुनावों पर सर्वाधिक खर्च
देशभर में 4,500 विधानसभा सीटें हैं। इनका एक बार चुनाव कराने का खर्च तीन लाख करोड़ रुपये आता है। महानगरपालिका की कुल 500 सीटें हैं। इनके चुनाव पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च आता है। जिला परिषद की 650, मंडल की 7,000 और ग्राम पंचायत की 2.5 लाख सीटों पर चुनाव में करीब 4.30 लाख करोड़ खर्च होते हैं।
70 लाख रुपये तक खर्च की सीमा
लोकसभा चुनाव में एक उम्मीदवार 50 लाख से 70 लाख रुपये के बीच खर्च कर सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस राज्य से चुनाव लड़ रहा है। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम (खर्च सीमा 54 लाख) को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में एक प्रत्याशी प्रचार पर अधिकतम 70 लाख खर्च कर सकता है। दिल्ली के लिए यह सीमा 70 लाख और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 54 लाख है। विधानसभा चुनाव के लिए अधिकतम खर्च सीमा 20 लाख से 28 लाख रुपये के बीच है।
पिछले पांच चुनावों में पांच गुना तक बढ़ा चुनावी खर्च
सुरसा के मुख की तरह दिनोंदिन बढ़ता जा रहा चुनावी खर्च पिछले चुनाव में 550 अरब रुपये तक पहुंच गया। पिछले पांच चुनावों की ही तुलना करें, तो यह खर्च पांच गुना से अधिक बढ़ चुका है। 1999 में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
विस चुनाव में 1760 करोड़ की नकदी जब्त
वर्ष 2023 में 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों पर चुनाव आयोग की पेश रिपोर्ट के अनुसार के इस दौरान 1760 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती की गई है। यह रकम पिछली बार की जब्ती से 7 गुना ज्यादा है। तेलंगाना में सर्वाधिक 659.2 करोड़, राजस्थान में 650.7, मध्य प्रदेश में 323.7, छत्तीसगढ़ में 76.9 और मिजोरम में 49.6 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं।
3.70 लाख से ज्यादा बिके यात्री वाहन, यूटिलिटी गाड़ियों की मांग से फरवरी में बढ़ी थोक बिक्री
यूटिलिटी गाड़ियों की मजबूत मांग के दम पर देश में यात्री वाहनों की थोक बिक्री फरवरी, 2024 में सालाना आधार पर 10.75 फीसदी बढ़कर 3,70,786 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। फरवरी, 2023 में कुल 3,34,790 यात्री वाहन बिके थे। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने थोक बाजार में कुल 1,91,435 यूटिलिटी वाहन बिके। यह आंकड़ा एक साल पहले की समान अवधि में बिके 1,38,238 यूटिलिटी वाहनों की तुलना में 38 फीसदी अधिक है।
फरवरी में कारों की बिक्री में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान कारों की बिक्री फरवरी, 2023 के 1,42,201 से घटकर 1,15,937 इकाई रह गई। सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन ने कहा, एसयूवी की बाजार पर पकड़ बरकरार है।
कारों की बिक्री में 18 फीसदी गिरावट
फरवरी में कारों की बिक्री में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान कारों की बिक्री फरवरी, 2023 के 1,42,201 से घटकर 1,15,937 इकाई रह गई। सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन ने कहा, एसयूवी की बाजार पर पकड़ बरकरार है। फरवरी में यात्री वाहनों, दोपहिया व तिपहिया की बिक्री बढ़ी। हालांकि, वाणिज्यिक वाहनों में थोड़ी गिरावट रही।
दोपहिया वाहनों में 35 फीसदी बढ़ोतरी
- पिछले माह दोपहिया वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 35 फीसदी बढ़कर 15,20,761 इकाई पहुंच गई। फरवरी, 2023 में 11,29,661 दोपहिया वाहन बिके थे।
- स्कूटर की बिक्री 31.78 फीसदी बढ़कर 5,15,340 इकाई पहुंच गई।
- मोटरसाइकिल बिक्री 37.12 फीसदी बढ़कर 9,64,362 इकाई पहुंच गई।
- फरवरी में 54,584 तिपहिया वाहन बिके, जो सालाना आधार पर 8.34 फीसदी ज्यादा है।
- वैन की बिक्री 11,489 इकाई से बढ़कर 12,147 इकाई पहुंच गई।
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का उबोन रत्चथानी में आखिरी दिन, दो लाख से अधिक भक्तों ने किया सम्मान
थाईलैंड के उबोन रत्चाथानी में मंगलवार को हजारों भक्तों ने भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों के पवित्र अवशेषों को सम्मान दिया। प्रदर्शनी के अंतिम दिन पवित्र अवशेषों के दर्शन करने के लिए भक्त उबोन रत्चाथानी में वाट महा वानाराम पहुंचे। भारतीय दूतावास ने मौजूदा प्रदर्शनी के दौरान थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन और उनकी सरकार के निरंतर समर्थन की सराहना की और कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और गहरे होंगे।
थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘आज दो लाख से अधिक श्रद्धालु उबोन रत्चाथानी में वाट महा वानारम में भारत के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए पहुंचे। बता दें कि पवित्र अवशेषों की क्राबी की यात्रा से पहले कल उबोन रत्चाथानी में प्रदर्शनी का आखिरी दिन है।’
भारतीय दूतावास ने पोस्ट में आगे लिखा, ‘भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महा मोग्गलाना के पवित्र अवशेष पूर्वोत्तर थाईलैंड के एक शहर उबॉन रत्चथानी पहुंचे। ये अवशेष 10 से 13 मार्च तक वाट महा वानारम में रखे रहेंगे।’ इससे पहले, पवित्र अवशेष चियांग माई शहर में थे, जहां हजारों भक्त दर्शन के लिए एकत्र हुए थे।
भारतीय दूतावास ने थाईलैंड के समर्थन को सराहा
वहीं, भारतीय दूतावास ने मौजूदा प्रदर्शनी के दौरान थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन और उनकी सरकार के निरंतर समर्थन की सराहना की और कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और गहरे होंगे।
बता दें कि इससे पहले पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए 23 फरवरी से 3 मार्च तक लगभग दस लाख श्रद्धालु बैंकॉक में एकत्र हुए थे, जिसको लेकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और थाईलैंड के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंध की सराहना की थी।
थाईलैंड के चार शहरों में 25-दिवसीय प्रदर्शनी में रखे गए अवशेषों को बैंकॉक में रहने के दौरान सनम लुआंग रॉयल पैलेस मैदान में एक विशेष रूप से निर्मित मंडप में सार्वजनिक पूजा के लिए रखा गया था।
क्राबी भेजे जाएंगे अवशेष
बैंकॉक, चियांग माई, उबोन रतचथानी शहरों में प्रदर्शनी के बाद, अवशेषों को क्राबी भेजा जाएगा। इसके बाद 14-18 मार्च तक क्राबी में इनकी प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। पवित्र अवशेषों को 19 मार्च को थाईलैंड से उनके संबंधित घरों तक वापस ले जाया जाएगा, जिससे थाईलैंड में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध प्रदर्शनी का समापन होगा।
कीटनाशकों से फूड-चेन में घुले खतरनाक रसायन, डायबिटीज से कैंसर तक…DNA पर भी असर, जानिए क्या है मिथाइलेशन
पैदावार बढ़ाने के लिए कीटनाशकों के भारी उपयोग के चलते खाद्यान्न व फलों के माध्यम से लोगों के शरीर में खतरनाक रसायन पहुंच रहे हैं। इससे शरीर की अंदरूनी संरचना में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इससे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, तंत्रिका प्रणाली के विकारों से लेकर कैंसर जैसी गैर संचारी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कीटनाशक के अत्यधिक इस्तेमाल से इंसान में आनुवांशिक बदलाव भी आ रहे हैं, जो हमारे क्रमिक विकास में बाधक हैं।जीएसवीएम और सीएसए के हालिया अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार, कीटनाशक के बढ़ते इस्तेमाल से डायबिटीज से लेकर कैंसर जैसे रोग हो रहे हैं। यही नहीं, इसका असर डीएनए पर भी पड़ रहा है। कानपुर देहात और लखीमपुर के 200 किसानों के डीएनए में हानिकारक असर दिखा है।
गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) और चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय (सीएसए) का हालिया अध्ययन इसी ओर इशारा करता है। मेडिकल कॉलेज के बाॅयोकेमिस्ट्री विभाग और सीएसए के कृषि वैज्ञानिकों की एक टीम ने लखीमपुर और कानपुर देहात के 10 गांवों में क्रमश: फसलों और उन्हें उगाने वाले दर्जनों किसानों पर कीटनाशकों के असर का अध्ययन किया।
जीएसवीएम बॉयोकेमिस्ट्री विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद नारायण सिंह ने बताया कि प्रभाव को आंकने के लिए जब किसानों के स्वास्थ्य को जांचा गया तो करीब 200 किसानों के डीएनए में मिथाइलेशन के प्रमाण मिले। यह प्रक्रिया वैसे तो सामान्य है, पर अनियंत्रित हो जाए तो खतरनाक साबित हो सकती है। इससे जींस पर प्रतिकूल असर पड़ता है और उपरोक्त बीमारियां घेर सकती हैं।
2019 में शुरू हुआ था अध्ययन, सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट
डॉ. आनंद समेत अन्य विशेषज्ञ खुलकर कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन इन किसानों के मामले में नतीजे चिंता में डालने वाले प्रतीत हो रहे हैं। 2019 में शुरू हुए इस अध्ययन की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। सीएसए के कृषि वैज्ञानिक सुहैल अहमद के अनुसार, किसान फसलों में बिना किसी बीमारी के लक्षण के ही कीटनाशकों का भारी इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ जो स्वयं इनका प्रयोग नहीं करते, वे भी चपेट में आ रहे हैं। दरअसल, उनके आसपास के खेतों में इनका इस्तेमाल हो रहा है और छिड़काव के वक्त हवा-पानी के रास्ते ये इनके खेतों और श्वांस तत्र के जरिये शरीर के भीतर भी पहुंच रहे हैं।
औद्योगिक अपशिष्ट के रूप में प्रकृति को कर रहे हैं दूषित
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला कहते हैं कि गांव के मरीजों में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, वे इसके लिए कीटनाशकों के उपयोग के साथ खाद्यान्नों में भारी धातुओं के घुलमिल जाने को भी बड़ा कारण बताते हैं, जो औद्योगिक अपशिष्ट के रूप में प्रकृति को दूषित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गॉल ब्लैडर कैंसर के बढ़ते मामलों की वजह जानने के लिए इस नजरिये से एक अलग अध्ययन किया जा रहा है।
जानिए क्या है मिथाइलेशन
शरीर में होने वाला एक केमिकल रिएक्शन जिसमें मिथाइल समूह के अणु डीएनए, प्रोटीन या अन्य अणुओं में जुड़ जाते हैं। इससे शरीर के भीतर अणुओं का मूल कामकाज प्रभावित हो सकता है। मनुष्य के जीन के डीएनए सीक्वेंस के मिथाइलेशन से जीन में प्रोटीन का उत्पादन बाधित हो सकता है और विकास की गति पर असर पड़ सकता है।
हो सकती हैं यह बीमारियां या विकार
डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी रोग, पार्किंसंस, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे तंत्रिका प्रणाली के विकार, बच्चों का मंदबुदि्ध होना, शरीर विकसित न हो पाना जैसे विकार, कैंसर आदि।
छोटे दलों का साथ… फायदे की बात; यूपी से दिल्ली का रास्ता बिना सहयोगियों संभव नहीं दिखता
विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर बना कांग्रेस नीत इंडिया यहां उम्मीद के हिसाब से आकार नहीं ले पाया है। प्रदेश में विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व सपा मुखिया अखिलेश यादव के हाथ है, जिसमें कांग्रेस जूनियर सहयोगी की भूमिका में है। इंडिया में शामिल आम आदमी पार्टी भी सपा-कांग्रेस गठबंधन में शामिल नहीं हो पाई है। बसपा को जोड़ने का प्रयास फिलहाल सफल होता नजर नहीं आ रहा है। अपना दल (कमेरावादी) सपा के साथ है। आजाद समाज पार्टी भी साथ आ सकती है। बसपा सुप्रीमो मायावती लगातार अकेले चुनाव लड़ने की बात दोहरा रही हैं। 2019 से 2024 के बीच पांच सालों की बात करें तो गठबंधन की सियासत में प्रदेश में बड़ा उतार-चढ़ाव आया है। बदले हालात में कौन गठबंधन प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के जातीय जंजाल को भेद कर अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाता है, इसपर सबकी नजरें हैं। 2019 के चुनाव की बात करें तो भाजपा गठबंधन को 80 में 64, सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को 15 और कांग्रेस को एक सीट से संतोष करना पड़ा था।
यहां जाति और क्षेत्रवाद की भावना प्रबल है। अलग-अलग जाति व समाज में दबदबा रखने वाले क्षेत्रीय दलों की पौ बारह है। सूबे में यह लोकसभा चुनाव पिछले विधानसभा चुनाव की तरह भाजपा व मुख्य विपक्षी दल सपा के इर्दगिर्द घूमता नजर आने लगा है।
अपना दल (एस)
नेता : अनुप्रिया पटेल राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री
2014 के लोकसभा चुनाव से ही भाजपा के साथ हैं। मजबूत सहयोगी बनी हुई हैं। साथ से कुर्मी वोट बैंक मजबूत होता है।
पिछला चुनाव : दो सीटें जीतीं
अब सीटें मिलीं : 02 फिलहाल सीट के नाम का इंतजार। एक पर पार्टी मुखिया व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का नाम तय माना जा रहा है। दूसरे पर चेहरे का इंतजार।
राष्ट्रीय लोकदल
नेता : जयंत चौधरी राष्ट्रीय अध्यक्ष
2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन और 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-सुभासपा व आरएलडी गठबंधन में शामिल थे। अब भाजपा के साथ।
पिछला चुनाव : एक भी सीट नहीं जीते।
अब सीटें मिलीं : 02
बिजनौर और बागपत। प्रत्याशी तय।
सुभासपा
नेता : ओम प्रकाश राजभर अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री यूपी
2017 के विस चुनाव में भाजपा गठबंधन से चुनाव लड़े, पार्टी ने चार सीटें जीतीं। योगी सरकार में मंत्री बने। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ हो लिए। पार्टी ने 6 सीटें जीतीं। चुनाव बाद फिर भाजपा में आ गए। मंत्री बन गए।
पिछला चुनाव : 39 सीटों पर लड़े, एक भी नहीं जीत सके।
अब सीट मिली : 01
घोसी। बेटे अरविंद राजभर प्रत्याशी।
निषाद पार्टी
नेता : संजय निषाद राष्ट्रीय अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री यूपी
2019 में भी भाजपा के साथ थे। अब भी हैं।
पिछला चुनाव : संजय निषाद के बेटे प्रवीण संतकबीरनगर से भाजपा के सिंबल पर लड़े व सांसद बने।
अब : भाजपा के टिकट पर संतकबीरनगर से प्रवीण निषाद फिर लड़ेंगे।
विपक्षी गठबंधन… सपा कांग्रेस में समझौता
कांग्रेस
मल्लिकार्जुन खरगे
राष्ट्रीय अध्यक्ष
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं किया था। अकेले चुनाव लड़ी थी। पार्टी अपने तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट भी हार गई थी।
पिछला चुनाव : एक सांसद। सिर्फ सोनिया गांधी रायबरेली से जीतीं।
सीटें जिन पर चुनाव लड़ रहे : 17
सपा
अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष
2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन था। इस बार बसपा-रालोद बाहर हो चुके हैं।
पिछला चुनाव : 5 सांसद जीते।
कुल सीटें जिन पर चुनाव लड़ रहे : 63
2019 : महागठबंधन नहीं रोक सका था मोदी का विजय रथ
2019 के पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा और रालोद ने गठबंधन किया था। इसे महागठबंधन करार दिया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों ने भविष्यवाणी शुरू कर दी थी कि मोदी के विजय रथ को यह गठजोड़ यूपी में रोक देगा। लेकिन, ऐसा हो नहीं सका।
भाजपा गठबंधन ने 64 सीटें जीतकर परचम लहरा दिया था। यह महागठबंधन 15 सीटों पर सिमट गया था। बसपा को 10 और सपा को 5 सीटें मिली थीं। रालोद का खाता नहीं खुल पाया था।
- कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में एकला चलो के सिद्धांत पर चुनाव लड़ा था। नतीजा ये हुआ कि राहुल अपनी पैतृक व परंपरागत सीट अमेठी भी भाजपा की स्मृति जूबिन इरानी से हार गए। कांग्रेस को सिर्फ रायबरेली सीट से संतोष करना पड़ा था। इस बार बसपा-रालोद गठबंधन से बाहर हैं। सपा-कांग्रेस ने हाथ मिलाया है।
इसलिए छोटे दलों से होती है गठबंधन की जरूरत
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. गोपाल प्रसाद कहते हैं कि यूपी के लिहाज से देखें तो भाजपा (वोट शेयर-49.98 प्रतिशत), सपा (18.11 प्रतिशत) और बसपा (19.43 प्रतिशत) जैसी पार्टियां तमाम लोकसभा सीटों पर लाख में वोट हासिल करती हैं। लेकिन कई सीटें 5-10-20-25 हजार वोटों से हार जाती हैं। सिर्फ अपने जातियों की राजनीति करने वाले छोटे दल चुनाव जीतने वाला आधार तो पैदा नहीं कर पाते। पर, ये पार्टियां 5 से 25 हजार और कई लोकसभा सीटों पर आबादी के हिसाब से 40-50 हजार वोट का आधार बनाने में सक्षम होती हैं।
- यूपी में कांग्रेस (2019 में वोट शेयर 6.36 प्रतिशत ) भी छोटे दलों वाली हैसियत में ही है। छोटे दल जिस बड़े दल के साथ जुड़ जाते हैं, उनका समर्थक वोटर उनके साथ चला जाता है। बड़े दलों की कुछ वोटों से हारने की स्थिति वाली सीटें पक्की हो जाती हैं। बदले में छोटे दल अपने बड़े आधार वाले क्षेत्रों में बड़ी पार्टियों से कुछ सीटें मांगकर अपना आधार बढ़ाने का प्रयास करते हैं। हालांकि छोटे दलों की मदद से बड़े दल ज्यादा सीटें जीतते हैं। इसीलिए भाजपा व सपा ने अपने से कम वोट शेयर वाले दलों से हाथ मिलाया है।
6 साल पुराने हापुड़ मॉब लिंचिंग केस में 10 को उम्रकैद
हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा में गोकशी के शक में मुस्लिम पशु व्यापारी की हत्या के मामले में मंगलवार को स्थानीय कोर्ट ने 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर 59-59 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। दो आरोपित नाबालिग हैं। उनका मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में विचाराधीन है।

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर विजय चौहान ने बताया कि हापुड़ के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अपर जिला न्यायाधीश पॉक्सो श्वेता दीक्षित ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बझैड़ा निवासी राकेश, हरिओम, युधिष्ठिर, रिंकू, करनपाल, मनीष, ललित, सोनू, कप्तान और मांगेराम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।चौहान ने बताया कि 16 जून 2018 को कासिम अपने साथी समयद्दीन के साथ गांव जा रहे थे। रास्ते में भीड़ ने उन्हें गोकशी के शक में बुरी तरह पीट दिया था। इसमें कासिम की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस का घायल को लटकाकर अस्पताल ले जाने का एक विडियो सामने आया था। मामला गर्माने के बाद यूपी पुलिस ने ट्विटर पर माफी मांगी थी। लिखा था कि हापुड़ की घटना के लिए हमें खेद है और जांच की जाएगी। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया था।
कासिम के छोटे भाई नदीम ने बताया कि वह पिलखुवा के बझैड़ा गांव में रहते हैं। उनके बड़े भाई भैंस और बकरियों के कारोबारी थे। 16 जून को किसी ने फोन कर कासिम को पशु खरीदने के लिए बुलाया था। बाद में पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई। दोषियों के परिवारों ने फैसले पर असंतोष जताते हुए हाई कोर्ट जाने की बात कही है।
समयद्दीन पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट
हमले में घायल समयद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उचित कार्रवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ रेंज के आईजी को मॉब लिंचिंग और घृणा अपराधों से संबंधित तहसीन पूनावाला फैसले में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामले की जांच में तेजी आई थी।
CAA की अधिसूचना जारी होने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने कहा, “अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, सिक्ख, बौध, जैन धर्म के जितने लोग प्रताड़ना सह रहे हैं और अपने धर्म के सम्मान के लिए भारत आए हैं उन्हें नियमानुसार नागरिकता दी जाए, भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकल्प को फलीभूत किया है… निश्चित रूप से ममता बनर्जी जानबूझकर वोट बैंक की राजनीति के लिए कुछ समुदायों को भड़काएंगी लेकिन हर हिंदुस्तानी जानता है कि पीएम मोदी का ये निर्णय न्यायसंगत है…”
एसबीआई ने चुनाव आयोग को सौंपा चुनावी चंदे का डेटा
सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इलेक्शन कमीशन को इलेक्टोरल बांड से संबंधित तमाम डेटा सौंप दिया है। एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को इस बाबत आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की 30 जून तक की मोहलत को खारिज कर दिया था।
कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई असम के जोरहाट से चुनाव लड़ेंगे। नकुलनाथ मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ेंगे। राहुल कस्वा राजस्थान के चुरू से और वैभव गहलोत राजस्थान के जालौर से चुनाव लड़ेंगे। फूल सिंह बरैया मध्य प्रदेश के भिंड से चुनाव लड़ेंगे।