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ब्रेकिंग समाचार – टीएमसी ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची,पीलीभीत में वरुण गांधी के रुख पर टिकीं सबकी निगाहें,रिमांड के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज

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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने बिहार के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी प्रमुख जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में नामित किया गया है।भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व विधायकों को हिमाचल प्रदेश, गुजरात के उपचुनावों में बनाया उम्मीदवार,दिल्ली आबकारी नीति घोटाला: बीआरएस नेता के. कविता को न्यायिक हिरासत में भेजा गया,‘आप’ का प्रदर्शन: पंजाब के मंत्री, सोमनाथ भारती समेत कई नेता हिरासत में लिए गए,,असम: सर्बानंद सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया,जेल में बंद माफिया राजनेता मुख्तार अंसारी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती, उधर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नोटिस जारी कर दिलीप घोष से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर की गई टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।

लोकसभा चुनाव 2024: भाजपा ने बिहार के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी की। प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी प्रमुख जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में नामित किया गया है।

लोकसभा चुनाव की वजह से जामिया ने एंट्रेंस एग्जाम की बदली तारीखें

लोकसभा चुनाव को देखते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने नए सेशन के दाखिले के लिए 12 कोर्स के एंट्रेंस एग्जाम की तारीखें बदली हैं। एमए इकनॉमिक्स, एमए ऐप्लाइड साइकलॉजी, इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (रेगुलर/सेल्फ फाइनैंस), एमबीए/एमबीए (सेल्फ फाइनैंस)/एमबीए (आंत्रप्रेन्योरशिप और फैमिली बिजेनस) (सेल्फ फाइनेंस) के एंट्रेंस 9 जून को होगा। बीएड, एमए- ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, एमए ऐरेबिक का एंट्रेंस अब 10 जून को होगा। एमए सोशल वर्क, एमए इंग्लिश, बीएससी एरोनॉटिक्स (मैकेनिकल/एवियोनिक्स), एमसीए और एमए हिस्ट्री का एंट्रेंस अब 11 जून को होगा।

दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने किया था क्लीन स्वीप, पांच उम्मीदवारों ने विरोधियों को दी थी मात

दूसरे लोकसभा चुनाव से दिल्ली में क्लीन स्वीप होने की शुरुआत हुई थी। इस चुनाव में सभी चारों लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। पहले लोकसभा चुनाव में तीन लोकसभा क्षेत्रों में चार में तीन उम्मीदवार कांग्रेस के जीते थे, लेकिन दूसरे चुनाव में चार लोकसभा क्षेत्रों में पांचों उम्मीदवार कांग्रेस के चुने गए थे। इस तरह कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था।

इस चुनाव में दिल्ली में लोकसभा क्षेत्रों की संख्या तीन से बढ़ाकर चार की गई थी। दिल्ली शहर क्षेत्र का विभाजन करके चांदनी चौक क्षेत्र बनाया गया था।  वहीं, दिल्ली शहर क्षेत्र का नाम बदलकर दिल्ली सदर किया गया था, मगर बाहरी दिल्ली क्षेत्र से पहले चुनाव की भांति दूसरे चुनाव में भी दो सांसद चुनने की परंपरा कायम रही थी। इस बार भी इस सीट पर सामान्य श्रेणी के साथ-साथ एक अनुसूचित जाति श्रेणी के सांसद चुने गए थे।

तीन उम्मीदवारों का खाता भी नहीं खुला था
दूसरे चुनाव में तीन उम्मीदवारों का खाता भी नहीं खुल सका था। इन उम्मीदवारों में एक निर्दलीय उम्मीदवार वह था जिसने पहले लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमाई थी। इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के दौरान मनमोहन सहगल दूसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सहगल को एक भी वोट नहीं मिला था। उनकी भांति दिल्ली सदर सीट से चुनाव लड़े जगन नाथ नाम के दो उम्मीदवारों का भी खाता नहीं खुल सका था।

दूसरे चुनाव का परिणाम
क्षेत्र                जीते               दल
नई दिल्ली   सुचेता कृपलानी    कांग्रेस
चांदनी चौक  राधा रमन           कांग्रेस
दिल्ली सदर  चौ. ब्रह्मप्रकाश        कांग्रेस
बाहरी दिल्ली  सीके नायर          कांग्रेस
                 नवल प्रभाकर       कांग्रेस

दूसरे चुनाव से दलबदल की हुई थी शुरुआत
इस चुनाव से दिल्ली में नेताओं ने दलबदल की शुरुआत हुई थी। पहले चुनाव में नई दिल्ली क्षेत्र से किसान मजदूर प्रजा पार्टी से चुनाव जीती सुचेता कृपलानी ने दूसरा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरी और  पहले चुनाव की तरह दूसरी बार भी जीतने में कामयाब हुई। कांग्रेस ने बाद में उनको यूपी का सीएम भी बनाया था।

30 उम्मीदवारों ने आजमाई थी किस्मत
उधर, इस चुनाव में नेताओं के साथ-साथ मतदाताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। लिहाजा चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हुआ था। इस चुनाव में 30 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी, उनमें 17 उम्मीदवार निर्दलीय थे। इसके अलावा मत प्रतिशत में भी इजाफा हुआ था। इस चुनाव में 61 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। वहीं, पहले चुनाव की तरह दूसरे चुनाव में भी उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला नहीं हुआ था। चारों क्षेत्रों में पांचों उम्मीदवार आसानी से जीत गए थे। भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार तीन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन बाहरी दिल्ली क्षेत्र में उसके उम्मीदवार काफी पीछे रह गए थे।

30 में से 21 उम्मीदवारों की जमानत हुई थी जब्त
दूसरे चुनाव में 30 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, इनमें से 21 उम्मीदवार जमानत बचाने लायक भी मत प्राप्त नहीं कर सके थे। इन उम्मीदवारों में जनसंंघ व सीपीआई के उम्मीदवार भी शामिल थे। बाहरी दिल्ली क्षेत्र में हार का सामना करने वाले सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।

गृह मंत्री शाह बोले- जम्मू-कश्मीर से अफस्पा हटाने पर करेंगे विचार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल अधिनियम को हटाने पर विचार करेगी। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार वहां से सैनिकों को वापस बुलाने और कानून व्यवस्था को अकेले जम्मू-कश्मीर पुलिस पर छोड़ने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता था लेकिन अब वे विभिन्न ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं।  

क्या होता है एएफएसपीए
बता दें, एएफएसपीए (AFSPA) सशस्त्र बलों के उन जवानों को अधिकार देता है, जो अशांत क्षेत्रों में काम कर रहे हैं कि अगर “सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव” के लिए उन्हें जरूरत पड़ती है तो वे तालाशी, गिरफ्तारी और गोली चला सकतें हैं। सशस्त्र बलों के संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए AFSPA के तहत किसी क्षेत्र या जिले को अशांत घोषित किया जाता है।

फारूक-महबूबा को आतंकवाद पर बोलने का अधिकार नहीं
साक्षात्कार के दौरान, शाह ने विपक्षी नेता फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधा। शाह ने कहा कि दोनों नेताओं पर आतंकवाद पर बोलने का अधिकार नहीं है। जितनी फर्जी मुठभेड़ें उनके समय में हुईं हैं, इतनी कभी नहीं हुईं हैं। पिछले पांच वर्षों में एक भी फर्जी मुठभेड़ नहीं हुई। बल्कि फर्जी मुठभेड़ों में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हम कश्मीर के युवाओं के साथ बातचीत करेंगे न कि उन संगठनों के साथ जिनकी जड़ें पाकिस्तान में हैं। 

आतंकियों की कमर तोड़ रही है सरकार
शाह ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए 12 संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। 36 व्यक्तियों को आतंकवादी के रूप में नामित किया है। आतंक के वित्तपोषण को रोकने के लिए 22 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 150 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। उन्होंने कहा कि 90 संपत्तियां भी कुर्क की गईं और 134 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।

टीएमसी ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। इसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान सहित अन्य हस्तियां और नेता शामिल हैं।

स्टार प्रचारकों की सूची
ममता बनर्जी, सुब्रता बख्शी, अभिषेक बनर्जी, सुदीप बंदोपाध्याय, प्रो. सौगाता रे, शोभान देब चट्टोपध्याय, कल्याण बनर्जी, मॉलोय घातक, मानस रंजन भूनिया, अरूप विश्वास, बर्त्या बासु, फिरहाद हाकिम, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सताब्दी रॉय, दीपक अधिकारी, ममता ठाकुर, मनोज तिवारी, पार्थ भौमिक, डॉ. शशि पंजा, कुनाल घोष, प्रतिमा मंडल और यूसुफ पठान सहित अन्य लोग मौजूद हैं।

सीटों का एलान कर चुकी है टीएमसी
10 मार्च को कोलकाता में आयोजित रैली में टीएमसी ने बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने नामों की घोषणा की। टीएमसी प्रत्याशियों के नाम इस प्रकार हैं…

कूच बिहार से जगदीश चंद्र बसुरिया, अलीपुरद्वार से प्रकाश चिक बराइक, जलपाईगुड़ी से निर्मल चंद्र रॉय, दार्जीलिंग से गोपाल लामा, रायगंज से कृष्ण कल्याणी, बालूरघाट से बिप्लब मित्रा, मालदा उत्तर से प्रसून बनर्जी, मालदा दक्षिण से शहनवाज अली रेहान, जंगीपुर से खलीलुर्रहमान, बेहरमपुर से यूसुफ पठान, कृष्णापुर से महुआ मोइत्रा, राणाघाट से मुकुट मणी अधिकारी, मुर्शीदाबाद से अबुताहेर खान, जादवपुर से सयानी घोष, डायमंड हार्बर से अभिषेक बनर्जी, आसनसोल से शत्रुघ्न सिन्हा, रायगंज से कृष्णा कल्याणी।

बनगांव से विश्वजीत दास, बशीरहाट से हाजी नुरुल इस्लाम, कलकत्ता से सुदीप बनर्जी, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, हुगली से रचना बनर्जी, तामलुक से देवांशु भट्टाचार्य, घाटल से दीपक अधिकारी (देव), झारग्राम से पद्मश्री कालीपद सोरेन, बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती, बीरभूम से शताब्दी रॉय, विष्णुपुर से सुजाता मंडल खान, श्रीरामपुर से कल्याण बनर्जी। दमदम से सौगत रॉय, बैरकपुर से पार्थ भौमिक, बरसात से काकोली घोष, जॉयनगर से प्रतिमा मंडल, मथुरापुर से बापी हलदर, कोलकाता दक्षिण से माला रॉय, कोलकाता उत्तर से सुदीप बंधोपाध्याय, उलूबेरिया से सजदा अहमान, आरामबाग से मिताली बाग, पुरूलिया से शांतिराम महतो, मेदिनीपुर से जून मालिया, कांथी से उत्तम बारिक।

रिमांड के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज

शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा। केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा बुधवार सुबह 10:30 बजे इस मामले की सुनवाई करेंगी। केजरीवाल ने 23 मार्च को हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। केजरीवाल ने हालांकि तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी गई। अरविंद केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। 22 मार्च को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 28 मार्च तक ईडी की हिरासत में भेज दिया था।

ईडी ने दावा किया है कि केजरीवाल दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति घोटाला मामले में मुख्य साजिशकर्ता थे। मामले में ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 17 अगस्त, 2022 को 2021-22 के लिए दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति में कथित अनियमितताओं के संबंध में दर्ज एक मामले से शुरू हुई है।

सीबीआई मामला 20 जुलाई, 2022 को उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा की गई शिकायत पर दर्ज किया गया था। यह आरोप लगाया गया है कि नीति के निर्माण के चरण में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य अज्ञात और अनाम निजी व्यक्तियों/संस्थाओं सहित आप नेताओं द्वारा एक आपराधिक साजिश रची गई थी।

यह आरोप लगाया गया है कि साजिश के तहत नीति में जानबूझकर छोड़ी गई या बनाई गई खामियां शामिल थीं। ये खामियां कथित तौर पर निविदा प्रक्रिया के बाद कुछ शराब लाइसेंसधारियों और साजिशकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए थीं। इस मामले में सिसौदिया और आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पहले से ही जेल में हैं। 15 मार्च 2024 को ईडी ने मामले में भारत राष्ट्र समिति के विधायक और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी के.कविता को भी गिरफ्तार किया था।

पीलीभीत में वरुण गांधी के रुख पर टिकीं सबकी निगाहें, आज साफ होगी तस्वीर

पीलीभीत में भाजपा से टिकट कटने के बाद अब सबकी निगाहें वरुण गांधी के रुख पर टिकी हैं। मामले में दो दिन से वरुण खेमे की चुप्पी से अटकलों का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि टिकट घोषित हुए बिना नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही चार सेट नामांकन पत्र खरीदने वाले वरुण गांधी ने रविवार को टिकट कटने के बाद से मंगलवार तक कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वरुण गांधी का टिकट कटने के बाद से चर्चाओं का दौर जारी है। वरुण पीलीभीत का चुनावी मैदान छोड़ेंगे या कोई और फैसला लेंगे, इस पर आज स्थिति स्पष्ट हो सकती है। क्योंकि पीलीभीत में आज नामांकन का अंतिम दिन है।

सोशल मीडिया से लेकर पूरे क्षेत्र तक में कोई वरुण के पक्ष में तो कोई भाजपा के पक्ष में चर्चा कर रहा है। विपक्षी नेता भी वरुण के मुद्दे पर भाजपा को घेरने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि बुधवार को नामांकन के अंतिम दिन तस्वीर साफ होगी कि वरुण मैदान छोड़ेंगे या कोई और कदम उठाएंगे। रहस्य की यह स्थिति मेनका गांधी को सुल्तानपुर से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद और गहराई है। 

बहरहाल, जानकारों का कहना है कि वरुण अगर पीलीभीत सीट छोड़ते हैं तो यहां से वर्ष 1989 से चले आ रहे उनके परिवार के सियासी रिश्ते पर ब्रेक लग जाएगा। वहीं अगर पार्टी से बगावत कर बुधवार को नामांकन दाखिल करते हैं तो सीधा असर पीलीभीत से छह बार की सांसद रहीं व सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने जा रहीं उनकी मां मेनका गांधी पर भी पड़ सकता है।

35 साल पुराना है इस सीट से रिश्ता
वरुण गांधी के परिवार का पीलीभीत से रिश्ता 35 साल पुराना है। वर्ष 1989 में जनता दल से मेनका गांधी ने राजनीति की शुरुआत की थी और तराई के लोगों ने मेनका को सिर-आंखों पर बैठाया और तोहफे में जीत दी। हालांकि दो साल बाद 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के परशुराम गंगवार से मेनका हार गईं थीं। 

वर्ष 1996 में मेनका ने फिर जनता दल से चुनाव लड़कर अपनी हार का बदला लिया था। फिर वर्ष 1998 व 1999 में वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीतती रहीं। वर्ष 2004 में मेनका ने भाजपा का दामन थामा और फिर जीत हासिल की। वर्ष 2009 में उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत बेटे वरुण गांधी के हवाले कर दी और खुद सुल्तानपुर चली गईं। 

वोटरों ने भी वरुण को हाथोंहाथ लिया और वह रिकॉर्ड मतों से जीते। राजनीति में युवाओं की पहली पसंद बन गए। वर्ष 2014 में मेनका फिर पीलीभीत से लड़कर जीतीं और वरुण सुल्तानपुर से जीते। बाद में 2019 में फिर पीलीभीत से सांसद बने। मेनका यहां से छह बार व वरुण दो बार सांसद रहे। 1996 से अब तक इनका परिवार ही लगातार काबिज है।

किसी वीआईपी सीट से उतारे भी जा सकते हैं वरुण
अपनी ही सरकार को कई बार कठघरे में खड़ा करने वाले वरुण का टिकट काटने के बाद भी भाजपा उनसे रिश्ता कायम रख सकती है। चर्चा है कि पार्टी उन्हें अवध क्षेत्र की किसी वीआईपी सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है। हालांकि इस बारे में ठोस कोई कुछ नहीं बोल रहा। सिर्फ वरुण व भाजपा की एक-दूसरे के बारे में कोई टिप्पणी न आने से इसकी संभावना भी कुछ लोग जता रहे हैं। ऐसे में भाजपा और वरुण दोनों के लिए बुधवार का दिन खास है।

  

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