अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स से चिढ़े हुए हैं। उन्होंने बुधवार को ब्रिक्स देशों के खिलाफ अपनी टैरिफ स्ट्रैटजी रणनीति का ब्योरा देते हुए कहा कि यह समूह अमेरिकी डॉलर के खिलाफ काम कर रहा है, और दावा किया कि कई देश इससे बाहर निकल रहे हैं।
क्या बोल रहे हैं ट्रंप
ट्रंप ने कहा, ‘मैंने कहा कि जो भी देश ब्रिक्स में रहना चाहता है, रह सकता है, लेकिन हम उनके ऊपर टैरिफ लगाएंगे। नतीजा यह हुआ कि सभी देश पीछे हटने लगे। ब्रिक्स डॉलर पर हमला था, और मैंने साफ कहा कि अगर आप यह खेल खेलना चाहते हैं, तो आपके सभी उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगेगा। अब वे खुद कह रहे हैं, हम ब्रिक्स से बाहर हो रहे हैं… अब तो कोई इसका जिक्र भी नहीं करता।’
भारत की अपील
ट्रंप के इस बयान से कुछ दिन पहले ही भारत ने ब्रिक्स देशों से बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की थी, जिसे ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के खिलाफ एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका और भारत के बीच नई कूटनीतिक तनातनी पैदा हो सकती है।
ब्रिक्स को चुनौती मानते हैं ट्रंप
ट्रंप पहले भी ब्रिक्स को अमेरिका की आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देने वाला गठबंधन बताते रहे हैं। मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ बना यह समूह अब 10 सदस्य देशों तक बढ़ गया हैः जिनमें दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसके अलावा 10 साझेदार देश जैसे बेलारूस, बोलिविया और मलेशिया भी जुड़े हैं, जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों ने सदस्यता के लिए आवेदन दिया है।
वाशिंगटन का चिंतित होना तो बनता है
ब्रिक्स के तेजी से विस्तार ने वाशिंगटन को चिंतित कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह समूह “हमारे डॉलर को कमजोर करने और अमेरिका को नुकसान पहुंचाने” के लिए बनाया गया है। हालांकि, नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि वह ‘डी-डॉलराइजेशन’ (डॉलर के विकल्प की नीति) का समर्थन नहीं करती, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ब्रिक्स देश इस दिशा में आगे बढ़े तो अमेरिका 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने से पीछे नहीं हटेगा।

