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बसपा विधायकों का मतदान कानून पेचीदगियों में फंस सकता है

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एस पी मित्तल, अजमेर

8 जून को उदयपुर से जयपुर के लिए रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर हमने राजस्थान में भाजपा को हॉर्स ट्रेडिंग में फेल कर दिया है। अब कांग्रेस के तीनों प्रत्याशियों की जीत तय है। सीएम गहलोत का आत्मविश्वास बता रहा था कि तीनों प्रत्याशियों की जीत के लिए जो 123 वोट चाहिए उससे ज्यादा विधायकों का जुगाड़ हो गया है। कांग्रेस और समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक पिछले छह दिनों से उदयपुर की पांच सितारा होटल में कैद हैं। कोई विधायक इधर उधर देख भी नहीं सके इसके लिए विधायकों को 9 जून को स्पेशल प्लेन से उदयपुर से जयपुर लाया जाएगा। पुलिस की निगरानी में ये विधायक जयपुर एयरपोर्ट से दिल्ली रोड स्थित होटल लीला में रात गुजारेंगे। 10 जून को विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद इन विधायकों की बाड़ाबंदी समाप्त हो जाएगी। सीएम गहलोत जहां तीनों प्रत्याशियों की जीत के प्रति आश्वस्त हैं, वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मुख्य सचेतक महेश जोशी को अभी भी विधायकों के बिक जाने का डर है। यही वजह है कि दोनों ने एसीबी से लेकर चुनाव आयोग तक को पत्र लिखे हैं। इन शिकायती पत्रों में आशंका जताई गई है कि भाजपा की ओर से विधायकों की खरीद फरोख्त की जाएगी। सवाल उठता है कि सीएम गहलोत और डोटासरा- महेश जोशी में से कौन सही बोल रहा है। आखिर डोटासरा और जोशी विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर आशंकित क्यों हैं। क्या उन्हें अपने ही मुख्यमंत्री के कथन पर भरोसा नहीं है? डोटासरा और जोशी की आशंकाओं को इसलिए भी बल मिलता है कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा का दावा है कि उन्हें 30 भाजपा से सरप्लस विधायकों के साथ साथ 17 अन्य विधायकों का समर्थन भी है। इनमें तीन-चार वो निर्दलीय विधायक भी हैं, जो उदयपुर की बाड़ाबंदी में हैं।

फंस सकता है मतदान:

भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर कहा है कि राजस्थान में बसपा के जो 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हुए उन्हें मतदान से वंचित किया जाए। चूंकि बसपा वाले इन विधायकों का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और बहुजन समाज पार्टी में अपने इन विधायकों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए जो मतदाता सूची जारी की गई है, उसमें इन विधायकों के नाम शामिल हैं। चूंकि इन विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने पर संवैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं, इसलिए उन्हें मतदान देने से वंचित किया जाएगा। 

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