मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार शुरुआत के संकेत दे रहा है. कफ सिरप जब्ती, इंदौर के भागीरथपुरा प्रकरण और कथित स्लॉटर हाउस कांड को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है. तीन मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग भी उठ सकती है. 18 फरवरी को 4.80 लाख करोड़ रुपये का पेपरलेस बजट पेश होगा.
भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र इस बार सामान्य औपचारिकताओं तक सीमित रहने वाला नहीं दिख रहा. सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी, लेकिन सदन के भीतर सियासी तापमान पहले ही बढ़ चुका है. बीते दिनों सामने आए कफ सिरप जब्ती मामले, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के आरोप और कथित स्लॉटर हाउस कांड को लेकर विपक्ष आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में है. विपक्षी दलों ने संकेत दे दिए हैं कि वे इन मामलों को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर सरकार को कठघरे में खड़ा करेंगे. यही वजह है कि सत्र का पहला दिन औपचारिकता से ज्यादा टकराव का मंच बनता दिख रहा है.
सत्र 18 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा और कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं. इसी दौरान 18 फरवरी को करीब 4.80 लाख करोड़ रुपये का पेपरलेस बजट पेश किया जाएगा. सरकार इसे विकास और निवेश केंद्रित बजट बताने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष का फोकस उन आपराधिक और प्रशासनिक मामलों पर है, जिनसे प्रदेश की छवि पर सवाल उठे हैं. सदन में तीन मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग भी उठ सकती है. ऐसे में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की प्रक्रिया भी तीखी बहस और नारेबाजी के बीच होने के आसार हैं.
कफ सिरप जब्ती और नशा नेटवर्क पर सियासत
हाल में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़ी मात्रा में कफ सिरप की जब्ती की कार्रवाई सामने आई है. पुलिस ने इसे अवैध नशा कारोबार से जुड़ा मामला बताया है. विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में नशे का नेटवर्क बढ़ रहा है और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई के कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है. विपक्ष इस मुद्दे को युवाओं के भविष्य और कानून-व्यवस्था से जोड़कर उठाने की तैयारी में है. सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि अवैध कफ सिरप और नशीली दवाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. कई जिलों में एफआईआर दर्ज हुई हैं और सप्लाई चेन की जांच की जा रही है. सदन में इस मामले पर विस्तृत जवाब और आंकड़ों की मांग की जा सकती है.
भागीरथपुरा प्रकरण और स्थानीय तनाव
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हाल में सामने आए घटनाक्रम को भी विपक्ष मुद्दा बना रहा है. स्थानीय स्तर पर अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद गहराया था. विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिसिंग की विफलता के रूप में पेश कर सकता है. सरकार की दलील है कि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर सख्ती से कार्रवाई की गई है और स्थिति नियंत्रण में है. सदन में इस मामले की जांच, गिरफ्तारी और प्रशासनिक कदमों का ब्यौरा मांगा जा सकता है.
स्लॉटर हाउस कांड और राजनीतिक आरोप
कथित स्लॉटर हाउस कांड ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है. आरोप है कि नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित हो रही थीं. विपक्ष इसे प्रशासनिक संरक्षण का मामला बताकर उच्चस्तरीय जांच की मांग कर सकता है. तीन मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग इसी संदर्भ में उठने की संभावना जताई जा रही है. सरकार का कहना है कि जहां भी अनियमितता पाई गई है, वहां जांच और कार्रवाई की गई है. सदन में दस्तावेजी तथ्यों के आधार पर जवाब देने की तैयारी की जा रही है.
बजट और हंगामे के बीच विधायी कामकाज
सत्र के दौरान राज्यपाल का अभिभाषण और उस पर कृतज्ञता प्रस्ताव पहली कार्यवाही होगी. परंपरा के अनुसार अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का उल्लेख होगा. लेकिन विपक्ष पहले दिन से ही नारेबाजी और स्थगन प्रस्ताव के जरिए दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है. सत्र का राजनीतिक असर केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगा. बजट से पहले इन आपराधिक और प्रशासनिक मामलों पर होने वाली बहस से सरकार की जवाबदेही और विपक्ष की रणनीति दोनों की परीक्षा होगी. यदि हंगामा बढ़ता है तो विधायी कामकाज प्रभावित हो सकता है. वहीं सरकार विकास एजेंडा और निवेश पर फोकस बनाए रखने की कोशिश करेगी.

