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नोनिहालो के बचपन मे व्यापार खोजने वाले नेता मानसिक विकलांग

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राकेश गेहलोत ,
झाबुआ इन दिनों झाबुआ जिले सहित आसपास के जिलों में सरकार संस्थाओं को समान सप्लाई करने और ठेके पर उनके कार्य करने की होड़ मची हुई है , सत्ताधारी दल के नेता अपने अपने हिसाब सेटिंग बिठा कर कार्य लेकर अधिकारीयो में कमीशन बाट कर अपना घर चला रहे हैं।  वर्तमान में जिले भर की प्राथमिक और मिडिल स्कूल में सरकार द्वारा बच्चों के लिए 05 हजार और 10 हजार रुपये की खेल सामग्री खरीदने के लिए राशि दी गई जो को शिक्षको को खरीदना थी लेकिन सत्ता पक्षीय नेताओं की काली नजर इस खेल सामग्री पर पड़ी और वो जुट गये सप्लाई की सेटिंग में लगा था सरकार की इज्ज़त और बच्चों के हक का सामान बच्चों तक इन सत्ताधारी सप्लायरों के माध्यम से स्कूल तक पहुँच जाएगा उम्मीद के मुताबिक समान पहुँचना भी शुरू हो गया लेकिन पैसे कमाने की चाह में ये मानसिक रूप से विकलांग हो चुके नेताओ ने इस सामग्री को इतने घटिया रूप से सप्लाई करना शुरू कर दिया कि जिसकी कल्पना भी नही की जा सकती । प्राथमिक शाला में नेताओं द्वारा *05 हजार की राशि के एवज में जो सामग्री दी उसकी कीमत बमुश्किल 700 से 1000 रुपये होगी क्वालटी का अंदाज़ा स्वतः ही लगाया जा सकता है* ।

झाबुआ जिला में दूरदराज में गरीब आदिवासी वर्ग रहता है और उनके बच्चे इन स्कुल में जाते हैं जो बमुश्किल पड़ पाते हैं जिनकी सुविधा, स्वास्थ्य, मानसिक विकास के लिए खेल से जोड़ कर उनका विकास करने के लिए स्कूलों को खेल सामग्री दी जा रही है पर ऐसे नेता जो अपने खुद के एक दो बच्चों के लिए 0 से 05वर्ष के तक मे हजारों रुपये उनके खिलौनों पर खर्च कर देते हैं उनको मनचाहा महंगा से महंगा खिलौना दिला कर उनकी जिद्द पूरी करते हैं ऐसी स्थित में जब जिले हजारों मासूम गरीब बच्चों के लिए सरकार ने खेल सामग्री के लिए राशि दी तो इन नेताओं का पिता का प्रेम खत्म हो गया और कमाई करने के लिए जिले के गरीब बच्चों के हक को अपनी कमाई का साधन बना लिया । बेशर्म नेताओ को स्कूल में पढ़ रहे 05 से 10 वर्ष के बच्चों पर बिल्कुल तरस नही आया न ही ये सोचा कि जिस सरकार के नुमांइदे बन कर कार्य कर रहे हैं जब इस प्रकार का घटिया सामान देखेगे तो उस संस्था के बच्चों ,स्टाफ ओर ग्रामीणों में क्या मैसेज जाएगा। अपने भ्रष्ट पिपासा को शांत करने के लिए ये नेता इतने घटिया स्तर पर गिर गए कि बच्चों से उनका बचपन छीन कर अपने बच्चों का पेट भरने को आमादा हो गए। पूरा मामला प्रशासन सहित जिले के बड़े नेताओं सहित प्रदेश के नेताओं और विपक्ष के संज्ञान में आ गया है लेकिन कही से चु तक नही निकल रही है सम्भव है सिर्फ सप्लाई करने वाले नेताओं के बच्चे ही नही अधिकारी सहित विपक्ष के नेताओं और जिम्मेदारो के बच्चे भी इस हराम के पैसे में कमींशन लेकर चुप रहेंगे , *देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी को चार राज्यों में मिली जीत के बाद जनता और भाजपा के कार्यकर्ताओ नेताओ को संबोधित करते हुवे खुद मंच से बोल चुके हैं कि भ्रस्टाचार देश को दीमक की तरह खा रहा है और हम भ्रस्टाचार को खत्म कर रहे तो विरोधी परेशान हो रहे हैं* लेकिन हम भ्रस्टाचार को खत्म करके छोड़ेगे, ये वाक्य मोदी जी अच्छे हैं लेकिन जमीन पर उन्ही की पार्टी के नेता जो कि मासूम, गरीब ,आदिवासी बच्चों के हक को मार कर भ्रस्टाचार करने में नही चूक रहे हैं तो सोचो अन्य जगह क्या करते होंगे । में सरकार ,शासन, प्रशासन और उन मानसिक विकलांग नेताओ से कहना चाहता हूं कि पैसा कमाने का जरिया जो चुना है क्या उसकी कमाई के पैसे से अपने बच्चों को खाना खिला सकेंगे या खुद भी चैन की नींद सो पाएंगे क्या? अंत ने इस पूरी व्यवस्था में मासूम नोनिहलो को अपनी कमाई का जरिया बनाने वालों यही उम्मीद करूंगा कि वो उन ग्रामीण गरीब बच्चों में अपने बच्चों का बचपन देखे और उन जिम्मेदार अधिकारी ने निवदेन करूंगा कि इतने भी कायर न बने की इस प्रकार के कार्य करने वाले आप के सामने सिर उठाकर खड़े हो और इन पर कार्यवाही कर इनको जेल भेजे ताकि भविष्य में इस प्रकार की ओछी सोच रखने वाले सर नही उठा सके।

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