महज छह साल पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए रेवंत रेड्डी पर तेलंगाना में कांग्रेस ने मजबूत दांव लगाया है। कहां जा रहा है कि पार्टी ने रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाकर तेलंगाना के सबसे मजबूत और प्रभावशाली रेड्डी समुदाय को अपने साथ जोड़ा है। इसके साथी पार्टी ने यह संदेश भी दिया है कि अगर दमदार व्यक्तित्व उनकी पार्टी में जुड़ता है, तो वह भी भारतीय जनता पार्टी की तरह दूसरे दल से आए नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा सकते हैं। पार्टी से जुड़े नेता भी मानते हैं कि रेवंत रेड्डी सिर्फ तेलंगाना ही नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश समेत दक्षिण की सियासत में वाईएसआर की तरह मजबूत चेहरे बनकर आगे बढ़ेंगे। फिलहाल तेलंगाना में रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने दक्षिण के सियासत में मजबूत पैठ बनाने की रणनीति तैयार की है।

तेलंगाना राज्य के बनने के बाद से पहली बार कांग्रेस को यहां सत्ता मिली है। सत्ता के साथ ही पार्टी ने राज्य के युवाओं की पसंद रहे रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बना कर राज्य में और पार्टी में बड़ा संदेश दिया है। सियासी जानकार और वरिष्ठ पत्रकार किरण डी कुमार कहते हैं कि रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से कांग्रेस ने एक साथ कई निशाने साधे हैं। सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात तो यही है कि कभी एबीवीपी और टीडीपी में रहे रेवंत रेड्डी को पार्टी ने सत्ता सौंप दी। वह कहते हैं कि इसका सीधा मतलब यही है कि कांग्रेस अब उस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है जिसमें जिताऊ चेहरे और पसंद किए जाने वाले व्यक्तित्व को पार्टी आगे करेगी। इसके अलावा रेवंत रेड्डी की लोकप्रियता सिर्फ तेलंगाना ही नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश समेत आसपास के दक्षिण भारतीय राज्यों में भी मजबूत है।
कांग्रेस पार्टी भी यह चाहती है कि विधानसभा परिणाम के बाद वह लोकसभा चुनावों में न सिर्फ बेहतर प्रदर्शन करें, बल्कि सियासी रूप से खुद को दक्षिण में और मजबूत करें। इस लिहाज से पार्टी ने रेवंत रेड्डी को आगे बढ़ाया है। कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं दक्षिण भारत में खासतौर से आंध्र प्रदेश के क्षेत्र में वाईएसआर के बाद उनके पास कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा था। पार्टी ने वाईएसआर के बाद जिस पर दांव लगाने की कोशिश की वह भी सफल नहीं हो सके। वह कहते हैं कि वैसे तो दक्षिण की सियासत में रेड्डी समुदाय महज पांच फ़ीसदी ही है। लेकिन सियासी तौर पर यह समुदाय राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे मजबूत माना जाता है। पार्टी आला कमान ने भी महज छह साल पहले कांग्रेस में शामिल होने वाले रेवंत रेड्डी को इसीलिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी ताकि एक संदेश इस पूरे में जा सके।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि रेवंत रेड्डी के माध्यम से कांग्रेस पार्टी ने अगले दो दशक की सियासत का एक बड़ा खाका खींचा है। वरिष्ठ पत्रकार किरण डी कुमार कहते हैं कि 54 साल के रेवंथ रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने उसे वर्ग को संदेश देने की कोशिश की है जिसमें नेतृत्व की क्षमता है। वह कहते हैं कि बीते 9 सालों से कांग्रेस पार्टी लगातार सत्ता में आने की जद्दोजहद कर रही थी, लेकिन लाचार नेतृत्व और कमजोर रणनीति के चलते यह सफल नहीं हो पा रहा था। वह कहते हैं कि तेलंगाना में भी पहले बुजुर्ग नेताओं की ही सबसे ज्यादा चलती थी। लेकिन रेवंत रेड्डी के 2021 में पार्टी अध्यक्ष बनने के साथ जिस तरीके से परिस्थितियां बदली और रणनीति के अनुरूप काम हुआ। उसी का परिणाम 2023 विधानसभा चुनाव के नतीजे हैं।
तेलंगाना कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता एचएन राव कहते हैं कि 2021 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही रेवंत रेड्डी ने पार्टी में आक्रामक रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। नतीजा यह हुआ कि तत्कालीन मुख्यमंत्री केसीआर के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय और नगर स्तर पर बड़े आंदोलन करने शुरू कर दिए। केसीआर की योजनाओं की जमीन पर उतरी हकीकत से जनता को रूबरू कराना शुरू कर दिया। इसके अलावा पार्टी में रेवंत ने सबको साथ कर आगे की रणनीति पर भी काम किया।
वरिष्ठ पत्रकार किरण कहते हैं कि जो काम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तम रेड्डी नहीं कर सके वह रेवंत ने करना शुरू किया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम पार्टी को रणनीतिक तौर पर मजबूत करना और आंदोलन के जरिए जन-जन तक अपनी बात पहुंचाना शामिल था। वह कहते हैं कि तेलंगाना की सियासत का पूरा असर आंध्र प्रदेश पर भी पड़ता है। वह कहते हैं कि यही वजह है कि रेवंत रेड्डी की आक्रामक कार्यशैली का आंध्र प्रदेश तक संदेश देने के लिए कांग्रेस ने उनको बड़ी जिम्मेदारी दी। रेवंत रेड्डी गांधी परिवार के इन 6 सालों में सबसे करीबी भी हो गए थे।