ख्वाजा साहब के उर्स का झंडा 29 जनवरी को चढ़ेगा और चांद दिखने पर 6 दिवसीय उर्स की शुरुआत 3 फरवरी से होगी।
उर्स के दौरान दरगाह में प्रमुख धार्मिक रस्में रात को ही होती हैं और अभी सरकार ने रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक धार्मिक स्थलों को बंद रखने का आदेश दे रखा है।
मेहंदीपुर बालाजी के बाद राजस्थान का खाटूश्याम जी का मंदिर भी अनिश्चित काल के लिए बंद।
एस पी मित्तल, अजमेर
अजमेर स्थित दरगाह में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स का परंपरागत झंडा 29 जनवरी को दरगाह के बुलंद दरवाजे पर चढेगा, इसके बाद चांद दिखने पर 3 फरवरी से छह दिवसीय उर्स की धार्मिक रस्में शुरू हो जाएंगी। उर्स के दौरान जियारत के लिए देश भर से बड़ी संख्या में जायरीन अजमेर आते हैं। उर्स की तैयारियों को लेकर 12 जनवरी को अजमेर प्रशासन की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने दरगाह से जुड़े प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे उर्स में जायरीन के नहीं आने को लेकर अपील जारी करें। कलेक्टर ने कहा कि अजमेर में भी कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। सरकार की गाइड लाइन के अनुरूप अजमेर में धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। मौजूदा समय में धार्मिक स्थलों को रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद रखा जा रहा है। लेकिन सवाल उठता है कि जब ट्रेन, बस, निजी वाहन आदि से परिवहन सेवाएं शुरू है तब क्या जायरीन को उर्स में आने से रोका जा सकता है? दरगाह में प्रतिमाह छठी की रस्म होती है। इतने प्रतिबंध के बाद भी छठी की रस्म में बड़ी संख्या में जायरीन आते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि परिवहन सेवाएं जारी रहती हैं तो देशभर के जायरीन को उर्स में अजमेर आने से नहीं रोका जा सकता है। जिला प्रशासन अजमेर में भले ही कितने भी प्रतिबंध लगा ले, लेकिन जायरीन तो अकीदत के चलते उर्स में शरीक होने के लिए आएगा ही। दरगाह के खादिमों की प्रतिनिधि संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने कहा कि खादिम समुदाय भी चाहता है कि उर्स के दौरान दरगाह में सुकून बना रहे। उन्होंने बताया कि ख्वाजा साहब के सालाना उर्स का झंडा 29 जनवरी को बुलंद दरवाजे पर चढ़ जाएगा। इसके बाद 3 फरवरी से छह दिवसीय उर्स की धार्मिक रस्में शुरू हो जाएंगी। उर्स की अधिकांश धार्मिक रस्में रात के समय ही होती है। उर्स के दौरान प्रतिदिन रात 8 बजे से महफिल खाने में धार्मिक कव्वालियों का दौर देर रात तक चलता है। इसी प्रकार रात 8 बजे और मध्यरात्रि को एक बजे मजार शरीफ पर गुसल की रस्म होती है। जन्नती दरवाजा भी उर्स के दौरान चौबीस घंटे खुला रहता है। जायरीन भी चौबीस घंटे जियारत करता है। उर्स में जियारत के लिए जायरीन को इंतजार भी करना होता है। अंगाराशाह ने कहा कि यदि परिवहन के साधनों से जायरीन अजमेर आ जाता है तो उसे दरगाह में आने से रोकना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि वे सरकार के गाइड लाइन के अनुरूप काम करने को तैयार है, लेकिन उर्स की धार्मिक रस्मों को किसी भी स्थिति में टाला नहीं जा सकता है। उर्स की रस्में करोड़ों जायरीन की धार्मिक भावनाओं से जुड़ी हुई है। अंगारा शाह ने उम्मीद जताई कि 29 जनवरी से पहले कोरोना का प्रकोप कम हो जाएगा।
खाटूश्याम का मंदिर भी अनिश्चित काल के लिए बंद:
13 जनवरी से राजस्थान के सीकर स्थित सुप्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। मंदिर की प्रबंध समिति ने बताया कि यह निर्णय कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लिया गया है। यह निर्णय जिला प्रशासन से विचार विमर्श के बाद किया गया है। खाटू श्याम के मंदिर में भी कोरोना काल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे थे, जिसकी वजह से सोलश डिस्टेंसिंग की पालना नहीं हो पा रही थी। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर परिसर में मास्क नहीं लगाने को लेकर भी शिकायतें मिल रही थी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में दौसा स्थित मेहंदीपुर बालाजी के मंदिर को भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। राजय सरकार ने कोरोना को लेकर जो नई गाइड लाइन जारी की है उसमें धार्मिक स्थलों को रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। यानी धार्मिक स्थल प्रात: 5 बजे से रात 8 बजे खुले रह सकते हैं। सरकार की इस छूट के कारण ही सभी धार्मिक स्थलों पर जबरदस्त भीड़ है। भीड़ के मद्देनजर ही खाटूश्याम और मेहंदीपुर बालाजी मंदिरों की प्रबंध समितियों ने अपने स्तर पर मंदिरों को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का निर्णय किया है।

