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मामला वांगचुक का: 3 मिनट का भाषण और 8 मिनट का अनुवाद?

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जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार द्वारा वांगचुक के खिलाफ पेश किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट्स (भाषण का लिखित रूप) में भारी विसंगतियां पाईं।

कोर्ट ने पाया कि सोनम वांगचुक का मूल वीडियो भाषण केवल 3 मिनट का था, लेकिन केंद्र सरकार ने उसका जो अनुवाद (Transcript) कोर्ट में पेश किया, वह 8 मिनट का था।

कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार डिजिटल इंडिया और एआई की बात करती है, तो न्यायिक रिकॉर्ड में इतनी बुनियादी गलतियां कैसे हो सकती हैं? कोर्ट ने इसे “लापरवाही” और “अदालत को गुमराह करने” जैसा कृत्य बताया।

लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और अनुवाद की शुद्धता पर कड़ी नाराजगी जताई है।

17 फरवरी, 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को तकनीकी अक्षमता और लापरवाही के लिए जमकर घेरा।

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