- चूड़ी बेचने वाले युवक की पिटाई मामले में 5 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग दल पहुंचा इंदौर
इंदौर के मामले में संयुक्त जांच दल जल्द जारी करेगा घटना की विस्तृत रिपोर्ट
भोपाल। इंदौर में चूड़ी वाले की पिटाई के मामले में पीड़ित तस्लीम के पक्ष में खड़े लोगों के विरुद्ध की गई ज़िला बदर की कार्यवाही सुनियोजित और बदले की भावना के तहत की गयी है। इस कार्यवाही को न्यायिक हस्तक्षेप के ज़रिए ख़ारिज किया जाए। यह बात इस मामले की जांच करने इंदौर पहुंचे जांच दल ने अपनी अनुशंसाओं में कही है। इसके अलवा जांच दल की मांग है कि चूड़ी बेचने वाले तस्लीम पर दर्ज मामले वापस लिया जाएं। उसे तत्काल रिहा किया जाए और दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों पर उचित कानूनी कार्यवाही की जाए।
जांच दल ने यह भी अनुशंसा की है कि पीड़ित के समर्थन में एफआईआरदर्ज कराने गए व्यक्तियों पर दर्ज मुकद्दमा वापस लिया जाए और सम्पूर्ण घटना की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जाय। साथ ही घटना को अंजाम देने वाले व्यक्तियों एवं शहर की शांति एवं कानून व्यवस्था को क्षति पहुंचाने वाले संगठनों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
जांच दल ने मालवा क्षेत्र में पांव पसार रही साम्प्रदायिकता हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए इसके ख़िलाफ़ ठोस उपाय की जरूरत पर भी बल दिया है।
गौरतलब है कि चूड़ी बेचने वाले मुस्लिम युवक की पिटाई के मामले की पड़ताल करने के उद्देश्य से एक फैक्ट फाइंडिंग दल इंदौर पहुंचा था। इस पांच सदस्यीय दल में मध्यप्रदेश लोकतांत्रिक अधिकार मंच के विजय कुमार और पल्लव, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन्स (NCHRO) से वासिद खान, मध्यप्रदेश महिला मंच से मधु और करीना एवं भीम आर्मी से साहिल खान शामिल थे। दल ने पीड़ितों से मुलाकात कर मामले को विस्तार से समझा।
क्या है मामला Indore Lynching Case का
22 अगस्त को इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र के गोविंद नगर इलाके में चूड़ी बेचने वाले तस्लीम पुत्र मोहर अली के साथ मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई। भगवा वस्त्र धारण किये हुए और अपने आप को हिंदूवादी बताने वाली भीड़ ने ना केवल तस्लीम के साथ मारपीट व लूटपाट की बल्कि धर्म विशेष के खिलाफ अपमानजनक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियां की। आरोपियों द्वारा उक्त कृत्य का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित भी किया गया।यह भी पढ़ें: Mandsaur: नारकोटिक्स पुलिस हिरासत में मौत सुनियोजित हत्या: जांच दल
पुलिस ने दी शांत रहने की सलाह
जांच दल ने एक बयान जारी कर कहा है कि मामले की छानबीन से ज्ञात हुआ कि स्थानीय पुलिस द्वारा तस्लीम के साथ हुई मारपीट को रफ़ादफ़ा करने का प्रयास किया गया। पिटाई और लूटपाट के बाद जब पीड़ित तस्लीम थाना पहुंचा तो पुलिस ने बिना एफआईआर दर्ज किए उसे थाने से वापस भेज शांत रहने की समझाइश दी।
भीड़ के दबाव में दर्ज हुई एफआईआर, बाद में पीड़ित के खिलाफ भी एफआईआर
पूरे घटनाक्रम के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद भी जब पुलिस ने किसी तरह की कार्यवाही नहीं की, तब कुछ स्थानीय लोग पीड़ित तस्लीम को लेकर एफआईआर दर्ज कराने के उद्देश्य से थाने पहुंचे। जनता में आक्रोश को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर ली गई। घटना के अगले दिन स्वयं पीड़ित तस्लीम एवं उसके पक्ष में रिपोर्ट दर्ज कराने हेतु थाने आये व्यक्तियों पर मुकद्दमा दर्ज कर दिया गया। स्थानीय पुलिस द्वारा मॉब लिंचिंग के पीड़ित तस्लीम के ऊपर ही पोक्सो सहित अन्य गम्भीर धाराओं व तस्लीम के साथ थाने थाने आये लोगो के विरुद्ध दंगा भड़काने व भीड़ जमा करने के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
जांच दल का कहना है कि पीड़ित व्यक्ति के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने के उद्देश्य से थाने पहुचे लोगों पर दंगा भड़काने, भीड़ जमा करने व अन्य गंभीर में मामले दर्ज करना जांचदल की समझ से परे है। अब स्थानीय प्रशासन ने उनमें से दस लोगों को ज़िलाबदर करने का नोटिस दिया है उनसे जबाब मांगा गया है। जबकि घटना के अगले दिन ही कट्टरपंथी हिंदूवादी संगठनों द्वारा हजारों की संख्या में पुलिस अधीक्षक ऑफिस का घेराव किया गया था, आपत्तिजनक गैर संवैधानिक नारे लगाये गए तब भी उन संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों पर 188 की कार्यवाही कर छोड़ दिया गया।
जांच दल ने कहा कि यह एकतरफा कार्यवाही जैसा प्रतीत होता है। प्रथम दृष्टया समुदाय विशेष के खिलाफ की गई सुनियोजित कार्यवाही जान पड़ती है। जिन व्यक्तियों को नोटिस दिए गए उनमें ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो उस समय घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे। न्यूज़क्लिक की खबर एक्सेस किए गए नौ में से सात नोटिस, लगभग समान सामग्री वाले, से पता चलता है कि छह आरोपियों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है, केवल रऊफ़ बेलिम के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं। “तीन मामलों में से, उन्हें पहले मामले में बरी कर दिया गया था, जिसमें गंभीर आरोप थे। केवल आईपीसी की धारा 188 (सरकारी अधिकारियों की अवज्ञा) के तहत मामले की जांच चल रही है,” उनके बेटे अज़ीम बिलाल ने यह बात न्यूज़क्लिक को बताई।
फैक्ट फाइंडिंग दल द्वारा घटना के समस्त पहलुओं पर ग़ौर करने पर यह पाया गया कि घटना चूड़ी बेचने वाले व्यक्ति के साथ जो कुछ हुआ वह पूर्णतः गैरकानूनी है। उसके साथ जो लोग खड़े हुए उन्हें प्रताड़ित करना मध्यप्रदेश की कानून की व्यवस्था की हकीकत बयान करता है।
घटना की पड़ताल के बाद फैक्ट फाइंडिंग दल ने अपनी ओर से पांच अनुशंसाएं की हैं। जो इस प्रकार हैं:—
- सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर जांच दल इस नतीजे पर पहुंचा है कि पीड़ित तस्लीम के पक्ष में खड़े हुए लोगों के विरुद्ध की गई ज़िला बदर की कार्यवाही सुनियोजित और बदले की भावना के तहत की गयी है। इस कार्यवाही को न्यायिक हस्तक्षेप के ज़रिए ख़ारिज किया जाए।
- चूड़ी बेचने वाले तस्लीम पर दर्ज मामले वापस लिया जाएं। उसे तत्काल रिहा किया जाए और दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों पर उचित कानूनी कार्यवाही की जाए।
- पीड़ित के समर्थन में एफ आई आर दर्ज कराने गए व्यक्तियों पर दर्ज किया गया मुकद्दमा वापस लिया जाए।
- सम्पूर्ण घटना की निष्पक्ष जांच हेतु एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जाय एवं घटना कारित करने वाले व्यक्तियों एवं शहर की शांति एवं कानून व्यवस्था को क्षति पहुँचाने वाले दक्षिणपंथी संगठनों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाय।
- प्रशासन द्वारा शांति एवं कानून व्यवस्था को बहाल किया जाए। शीघ्र ही शांति समिति की बैठक बुलाकर मालवा क्षेत्र में पांव पसार रही साम्प्रदायिकता हिंसा के ख़िलाफ़ ठोस उपाय किये जायें।

