रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एक बड़े विवाद के घेरे में आ गया है। जशपुर जिले की आदिवासी निवासी मरीज नुपुर एक्का नामक महिला ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, अवैध वसूली और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। मामला आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाती है। पीड़िता के अनुसार, अस्पताल ने उनके इलाज के दौरान न केवल आयुष्मान कार्ड से 3 लाख रुपये से अधिक की राशि ब्लॉक की, बल्कि उतनी ही रकम नकद में भी वसूली, और उसकी कोई बिलिंग या रसीद नहीं दी गई। यही नहीं, अस्पताल के कर्मचारियों ने यह कहकर दबाव बनाया कि “आयुष्मान कार्ड की सीमा खत्म हो गई है,” जबकि योजना के अनुसार कार्ड पर पर्याप्त राशि उपलब्ध थी।

अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोप पीड़िता ने अपनी शिकायत में जिन पर आरोप लगाए हैं, उनमें शामिल हैं डॉ. आशीष मित्तल, निदेशक, मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज डॉ. सुमन मित्तल, चिकित्सक, आशीष अग्रवाल, प्रबंधक, इन पर आरोप है कि इन्होंने मिलकर मरीज से झूठे बहाने बनाकर लगभग 3 लाख से ज्यादा की नकद वसूली की, जबकि इलाज आयुष्मान योजना के तहत पूर्णतः निशुल्क था। इतना ही नहीं, सरकारी दवाइयों को निजी फार्मेसी से बेचने, और मरीज परिवार को डराने-धमकाने के भी आरोप लगाए गए हैं। इस बीच पीड़ित के रिश्तेदार जो रायपुर में रहकर पढ़ाई करता है जो इस पूरे मामलें में पीड़ितों के साथ रहा है।
जिसे 10 नवंबर को एक अज्ञात नंबर से कोरियर बॉय का कॉल आया जिसमें पार्सल होने के नाम पर उसे न्यू राजेंद्र नगर के पास बुलाया गया। जिसकी जानकारी उसने न्यू राजेंद्र नगर थाने में दी। थाने के स्टाफ से मोबाइल नंबर द्वारा कोरियर बॉय को थाने में बुलाया और पूछताछ की। उसने पुलिस को बताया कि 3 अज्ञात लोगों ने उसे रोककर उसका मोबाइल लिया था और रोशन कुमार नाम के व्यक्ति से बात की और पार्सल होने की बात कहकर उसे मिलने बुलाया। फिर वो चला गया था। बाद में मैंने कॉल करके रोशन कुमार को उन लोगों द्वारा फोन करने और शसंकित होकर खुद ही मिलने से रोका था। इस वाक्या को लेकर रोशन कुमार को शक हुआ कि सम्भवतः ये कॉल अस्पताल प्रबंधन द्वारा ही अपने लोगों से करवाई गई हो। ताकि पीड़ित पक्ष डर जाए और मामलें की शिकायत वापस लेले। पीड़ित ने इस मामलें की जानकारी थाने में दी गई है। और अपहरण, धमकाने-चमकाने व मारपीट की आशंका जताते हुए कोरियर बॉय के बयान के आधार पर तीन अज्ञात लोगों समेत मित्तल अस्पताल के संचालक के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। जिस पर राजेंद्र नगर थाना के ASI ने कोई कार्रवाई नहीं की और पीड़ित को हमारा थाना क्षेत्र नहीं होने की बात कहकर पंडरी थाने में शिकायत करने की बात कही। राजेंद्र थाना प्रभारी कहा है कि ये पूरा मामला पंडरी थाना क्षेत्र का है। बस कोरियर बॉय से कॉल में बात करने की घटना मेरे थाना क्षेत्र की है। इस मामलें में लोकेशन ट्रेस करवाया जा रहा है और अब तक जांच की जा रही है जांच के आधार पर FIR दर्ज नहीं किया जा सकता। लोकेशन ट्रेस करने के लिए 3 से 4 दिन का समय लगता है।
शिकायत और जांच: सीएमओ ने की कार्रवाई की अनुशंसा
मामले को गंभीरता से नहीं लेने और अस्पताल द्वारा रकम नहीं लौटाने पर पीड़ित नुपुर एक्का और उनके परिवार ने इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रायपुर से की थी। शिकायत के साथ अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया, भुगतान रसीदों और वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। जांच में कई अनियमितताएँ सामने आईं। स्वास्थ्य विभाग सूत्रों के अनुसार, वीडियो में स्पष्ट रूप से यह दिखा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज पक्ष से नकद राशि ली गई, जबकि वह खर्च योजना की सीमा में आता था।
इस रिपोर्ट के आधार पर, Also Read – व्यापारी मनीष कुमार केडिया ने लिया पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ CMHO कार्यालय ने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं (DHS) को पत्र लिखकर मित्तल हॉस्पिटल को तीन माह के लिए आयुष्मान भारत योजना से निलंबित करने की अनुशंसा की है। इस पूरे मामलें में CMHO ने मित्तल अस्पताल को दोषी पाया है और संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को 19 सितंबर 2025 को पत्र लिखकर अस्पताल को 3 महीने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से निलंबित करने की अनुशंसा की है। हालांकि संचालक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा कार्रवाई की गई है या नहीं फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।
डॉ. सुमन मित्तल द्वारा पीड़ित पक्ष को धमकाने की रिकॉर्डिंग
“शिकायत वापस लेने के लिए रिश्वत की पेशकश और धमकी”—पीड़िता का आरोप नुपुर एक्का ने यह भी खुलासा किया कि शिकायत वापस लेने के बदले उन्हें ₹60,000 की रिश्वत की पेशकश की गई थी। जब उन्होंने इसे ठुकरा दिया, तो उन्हें धमकियाँ मिलने लगीं कि “स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी कार्रवाई रुकवा देंगे।” इस पर पीड़िता ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और अपनी सुरक्षा की माँग की। मंत्री ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच को तेज करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पीड़िता की मांग: न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित हो नुपुर एक्का ने अपनी बात रखते हुए कहा “मंत्री का आदेश मिलने पर हमें उम्मीद जगी। लेकिन न्याय तब तक अधूरा है जब तक दोषियों पर FIR दर्ज नहीं होती और मुकदमा नहीं चलता। यह केवल मेरा मामला नहीं, बल्कि उन सभी मरीजों की लड़ाई है जिन्हें सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगा जा रहा है।
उन्होंने अपनी माँगों की सूची भी सार्वजनिक की है, अस्पताल के विरुद्ध त्वरित और पारदर्शी जांच, और उसकी empanelment का निलंबन/रद्दीकरण। दोषियों की गिरफ्तारी और आपराधिक धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई। CMHO रिपोर्ट और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर उपभोक्ता फोरम में मुआवज़ा प्रक्रिया को गति दी जाए। परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, क्योंकि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। पीड़ित ने यह भी बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए कुछ समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में मामलें को दुसरा रंग देते हुए मरीज के स्वस्थ होने और अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए अपना पक्ष प्रकाशित और प्रसारित करवाया।
जबकि जिस अखबार में अस्पताल का पक्ष रखते हुए खबर प्रकाशित की गई थी उसी समाचार पत्र के 8 अक्टूबर 2025 के अंक में इसी मामलें में CMHO द्वारा मित्तल अस्पताल को आयुष्मान योजना से 3 महीने निलंबित करने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को अनुशंसा करने संबंधी खबर भी प्रकाशित की गई थी। पीड़ित ने स्वास्थ्य मंत्री से भी शिकायत की पीड़ित नूपुर एक्का ने अपने रिश्तेदार रोहन सिंह के साथ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से भी मिलकर मित्तल अस्पताल के खिलाफ शिकायत करते हुए पूरे मामले की जानकारी दी और उनसे न्याय की मांग की। स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़िता को कार्रवाई का आश्वासन दिया है और पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। ⚖️ कानूनी स्थिति: मामला न्यायालय में पंजीकृत इस प्रकरण में न्यायालय में Case No. 202511071200_ के तहत मुकदमा दर्ज है।
पीड़िता ने अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी संचालक स्वास्थ्य सेवाएं और Ayushman Bharat Mission Directorate को रिपोर्ट भेज दी है। विभाग ने कहा है कि आगे की कार्रवाई “प्रक्रियागत न्यायिक स्तर” पर होगी।
मित्तल अस्पताल ऐसे ही मरीज़ों से करवाते फर्जी एग्रीमेंट
🧾 मित्तल हॉस्पिटल की चुप्पी और बढ़ते सवाल इस पूरे विवाद पर अब तक मित्तल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। वहीं, जनस्वास्थ्य संगठनों और RTI एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह मामला आयुष्मान योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं के तहत गरीब मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।