अंततः तानाशाह मोदी शाह मंडली को समाज के पालनहार किसानों के समक्ष झुकना पड़ा और तीनों किसान विरोधी, जन विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। हम व्यक्तिगत रूप से और एटक की ओर से महान किसानों को धन्यवाद देते हुए उनके एतिहासिक संघर्ष का अभिनंदन करते हैं ।
अभिनंदन है धरती के जन जन के पालनहार किसानों के आंदोलन का जिन्होंने अब तक 800 से अधिक सहादत देकर पिछले 1 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं । नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद उन्होंने(किसानों) ने ठीक ही घोषणा की है कि मोदी की सिर्फ घोषणा से आंदोलन समाप्ति की घोषणा नहीं होगी। जिस दिन संसद में कृषि कानूनों को निरस्त (रिपील)करने का प्रस्ताव पारित होगा उसके बाद ही किसानों का विजयी आंदोलन के समाप्ति की घोषणा होगी। किसानों की यह जीत किसानों व मजदूर वर्ग और देश के मेहनतकश जनता को यह सबक देती है कि आने वाले दिनों में मजदूरों को बंधुआ बनाने वाला , लगभग 2 सौ वर्षों के संघर्षों से अर्जित श्रम अधिकार वाले श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिता बनाकर मजदूरों को आधुनिक कौरपोरेटों का गुलाम बनाने वाले कानूनी औजार को भी समाप्त करना पड़ेगा।
आओ मजदूर भाइयों , संकल्प लो! किसानों के इस एतिहासिक कुर्बानी से अर्जित जीत में देश की जनता मजदूर वर्ग और तमाम लोगों का समर्थन और योगदान रहा है जिसके लिए उन सभी का भी कोटि-कोटि अभिनंदन।
अब अगला पड़ाव मजदूरों के छीने गए कानूनी कवच युक्त अधिकार की पुनर्बहाली एवं चारों मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं से मुक्ति के संघर्ष को और तेज करने का है । चारों श्रम संहिताओं को समाप्त कराने का समर शेष है।इस एतिहासिक जीत का जश्न मनाने के साथ ही देश भर में संकल्प लें कि आने वाले समय में जनगोलबंदी जारी रखेंगे। इसलिए आओ अपनी एकता ,अपनी ताकत को मजबूत करते हुए चार श्रम संहिता को समाप्त कराने की लड़ाई को तेज करो। देश में जनतंत्र के बहाली की लड़ाई को तेज करो ।भारत में संविधान बचाने की लड़ाई को तेज करो और निरंकुश आधुनिक फासीवादी प्रवृत्ति की हुकूमत को एक बार झुकने पर मजबूर किया अब फिर उनकेे समर्पण करने के लिए व्यापक जनगोलबंदी की तैयारी करो । मजदूर किसान एकता जिंदाबाद ,!किसानों का एतिहासिक बिजयी संघर्ष जिंदाबाद! मजदूर किसान एकता को आगे बढ़ाओ– किसान और मजदूरों की जीत निश्चित होगी!!!!
Ss Mourya उप महासचिव AITUC MP

