एस पी मित्तल, अजमेर
सोशल मीडिया पर फर्जी और झूठी खबरें चलाकर आम लोगों को तो परेशान किया ही जाता है, लेकिन अब खुराफाती तत्व सीधे पुलिस को भी चुनौती देने लगे हैं। 21 दिसंबर को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर अजमेर के कथित सटोरियों के नाम ठिकाने और मोबाइल नंबर की लिस्ट वायरल की गई। इस लिस्ट में बताया गया कि अजमेर में किन किन स्थानों पर सट्टेबाजी हो रही है। यह लिस्ट तब वायरल की गई, जब 20 दिसंबर को ही प्रशिक्षु आईपीएस सुमित मेहरदा के नेतृत्व में अलवर गेट थाना क्षेत्र में आकस्मिक कार्यवाही कर 17 सटोरियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की प्राथमिक जांच में इस सट्टेबाजी के लिए अलवर गेट थाने की लापरवाही को माना गया। इसलिए पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने थाना प्रभारी सुनीता गुर्जर को लाइन हाजिर कर दिया। सोशल मीडिया पर सूची वायरल कर खुराफाती तत्व यह बताना चाह रहे थे कि अजमेर में सिर्फ अलवर गेट थाना क्षेत्र में सट्टेबाजी नहीं होती बल्कि शहरभर में होती है।
इस कथित सूची में कितनी सच्चाई है यह तो पुलिस ही जाने, लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने इस बार सीधे अजमेर पुलिस को चुनौती दी है। अब पुलिस की ही यह जिम्मेदारी है कि खुराफातियों को जल्द गिरफ्तार करे। पुलिस के पास आईटी के विशेषज्ञ होते हैं। हर थाने में ऐसे जानकार नियुक्त हैं। सोशल मीडिया पर जो सूची जारी हुई है, उसमें भाजपा की पार्षद भारती श्रीवास्तव का भी नाम है। पार्षद श्रीवास्तव ने इस सूची को उनकी छवि खराब करने वाली बताया है। भारती की शिकायत पर क्लाक टावर पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया है। क्लॉक टावर के थाना अधिकारी दिनेश कुमावत ने बताया कि आईटी के जानकारों से उन व्यक्तियों का पता लगाया जा रहा है जिन्होंने ऐसी सूची सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। कुमावत ने कहा कि झूठी खबरों को फॉरवर्ड करने वाले भी आईटी एक्ट में दोषी हैं। इस संबंध में वाट्सएप को भी पत्र लिखा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पहली बार किस व्यक्ति ने सूची को पोस्ट किया है।
इस संबंध में एसपी विकास शर्मा का भी कहना है कि सटोरियों के खिलाफ समय समय पर कार्यवाही की जाती है। यदि किसी व्यक्ति के पास सट्टेबाजी की जानकारी है तो वह सीधे उन्हें भी बता सकता है। अवैध कारोबार को रोकने में पुलिस का रवैया सख्त है। कथित सटोरियों की सूची को लेकर पुलिस में जो जांच पड़ताल शुरू की है उससे उन खुराफातियों बेचैनी है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसी सूची पोस्ट की है। पुलिस को प्राथमिक जांच में महत्त्वपूर्ण सुराग भी मिले हैं।

