शक्तिकांत दास जब RBI गवर्नर बने तो उस समय क्या आर्थिक स्थितियां थीं? शक्तिकांत दास ने 6 साल के कार्यकाल में कौन कौन सी चुनौतियां झेलीं? बतौर RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की सबसे बड़ी उपलब्धियां कौन सी हैं? नवनियुक्त RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के सामने कौन सी चुनौतियां हैं? क्या MPC फरवरी 2025 में होने वाली अगली बैठक में रेपो रेट में कटौती करेगी?
संजय मल्होत्रा उस समय भारत के केंद्रीय बैंक के गवर्नर की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं जब आरबीआई के सामने यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि वह महंगाई पर ज्यादा ध्यान दे या सुस्त होती अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ब्याज दरों को कम करे। विगत एक महीनों के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ब्याज दरों को घटाने की मांग की है।
जिस तरह से दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर घटी है, उससे कर्ज को सस्ता करके आर्थिक विकास को रफ्तार देने की मांग और तेज हो गई है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समीक्षा समिति ने पिछले शुक्रवार को लगातार 11वीं बार ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है।
डिजिटल करेंसी पर भी लेना होगा फैसला
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के कार्यकाल में कई अहम फैसले होने की संभावना है। इसमें क्रिप्टोकरेंसी से लेकर बैंकिंग सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग जैसी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल, डिजिटल करेंसी का विस्तार जैसे मुद्दे हैं। आरबीआई ने इन मुद्दों पर आतंरिक विमर्श शुरू किया है। इसके बावजूद महंगाई पर काबू पाना आरबीआई का अहम मकसद रहेगा।

