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चारधाम यात्रा 22 अप्रैल से,जोशीमठ खिसक रहा, बद्रीनाथ कैसे पहुंचेंगे श्रद्धालु

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जोशीमठ

22 अप्रैल 2023 से चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है। करीब सवा लाख लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। चारधाम यात्रा के रूट पर ही जोशीमठ भी पड़ता है। यात्रा शुरू होने में बस दो महीने बचे हैं, लेकिन बद्रीनाथ हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे बन जाने और जल स्त्रोत फूटने की खबरें आ रही हैं। सड़कों पर ये ताजे गड्ढे 10 फीट तक भी गहरे हैं।

20 फरवरी को जोशीमठ में रेलवे गेस्ट हाउस के पास करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया, ये गड्ढा आम गड्ढा नहीं, बल्कि जोशीमठ के दरकने से ही जुड़ा है। जोशीमठ के पास बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर करीब 10 और बड़ी दरारें आने की खबर है।

26 फरवरी को भी बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर भुस वडियार के पास अचानक पानी बहने लगा। बाद में कहा गया कि ऐसा खेती के लिए बनी पाइपलाइन फटने से हुआ। SDM जोशीमठ कुमकुम जोशी मौके पर पहुंचीं और बताया कि पानी रिसने से सड़क को नुकसान हुआ है, भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

26 फरवरी को जोशीमठ के मेन मार्केट के पास अचानक पहाड़ से पानी बहकर आने लगा। लोग डर गए कि इससे चट्टानें न खिसकने लगें। हालांकि, दोपहर तक रिसाव बंद हो गया।

जोशीमठ खिसक रहा, बद्रीनाथ कैसे पहुंचेंगे श्रद्धालु
चारधाम यात्रा बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री से गुजरती है। जोशीमठ के सुनील, स्वी, मनोहरबाग, टिनाग, सिंहधार, मारवाडी, चुनार, गांधीनगर, रविग्राम, कोठिला में मकानों और खेतों में नई दरारें आ रही हैं। जोशीमठ रेलवे रिजर्वेशन केंद्र के सामने बद्रीनाथ हाईवे पर दो दिन पहले हुए एक बड़े गड्ढे को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की टीम में पत्थर डालकर भरने का काम शुरू किया है।

रोपवे तिराहे के पास भी एक बड़ा गड्ढा हो गया है। जोशीमठ और मारवाड़ी के बीच 10 किमी के दायरे में नई दरारें आने की बात जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संजय उनियाल ने भी मानी है। संघर्ष समिति से जुड़े अतुल सती ने कहा- ‘अभी तो थोड़ी ही बारिश में ये गड्ढे बन रहे हैं, दरारें आ रही हैं। दो महीने बाद जब यहां से हजारों वाहन और लाखों लोग गुजरेंगे तब क्या होगा।’

उधर, तहसीलदार रवि शाह ने हालात काबू में बताए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि चारधाम यात्रा के लिए जोशीमठ का ये रूट और बद्रीनाथ हाईवे तैयार है?

जोशीमठ से बद्रीनाथ जाने वाले रास्ते में 20 फरवरी की सुबह करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया था। बाद में BRO की टीम ने इसकी मरम्मत की।

फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत जोशीमठ में डिजास्टर मैनेजमेंट कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन भी जोशीमठ शहर में कैंप बनाएगा। इससे कोई इमरजेंसी होने पर टीम राहत के लिए तुरंत पहुंच पाएगी।

बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष अजयेंद्र के मुताबिक ‘पर्यटन विभाग इस साल चारधाम यात्रा में यात्रियों की सीमा तय कर सकता है। चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड 40 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।’

जोशीमठ में दरारें बढ़ रहीं, मुआवजा और पुनर्वास सिर्फ वादों में
भले ही उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुटी हो, लेकिन जोशीमठ के लोगों को अब भी चिंता है कि उनके घर कैसे बचेंगे, वो कहां रहेंगे। दरारें लगातार बढ़ रही हैं और दरके हुए घरों को छोड़कर कैंप और दूसरी जगहों पर रह रहे लोगों को स्थायी ठिकाना और मुआवजा नहीं मिल पाया है।

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती कहते हैं कि ‘नरसिंह मंदिर को जाने वाले रास्ते में नई दरारें दिख रही हैं। यही रास्ता जोशीमठ से बद्रीनाथ को जाने वाला मुख्य मार्ग है।’ सती के मुताबिक, जोशीमठ से मारवाड़ी जाने वाले रास्ते में भी नई दरारें देखने में आई हैं, इस रास्ते का इस्तेमाल यात्री बद्रीनाथ से लौटने के लिए करते हैं और ये बाद में जोशीमठ के मुख्य शहर से होकर गुजरता है।

जोशीमठ में घरों के दरकने का सिलसिला 50 दिन पहले शुरू हुआ था। शुरुआत में तो जोर-शोर से चर्चा हुई, दिन-रात टीवी पर कवरेज हुई, लेकिन अब जोशीमठ पर किसी का ध्यान नहीं। करीब 50 दिन से जोशीमठ आपदा के पीड़ित तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं। कई बार मशाल जुलूस और रैलियां भी निकालीं।

लोगों का आरोप है कि सरकार सिर्फ टालमटोल कर रही है। आंदोलन के नेता अतुल सती ने बताया कि आपदा प्रभावितों के लिए पुनर्वास, विस्थापन और मुआवजा राशि क्या है, इसकी घोषणा सरकार को जल्द करना चाहिए। लोगों के रहने का इंतजाम करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

900 परिवारों ने घर छोड़ा, होटलों-रिश्तेदारों के घर में रह रहे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जोशीमठ शहर में अब तक कुल 868 घरों में दरारें आई हैं, वहीं 181 घर अनसेफ जोन में हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके गांधीनगर, सिंहधार, मनोहरबाग और रवि ग्राम हैं। करीब 900 घरों से विस्थापित हुए लोगों को सरकारी बिल्डिंगों और होटलों में ठहराया गया है।

जोशीमठ के करीब 40 प्राइवेट होटलों में विस्थापित परिवारों को रखा गया था, जो अब तक इन्हीं होटलों में रह रहे हैं। करीब 149 परिवार या तो अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं या फिर किराए के मकान में रहने लगे हैं। सरकार का दावा है कि अब तक पीड़ितों को उनके नुकसान के आधार पर 5 हजार से 1 लाख रुपए प्रति परिवार की मदद दी गई है। इस पर 6 करोड़ 34 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

प्रशासन ने करीब 900 घरों पर रेड क्रॉस का निशान लगाया है, यानी ये रहने के लिहाज से सुरक्षित नहीं हैं।

जोशीमठ के होटल पीड़ितों से भरे, फिर यात्री कहां ठहरेंगे
जोशीमठ के ज्यादातर होटलों में आपदा पीड़ित रह रहे हैं। होटल मालिक नवनीत सती कहते हैं- ‘जोशीमठ के कई होटल डेंजर जोन में आ चुके हैं। जो होटल डेंजर जोन से बाहर हैं, वहां पहले से ही पीड़ितों के परिवार रह रहे हैं।

पहले जोशीमठ में चारधाम यात्री रुका करते थे, वो इस बार मुमकिन नहीं है। होटल पहले से ही पीड़ितों से भरे हुए हैं, यात्रियों के रुकने के लिए जगह ही नहीं है। सरकार को सोचना चाहिए कि अगर यही हालात रहे तो यात्रा कैसे होगी।’

हर बार चारधाम यात्रा के पहले मालिक अपने होटलों की मरम्मत कराते थे। इस बार मरम्मत का टाइम ही नहीं मिला। अतुल सती बताते हैं- ‘होटल मालिक डर रहे हैं कि अगर वो अपने होटल की मरम्मत में 3-4 लाख रुपए खर्च करें और कल को होटल में दरारें आ जाएं तो पैसा बर्बाद हो जाएगा।’

‘शहर में डर का माहौल है, जिन घरों में दरारें आई थीं, वे दरारें बढ़ रही हैं। कुछ नए घरों में भी दरारें दिख रही हैं। ऐसे माहौल में चारधाम यात्रा कैसे होगी समझ नहीं आ रहा।’

उत्तराखंड परिवहन महासंघ के अध्यक्ष सुधीर राय बताते हैं, ‘हमें जानकारी मिली की जोशीमठ वाले रोड पर 10 फीट का गड्ढा हो गया है। अभी तो वहां सामान्य ट्रैफिक है। यात्रा शुरू होगी तो लाखों गाड़ियां गुजरेंगी और अगर रास्ते में ऐसे ही गड्ढे और दरारें होने लगेंगी, तो यात्रा में बहुत मुश्किल होगी।’

25 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
उत्तराखंड के टूरिज्म मंत्री सतपाल महाराज ने 24 फरवरी को चारधाम यात्रा के लिए मीटिंग की और सभी विभागों को कहा है कि वे यात्रा के लिए पूरी तैयारी कर लें। यात्रा के दौरान लोकेशन की कैपिसिटी का खास ख्याल रखा जाएगा। कहीं भीड़ न हो, इसके इंतजाम किए जाएंगे। राज्य सरकार ने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD), नेशनल हाईवे और BRO को सड़क की अच्छी तरह मरम्मत करने के निर्देश दिए हैं।

2023 की चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया यानी 22 अप्रैल से होगी। इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलेंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल और बद्रीनाथ के कपाट 27 अप्रैल को खुलेंगे। यात्री पर्यटन विभाग की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर लॉग इन करके रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। वहीं वॉट्सऐप नंबर- 8394833833 और टोल फ्री नंबर 1364 भी जारी किया गया है, इनके जरिए भी रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

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