इन्दौर कई मायनो मे पुरे विश्व मे प्रसिद्ध है लेकिन खान पान की बात हो तो नाम सिर्फ इन्दौर का ही आता है, इन्दोरी भिया लोग “चटोरे” के नाम से पुरे भारत मे नाम रोशन कर रहे है, खाने का नाम सुना नहीं की चटोरो की नज़र इधर उधर घुमने लगती है, हर बार खाने को कुछ नया चाहिए लेकिन खाते इन्दोरी तरीके से, क्या करे आदत जो है, पिज़्ज़ा, बर्गेर मे भी सेव चाहिए और वो भी हरी चटनी के साथ, घूमेगा मर्सिडीज़, ओडी कार मे, लेकिन इस चटोरे को खाने को पोहे, जलेबी, कचोरी, समोसा चाहिए, बेचारे के.ऍफ़.सी. मेक्डोनाल्ड वालो को तो सुबह सुबह तो ग्राहकों का टोटा रहता है कई बार हेड ऑफिस चिट्टी लिख चुके है की बर्गेर और पिज़्ज़ा को इन्दोरी टेस्ट में कस्टमाइज करना पड़ेगा !
बरहाल जब बात चटोरो के खाने की हो तो खाने की बाद कुछ पीने को भी चाहिए, वो भी हेवी, आइस क्रीम शेक, शिकंजी, लस्सी, रस, शरबत आदि पीना यह का रिवाज़ है, इन्दौर आने के बाद कई आहार विशेषज्ञ (dietitian) को यह देख कर ही हार्ट अटैक आ चूका है, ये चटोरे केलोरी वेलोरी कुछ नहीं जानते वो तो बस जानते है खाना और पीना, में भी तो हु इन्दोरी भिया, मेरे बहुत ही घनिष्ट मित्र मुबारिक मंसूरी जी का फ़ोन आया बोले बजाज खाना चौक आ जाओ, अरे भिया वो सराफे के पास वाला यार, पहुच गए जाहिद मालिक साहब शरबत वालो के ठेले पर, उनकी उम्र देख कर ही शरबत के जाएके (टेस्ट) का अंदाजा हो गया था, बोले 35 तरह के फलो के कुदरती शरबत है, कोई अस्सेसं नहीं सभी नेचुरल है, हमने पहले अमरुद फिर जामुन और आखिर में तरबूज का जयका लिया, मेरे लिया यह पहला तज़रबा था और यह बेहद सुखद रहा क्युकी पहले तो नेचुरल शरबत मिलना मुश्किल है और अगर मिल भी जाये तो टेस्ट, यह दोनों मिल गए, शरबत पीते पीते उनका इंटरव्यू भी ले डाला, जाहिद मालिक जी ने बताया की बचपन से वो यही काम करते आ रहे है, अपने पुरे परिवार को इस पेशे से ही पाला है, बच्चो को खूब पढ़ाया और आज बच्चे विदेश में है, आज काम सिर्फ अपने शोक के लिए करते है, जो शरबत पीना जानते है वो यही आते है, इन शरबतो के फोर्मुले बेचने के लिए कई ऑफर आये लेकिन नहीं बेचा क्युकी शोक बेचे नहीं जाते !
बस अब आप यह मत कहना की एक साथ 3 शरबत गटक गए भिया, आदत है यार, मगर अगर आप इन्दौर मे है और नेचुरल शरबत का स्वाद लेना चाहते है तो बजाज खाना चौक चले आये शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक जाहिद मालिक साहब के ठेले पर !

