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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मेहरबान तो राजस्थान लोक सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ पहलवान

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एस पी मित्तल, अजमेर

कहावत कुछ भी हो, लेकिन 22 दिसंबर को जिस शान-ओ-शौकत के साथ राजस्थान लोक सेवा आयोग का 73वां स्थापना दिवस मनाया गया, उसे देख कर यही कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मेहरबान हैं तो राजस्थान लोक सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ पहलवान (ताकतवर) बने हुए हैं। किसी भी संस्था का स्थापना दिवस तो हर साल मनाया जाता है, लेकिन यदि स्थापना दिवस के समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिरकत करें तो अहम बात होती है और यदि मुख्यमंत्री एक माह की अवधि में एक ही संस्थान के समारोहों में दो बार भाग लें तो यह और भी बड़ी बात है। कोई 25 दिन पहले ही सीएम अशोक गहलोत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के अजमेर स्थित मुख्यालय के परिसर में नए ब्लॉक के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। तब आयोग के अध्यक्ष पद पर भूपेंद्र यादव विराजमान थे। चूंकि दो दिसंबर को यादव का कार्यकाल पूरा हो रहा था, इसलिए सीएम गहलोत ने ब्लॉक निर्माण का शिलान्यास भी कर दिया। तब ब्लॉक निर्माण का शिलान्यास भी कर दिया। तब यादव को ओब्लाइज किया गया और अब कार्यवाहक अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ को पहलवान बनाया जा रहा है। सीएम गहलोत राठौड़ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। राठौड़ की नियुक्ति गत भाजपा शासन की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने की थी, लेकिन सीएम गहलोत ने भूपेंद्र यादव की सेवानिवृत्ति के बाद राठौड़ को ही आयोग का कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया। यूं सीएम गहलोत भाजपा के हर कार्य की आलोचना करते हैं। भाजपा के लोगों को साम्प्रदायिक मानते हैं, लेकिन भाजपा की विचारधारा वाले शिव सिंह राठौड़ अब सीएम गहलोत को इतने अच्छे लग रहे हैं कि आयोग का ताकतवर अध्यक्ष बनने से कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। राठौड़ का आयोग में छह वर्ष का कार्यकाल 29 जनवरी 2022 को हो रहा है, तब राठौड़ को ही आयोग का अध्यक्ष बनाए रखा जाएगा। सवाल उठता है कि आखिर भाजपा की विचारधारा वाले राठौड़ पर सीएम गहलोत इतने मेहरबान क्यों हैं? असल में राठौड़ सीएम गहलोत जोधपुर के निवासी हैं। राठौड़ अभी स्वस्थ और जवान हैं, इसलिए एक माह बाद सेवानिवृत्ति के बाद जोधपुर की राजनीति में फिर से सक्रिय होंगे। राजनीति का मैदान बदलने के लिए शिव सिंह राठौड़ आयोग का ताकतवर अध्यक्ष बनाया जा रहा है। इसलिए आयोग के स्थापना दिवस जैसे वार्षिक समारोह में भी गहलोत उपस्थिती दर्ज करवा रहे हैं। कोई माने या नहीं लेकिन यह सही है कि अशोक गहलोत किसी पर यूं ही मेहरबानी नहीं करते हैं। मेहरबानी की राजनीतिक कीमत तो वसूली ही जाती है। देखना है कि कांग्रेस शासन में आयोग के अध्यक्ष का सुख भोगने वाले शिव सिंह राठौड़ 29 जनवरी के बाद जोधपुर में किसके पक्ष में भूमिका निभाते हैं। यदि राठौड़ जोधपुर के नहीं होते तो गहलोत उन्हें कभी भी आयोग का अध्यक्ष नहीं बनाते।
भूपेंद्र यादव की अनुपस्थिति:
22 दिसंबर को आयोग के स्थापना दिवस समारोह में पूर्व अध्यक्षों को भी आमंत्रित किया गया। आयोग के निमंत्रण पर ही पूर्व अध्यक्ष बीएम शर्मा, श्याम सुंदर शर्मा, हबीब खान गौराण आदि भी शामिल हुए, लेकिन गत 2 दिसंबर को सेवा निवृत्त होने वाले भूपेंद्र यादव नजर नहीं आए। जानकारों के अनुसार यादव जयपुर में ही थे, लेकिन उन्होंने स्थापना दिवस समारोह से दूरी बनाए रखी। यादव आयोग का अध्यक्ष बनने से पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक रह चुके थे।

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