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 राजस्थान पर फोकस करना चाहिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को

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अलवर में किसान चिरंजीलाल सैनी को पीट पीट कर मारा जा रहा है तो जयपुर में शिक्षिका को जिंदा जलाया जा रहा है।

उदयपुर में गर्दन काटी तो जालोर में शिक्षक की पिटाई से 8 वर्षीय दलित छात्र की मौत। ऐसी घटनाओं के बीच गहलोत गुजरात में कांग्रेस के लिए वोट कैसे मानेंगे।

जयपुर में मंदिर के पुजारी ने स्वयं को आग लगाई

एस पी मित्तल,अजमेर

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत क्या करे और क्या न करें, यह उनके विवेक पर निर्भर करता है, लेकिन गहलोत मौजूदा समय में मुख्यमंत्री हैं, इसलिए अपने प्रदेश राजस्थान के प्रति उनका दायित्व पहला है। राजस्थान में लोग बिना भय के सुरक्षित रहे, यह जिम्मेदारी भी सीएम के नाते गहलोत की है। गहलोत 17 अगस्त को गुजरात के दौरे पर हैं, 18 अगस्त को भी गहलोत ने अहमदाबाद में रहकर कांग्रेस पार्टी की चुनाव रणनीति बनाई। गुजरात में इसी वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसलिए कांग्रेस ने गहलोत को गुजरात का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। गुजरात में रहकर गहलोत कांग्रेस को वोट देने की अपील कर रहे हैं। स्वाभाविक है कि गुजरात के मतदाता के सामने गहलोत राजस्थान में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं, जबकि पिछले तीन-चार दिनों से राजस्थान की घटनाओं को देखा जाए तो भयावह तस्वीर सामने आती है। 13 अगस्त को जालोर के छात्र इंद्र कुमार की मौत हो गई, आठ वर्षीय छात्र को मौत का कारण हेड मास्टर की पिटाई है। इस घटना से प्रदेश का दलित समाज गुस्से में है। दलित छात्र की मौत का हंगामा जालोर में हो ही रहा है कि 14 अगस्त की सुबह अलवर में किसान चिरंजीवी लाल सैनी की पीट पीट कर मार दिया गया, पुलिस ने इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोप है असद खा, स्याबु खा, साहुन, तलीम, कासिम, पोला उर्फ तफिक, विक्रम खान, वारिस और हुसैन। चूंकि अभी आरोपी एक ही समुदाय के हैं, इसलिए अलवर का माहौल बहुत गर्म है। सैनी की मौत को मॉब लिंचिंग से जोड़ा जा रहा है। जालौर और अलवर की घटनाओं के बावल के बीच ही जयपुर में एक शिक्षिका को जलाकर मार देने का मामला उजागर हुआ है। यह घटना 10 अगस्त की बताई जा रही है। आरोप है कि उधार के पैसे मांगने पर शिक्षिका को उसके 6 वर्षीय बेटे के सामने जिंदा जला दिया गया। इससे पहले भी उदयपुर में कन्हैयालाल टेलर की गर्दन काटने की घटना देश भर में चर्चित हो चुकी है। प्रदेश के बेरोजगार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जलदाय विभाग के 16 हजार पंप चालकों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिला है। कांग्रेस पार्टी के विधायक आए दिन इस्तीफे देने की धमकी दे रहे हैं। मंत्री भी एक दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी कर रहे हैं। अफसरशाही पूरी तरह बेलगाम है। कांग्रेस के विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी मान रहे है कि आम जनता के काम नहीं हो रहे हैं। प्रदेश की इतनी भयावह स्थिति होने के बाद भी सीएम गहलोत गुजरात में कांग्रेस के लिए वोट मांग रहे हैं। राजस्थान में जो घटनाएं हो रही है उससे सरकारी स्तर पर लापरवाही सामने आई है। जालोर के मासूम छात्र हेड मास्टर की पिटाई के बाद एक माह से एक के बाद विभिन्न अस्पतालों में मौत से संघर्ष कर रहा था, तब किसी ने भी छात्र की सुध नहीं ली। इसी प्रकार जयपुर की महिला शिक्षिका भी आरोपियों की धमकी की सूचना पुलिस को देती रही, लेकिन फिर भी शिक्षिका को हत्यारों से नहीं बचाया जा सका। ऐसा तब होता है जब सरकार का प्रभावी नियंत्रण नहीं होता है। प्रदेश की जनता ने देखा की पिछले दो तीन माह से सीएम गहलोत दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय गतिविधियों में व्यस्त रहे, दिल्ली में जितने दिन ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछताछ की उतने दिन गहलोत दिल्ली में ही रहे। हाल ही में महंगाई के विरोध में जब राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन हुआ, तब गहलोत ने दिल्ली में रहकर कांग्रेस का नेतृत्व किया। अच्छा हो गहलोत मुख्यमंत्री का दायित्व निभाते हुए अपने राजस्थान पर ध्यान दें।

पुजारी ने स्वयं का आग लगाई:

राजधानी जयपुर में कानून व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक और घटना 18 अगस्त को सुबह सुबह हुई। जयपुर के मुरलीपुरा स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी गिर्राज शर्मा ने स्वयं को आग लगा ली। पुजारी गिर्राज अब अस्पताल में मौत के साथ संघर्ष कर रहे हैं। पुजारी की पत्नी ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग मंदिर में धार्मिक गतिविधियां करने से उनके पति को रोक रहे थे। जन्माष्टमी के पर्व की तैयारियों पर भी लोगों को एतराज था। पुजारी को प्रताड़ित किया जा रहा था। पुजारी के साथ चल रहे विवाद की जानकारी सभी को थी। प्रताड़ना से तंग आकर ही सुबह गिर्राज शर्मा ने स्वयं को आग के हवाले कर दिया। सवाल उठता है कि आखिर पुजारी के आत्मदाह के प्रयास को क्यों नहीं रोका गया। 

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