इंदाैर
ऑनालाइन क्लासेस के कारण बच्चे मोबाइल, लैपटॉप व कम्प्यूटर पर 4 से 5 घंटे बिताने लगे हैं। इसका नतीजा यह है कि इस बार बच्चों में दृष्टि दोष के मामलों में 15% तक की बढ़ोतरी हो गई है। भास्कर ने 100 आई क्लिनिक व अस्पतालों में पड़ताल की तो सामने आया कि जिन बच्चों को पहले से चश्मे थे, उनके नंबर तेजी से बढ़े हैं।
नए मरीजों की संख्या 7% हो गई है, जो पहले 5% से कम थी। ज्यादातर स्कूलों में हर क्लास के बाद बच्चों को 10 से 15 मिनट का ब्रेक दिया जाता है, लेकिन बच्चे इस बीच ऑनलाइन गेम खेलने लग जाते हैं।
- 6000 मरीज रोज आते हैं आई हॉस्पिटल में
- 400 बच्चे होते हैं, जिन्हें दिक्कत आ रही है
- 30 मरीज औसत रोज एक डॉक्टर देखते हैं
दिन में 10 घंटे तक मोबाइल व टीवी को
एमजीएम के आई विभाग एचओडी डॉ. विजय भाईसारे के अनुसार कई बच्चे बताते हैं कि 4 से 5 घंटे की क्लास के बाद होमवर्क और गेम, टीवी मिलाकर 8-10 घंटे भी स्क्रीन टाइम रहा है। इसी का नुकसान अब देखने को मिल रहा है।
सीनियर ऑप्थैल्मलॉजिस्ट डॉ. ओपी अग्रवाल का कहना है कि कोरोना के बाद बच्चों में मायोपिया के केस काफी बढ़े हैं। सहोदया ग्रुप के यूके झा भी मानते हैं कि स्कूलों में चश्मा लगाकर आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ गई है।

