चीन अब व्यापार की दुनिया का बादशाह बनने के लिए जमीन पर ‘स्वेज नहर’ बनाने की तैयारी कर रहा है। इस भूमि आधारित परिवहन गलियारा बनने से एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई का समय घटकर आधा हो जाएगा। इतना ही नहीं, इससे समुद्री परिवहन पर निर्भरता भी कम होगी।
बीजिंग: चीन सैन्य और आर्थिक महाशक्ति बनने के बाद अब जमीन पर आधारित ‘स्वेज नहर’ बनाने जा रहा है। यह प्रोजेक्ट यूरोप को एशिया से जोड़ने का काम करेगा। बड़ी बात यह है कि इसका फायदा सबसे ज्यादा पूर्वी एशिया को होगा, जो चीन के बाद विनिर्माण उद्योग में तेजी से प्रगति कर रहा है। चीन ने इसके लिए अपने पहाड़ी शहर चोंगकिंग को चुना है। यह शहर पहले ही स्थलीय व्यापार मार्ग का केंद्र बन चुका है। यह शहर रेल लाइनों से अच्छी तरह कनेक्टेड है और यहां से पहले से ही यूरोप में मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। चीन को आशा है कि यग शहर एशिया का सबसे महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब बन सकता है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चोंगकिंग तेजी से चीन के ट्रेड नेटवर्क में एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभरा है। चीन को उम्मीद है कि अगर उसका यह मॉडल सफल होता है तो देश के पश्चिमी हिस्से में भी इसी तरह की परियोजना पर काम किया जा सकता है। इस शहर से हर दिन सैकड़ों शिपमेंट का ट्रांसपोर्ट होता है, जो वियतनाम और सिंगापुर जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को हाई स्पीड मालगाड़ियों के जरिए जर्मनी और पोलैंड समेत बाकी यूरोप से जोड़ता है।
शिपिंग समय में होगी कटौती
जमीन के जरिए ट्रांसपोर्ट में समुद्री मार्ग की तुलना में 10-20 दिन का समय बचता है। इसके अलावा सीमा शुल्क के मुद्दों को भी काफी हद तक सरल बनाता है। 2023 में आसियान बुलेट ट्रेन के शुरू होने से हनोई और चोंगकिंग के बीच शिपिंग का समय घटकर केवल पांच दिन रह गया है, जिससे माल दो हफ्ते से भी कम समय में यूरोप पहुंच जाएगा। वहीं, समुद्री मार्ग से इसे यूरोप पहुंचाने में कम से कम तीन हफ्तों का समय लगता है।
चीन ने चोंगकिंग को ही क्यों चुना
चीनी शहर चोंगकिंग एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है। इसके अलावा यह शहर एक प्रमुख उत्पादन केंद्र भी है। दुनिया के लगभग एक-तिहाई लैपटॉप का निर्माण चोंगकिंग में ही होता है। यह शहर इलेक्ट्रिक कारों के उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र भी है। इसके अलावा इस शहर के चीन के एक चौथाई चारों का निर्यात यहीं से होता है।
0 seconds of 0 secondsVolume 0%
Loading ad
चोंगकिंग का भू-राजनीतिक महत्व
जानकारों का मानना है कि चीन न सिर्फ भू-राजनीति के लिए बल्कि अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए चोंगकिंग को चुना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका के साथ चीन का व्यापार युद्ध जारी है। ऐसे में अमेरिका ने स्वेज नहर, होर्मुज और मलक्का जलडमरूमध्य पर निगरानी को बढ़ाया है। अगर भविष्य में अमेरिका इन समुद्री परिवहन गलियारों को चोक करता है तो चीन इस गलियारे के जरिए अपने आयात-निर्यात को बरकरार रख सकता है।

