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चीनी प्रोफेसर ने बताई तरकीब;अमेरिका से लड़ने के लिए गोलियां चलाने की जरूरत नहीं!

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चीनी प्रोफेसर ने चेतावनी दी है कि ईरान को अमेरिका से लड़ने के लिए गोलियां चलाने की जरूरत नहीं है. खाड़ी देशों में प्राकृतिक ताजे पानी की भारी कमी है और वे 60% पानी के लिए डिसेलिनेशन प्लांट पर निर्भर हैं. प्रोफेसर के मुताबिक, सिर्फ एक ड्रोन हमला एक वाटर प्लांट को तबाह कर लाखों लोगों को प्यासा मार सकता है. यह ‘वाटर वॉर’ बिना किसी बड़े युद्ध के पूरे क्षेत्र को घुटनों पर ला सकता है.

 ईरान फिलहाल तो अकेले ही अमेरिका-इजरायल से मोर्चा ले रहा है. उसने सऊदी अरब, कतर, बहरीन जैसे खाड़ी के तमाम देशों को भी निशाना बनाया है. हालांकि, अब युद्ध के तरीके बदल रहे हैं और हथियारों से ज्यादा दिमाग का खेल अहम हो गया है. एक चीनी प्रोफेसर ने ईरान को ऐसा सुझाव दिया है जो हटके है. प्रोफेसर का दावा है कि ईरान को अमेरिका या उसके सहयोगियों को हराने के लिए एक भी गोली चलाने की जरूरत नहीं है. ईरान सिर्फ अपनी एक चाल से लाखों लोगों के बीच हाहाकार मचा सकता है. यह रणनीति किसी मिसाइल हमले से कहीं ज्यादा घातक साबित हो सकती है.

क्या खाड़ी देशों की प्यास बनेगी उनकी सबसे बड़ी कमजोरी?

अमेरिका अपने सैनिकों को कैसे बचा पाएगा इस ‘वाटर वॉर’ से?

चीनी प्रोफेसर के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए भी पानी की सप्लाई इन्हीं लोकल सोर्सेज से होती है. प्रोफेसर का तर्क है कि जब जनता प्यासी होगी और चारों तरफ अफरा-तफरी मचेगी, तो अमेरिकी सेना का मैनेजमेंट पूरी तरह फेल हो जाएगा. उसे अपनी सुरक्षा से ज्यादा लोगों को पानी मुहैया कराने की चिंता सताएगी. यह स्थिति किसी भी देश को घुटनों पर लाने के लिए काफी है.

क्यों डिसेलिनेशन प्लांट बन गए हैं आसान निशाना?

ईरान के पास आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी है, जो रडार की नजर से बचकर सटीक निशाना लगा सकती है. डिसेलिनेशन प्लांट समुद्र के किनारे स्थित होते हैं और इनकी सुरक्षा करना बेहद चुनौतीपूर्ण है. एक छोटे से धमाके से इन प्लांट्स की कीमती मशीनें खराब की जा सकती हैं. चूंकि इन मशीनों को ठीक करने में महीनों का समय लगता है, इसलिए एक बार हमला होने के बाद सुधार की गुंजाइश बहुत कम होती है. यह खाड़ी देशों के लिए ‘अकिलीज़ हील’ (सबसे कमजोर नस) साबित हो रहा है.

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